बाड़मेर में दर्दनाक सड़क हादसा: तेज रफ्तार निजी बस की टक्कर से मामा-भांजा शिकार, भांजे की मौत, मामा गंभीर घायल

जानकारी के अनुसार, मृतक हेमाराम पुत्र रुधनायराम जाट, निवासी बाटा, गुड़ामालानी, अपने मामा चेतनराम पुत्र चुनाराम के साथ निजी कार्य से गुड़ामालानी से बाड़मेर आए थे। दोनों मोटरसाइकिल से चौहटन सर्किल से सिंधारी सर्किल की ओर जा रहे थे। जैसे ही वे थार हॉस्पिटल के सामने पहुंचे, पीछे से तेज गति में आ रही एक निजी बस ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।

बाड़मेर में दर्दनाक सड़क हादसा: तेज रफ्तार निजी बस की टक्कर से मामा-भांजा शिकार, भांजे की मौत, मामा गंभीर घायल

बाड़मेर जिले में एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। शहर के थार हॉस्पिटल के सामने हुए दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार मामा-भांजा बस की चपेट में आ गए। हादसा इतना भयावह था कि भांजे की मौके पर ही जान चली गई, जबकि मामा गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसका अस्पताल में इलाज जारी है। इस घटना ने न केवल पीड़ित परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि शहर में सड़क सुरक्षा और निजी बसों की बेलगाम रफ्तार पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक हेमाराम पुत्र रुधनायराम जाट, निवासी बाटा, गुड़ामालानी, अपने मामा चेतनराम पुत्र चुनाराम के साथ निजी कार्य से गुड़ामालानी से बाड़मेर आए थे। दोनों मोटरसाइकिल से चौहटन सर्किल से सिंधारी सर्किल की ओर जा रहे थे। जैसे ही वे थार हॉस्पिटल के सामने पहुंचे, पीछे से तेज गति में आ रही एक निजी बस ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस की रफ्तार काफी तेज थी और चालक ने न तो हॉर्न दिया और न ही समय रहते ब्रेक लगाए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सड़क पर कई फीट तक घिसटती चली गई और दोनों सवार उछलकर सड़क पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक हालात बेहद गंभीर हो चुके थे।

मौके पर मची अफरा-तफरी

हादसे के तुरंत बाद सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने घायलों को संभालने की कोशिश की और तुरंत एंबुलेंस को सूचना दी। गंभीर रूप से घायल हेमाराम को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं मामा चेतनराम की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बाड़मेर के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

भांजे की मौत की खबर जैसे ही गुड़ामालानी स्थित उसके गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन तुरंत बाड़मेर पहुंचे। अस्पताल परिसर में मातम पसरा रहा। मृतक हेमाराम की उम्र कम बताई जा रही है और वह परिवार की बड़ी उम्मीद माना जाता था। एक ही झटके में उसकी जिंदगी खत्म हो जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

पुलिस की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही बाड़मेर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया, साक्ष्य जुटाए और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। मृतक के शव को राजकीय अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया परिजनों के पहुंचने के बाद की जाएगी।

पुलिस के अनुसार, हादसे के बाद बस चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने बस की पहचान कर ली है और चालक की तलाश के लिए टीमों को रवाना किया गया है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि हादसे के सही कारणों और बस की रफ्तार का पता लगाया जा सके।

तेज रफ्तार निजी बसें फिर सवालों के घेरे में

यह हादसा एक बार फिर बाड़मेर शहर में तेज रफ्तार निजी बसों की समस्या को उजागर करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के भीतर और मुख्य सर्किलों के पास भी निजी बसें बिना किसी नियंत्रण के तेज गति से दौड़ती हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद बस चालकों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, जिसका नतीजा ऐसे दर्दनाक हादसों के रूप में सामने आता है।

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि थार हॉस्पिटल के आसपास हमेशा भीड़ रहती है—मरीज, एंबुलेंस, बाइक और पैदल यात्री। इसके बावजूद बस चालक रफ्तार कम नहीं करते। लोगों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस की निगरानी भी यहां नाकाफी है।

सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल

इस घटना ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या शहर के भीतर भारी वाहनों की गति पर सख्ती से नियंत्रण हो रहा है? क्या निजी बसों की नियमित जांच और चालकों की जवाबदेही तय की जा रही है? ऐसे कई सवाल हैं, जिनके जवाब अभी अधूरे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में निजी बसों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उनके संचालन के नियमों को और सख्त करना जरूरी है। स्पीड लिमिट, नियमित फिटनेस जांच, ड्राइवरों की ट्रेनिंग और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी—ये सभी कदम ऐसे हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती

हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बस की रफ्तार असामान्य रूप से तेज थी। एक दुकानदार ने कहा, “बस पीछे से आई और सीधे बाइक को टक्कर मार दी। अगर चालक थोड़ा भी सावधान होता तो शायद जान बच सकती थी।” वहीं एक अन्य राहगीर ने बताया कि हादसे के बाद बस कुछ दूरी तक रुकी, लेकिन फिर चालक बस लेकर फरार हो गया।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल एफआईआर दर्ज कर देने से बात नहीं बनेगी, बल्कि निजी बस ऑपरेटरों पर भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे आगे भी होते रहेंगे।

घायल मामा की हालत

बाड़मेर राजकीय अस्पताल में भर्ती चेतनराम की हालत को लेकर परिजन चिंतित हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें गंभीर चोटें आई हैं और कुछ समय तक निगरानी में रखा जाएगा। परिवार के सदस्य लगातार अस्पताल में मौजूद हैं और दुआ कर रहे हैं कि उनकी जान बच जाए। बाड़मेर में हुआ यह दर्दनाक हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का आईना है। एक तेज रफ्तार बस ने एक युवक की जान ले ली और एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। सवाल यह है कि क्या इस घटना से सबक लिया जाएगा, या फिर कुछ दिनों बाद यह मामला भी अन्य हादसों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? जरूरत इस बात की है कि प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग मिलकर निजी बसों की मनमानी पर लगाम लगाएं। जब तक सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक ऐसे हादसे रुकना मुश्किल है।