वाराणसी में मसाने की होली: मणिकर्णिका घाट पर राख और भस्म से खेली अनोखी होली
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पारंपरिक मसान होली धूमधाम से मनाई गई। साधु-संतों ने चिताओं की भस्म से होली खेलकर भगवान शिव के प्रति भक्ति व्यक्त की, देश-विदेश के पर्यटक बने साक्षी।
वाराणसी में एक बार फिर आस्था, परंपरा और अनोखे उत्साह का संगम देखने को मिला, जहां मणिकर्णिका घाट पर मशहूर “मसान होली” धूमधाम से मनाई गई। इस खास परंपरा में श्मशान घाट की राख और भस्म से होली खेली जाती है, जो इसे देश की सबसे अलग और रहस्यमयी होली बनाती है।
हर साल की तरह इस बार भी साधु-संतों और अघोरियों ने चिताओं की राख से होली खेलकर भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त की। मान्यता है कि यह परंपरा भगवान शिव और उनके गणों से जुड़ी हुई है, जहां मृत्यु को उत्सव के रूप में स्वीकार किया जाता है। यहां होली सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के दर्शन से जुड़ी होती है।
इस दौरान घाट पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक मौजूद रहे। ढोल-नगाड़ों, हर-हर महादेव के जयकारों और भक्ति संगीत के बीच साधु-संत भस्म लगाकर नाचते-गाते नजर आए। पूरा माहौल आध्यात्मिक और उत्सवमय बना रहा, जिसने हर किसी को आकर्षित किया।
मसान होली की खास बात यह है कि यह हमें जीवन की नश्वरता और मृत्यु की सच्चाई का एहसास कराती है। जहां एक ओर लोग रंगों की होली खेलते हैं, वहीं यहां भस्म की होली जीवन के अंतिम सत्य को दर्शाती है।
हर साल यह आयोजन देश-विदेश से आए लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। वाराणसी की यह परंपरा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का भी एक अनोखा उदाहरण है।
Saloni Kushwaha 
