बाड़मेर नवले की चक्की भूमि विवाद: कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचा मामला, गर्ग समाज ने लगाया अवैध कब्जे और मारपीट का आरोप

नवले की चक्की का यह जमीन विवाद बाड़मेर में प्रशासन, कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। एक ओर पीड़ित पक्ष अपने कागजात और अधिकारों के आधार पर न्याय की गुहार लगा रहा है, तो दूसरी ओर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। अब सभी की नजरें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि इस विवाद का समाधान कानून और न्याय के दायरे में कैसे किया जाता है।

बाड़मेर नवले की चक्की भूमि विवाद: कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचा मामला, गर्ग समाज ने लगाया अवैध कब्जे और मारपीट का आरोप

बाड़मेर नवले की चक्की भूमि विवाद: कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचा मामला, गर्ग समाज ने लगाया अवैध कब्जे और मारपीट का आरोप

बाड़मेर शहर के नवले की चक्की क्षेत्र में स्थित एक भूमि को लेकर चला आ रहा विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। वर्षों पुराने इस जमीन विवाद में अब सामाजिक तनाव और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल भी खड़े हो गए हैं। पीड़ित पक्ष गर्ग समाज के लोगों ने आरोप लगाया है कि उनकी खानदानी जमीन पर तेली मुसलमान समुदाय के कुछ लोग अवैध रूप से कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी विवाद को लेकर हाल ही में मारपीट की घटना भी सामने आई, जिसके बाद मामला सीधे जिला कलेक्टर टीना डाबी तक पहुंच गया।

वर्षों पुराना है जमीन विवाद

पीड़ित पक्ष का कहना है कि नवले की चक्की क्षेत्र में स्थित यह जमीन उनकी पुश्तैनी संपत्ति है। उनके पास जमीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड, पट्टे और पुराने कागजात मौजूद हैं। उनका दावा है कि वर्षों से यह जमीन उनके कब्जे में रही है और इस पर उनका शांतिपूर्ण स्वामित्व रहा है।

गर्ग समाज के लोगों के अनुसार, बीते कुछ समय से तेली मुसलमान समुदाय के कुछ लोग इस जमीन पर अपना दावा जता रहे हैं। वे जमीन को अपनी बताते हुए उस पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि संबंधित लोग अपने आर्थिक प्रभाव और दबदबे का इस्तेमाल कर उन्हें डराने-धमकाने की रणनीति अपना रहे हैं।

लेन-देन को लेकर बढ़ा विवाद

जानकारी के अनुसार, शुरुआत में यह विवाद लेन-देन और आपसी बातचीत तक सीमित था। दोनों पक्षों के बीच जमीन को लेकर बहस होती रही, लेकिन समय के साथ मामला और अधिक गंभीर होता चला गया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने कई बार स्थानीय स्तर पर समझौते और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन आरोपित पक्ष ने कथित तौर पर दबाव बनाना जारी रखा।

गर्ग समाज के लोगों का कहना है कि जमीन हड़पने की नीयत से लगातार विवाद खड़ा किया जा रहा है, ताकि किसी तरह उन्हें मजबूर किया जा सके या भय के माहौल में जमीन पर कब्जा कर लिया जाए।

मारपीट की घटना से भड़का मामला

विवाद उस समय और भड़क गया जब दो दिन पहले दोनों पक्षों के बीच कथित रूप से मारपीट की घटना हो गई। पीड़ितों का आरोप है कि जमीन विवाद को लेकर उन पर हमला किया गया, जिसमें उन्हें शारीरिक चोटें आईं। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि मारपीट की यह घटना सुनियोजित थी और इसका मकसद उन्हें डराकर जमीन से हटाना था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पा रही है, जिससे उनका भय और बढ़ गया है।

कलेक्टर टीना डाबी से लगाई गुहार

मारपीट और लगातार दबाव के बाद गर्ग समाज के पीड़ित परिवार कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने जिला कलेक्टर टीना डाबी से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी और एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है और उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा।

पीड़ितों ने कलेक्टर से मांग की कि उन्हें उनकी जमीन वापस दिलाई जाए और आरोपित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

“हमारे पास सारे कागजात हैं” – पीड़ित पक्ष

कलेक्ट्रेट पहुंचे पीड़ितों ने मीडिया और प्रशासन के सामने दो टूक कहा कि जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज उनके पास हैं। उनका दावा है कि राजस्व रिकॉर्ड से लेकर पुराने कागजों तक, सब कुछ उनके पक्ष में है। इसके बावजूद उन्हें परेशान किया जा रहा है।

पीड़ितों का कहना है कि कानून का पालन करने के बजाय दबदबे और पैसों के बल पर जमीन हथियाने की कोशिश की जा रही है, जो न केवल गैरकानूनी है बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी खतरा है।

सामाजिक तनाव की आशंका

यह मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब सामाजिक तनाव की आशंका भी जताई जा रही है। दोनों पक्ष अलग-अलग समुदायों से होने के कारण स्थिति को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो क्षेत्र में तनाव फैल सकता है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जमीन के दस्तावेजों की जांच, मौके की रिपोर्ट और दोनों पक्षों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग

गर्ग समाज के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए और किसी भी समुदाय या व्यक्ति को दबाव या बल के आधार पर न्याय से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

पीड़ितों ने यह भी मांग की कि जब तक विवाद का अंतिम समाधान नहीं हो जाता, तब तक जमीन पर किसी भी तरह की निर्माण गतिविधि या कब्जे की कोशिश पर रोक लगाई जाए।

पुलिस और राजस्व विभाग की भूमिका

सूत्रों के मुताबिक, कलेक्टर कार्यालय ने पुलिस और राजस्व विभाग से भी रिपोर्ट तलब की है। जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, सीमांकन और पूर्व में दर्ज किसी भी विवाद की जानकारी जुटाई जा रही है। यदि मारपीट की शिकायत दर्ज हुई है तो उस पर भी कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।

नवले की चक्की का यह जमीन विवाद बाड़मेर में प्रशासन, कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। एक ओर पीड़ित पक्ष अपने कागजात और अधिकारों के आधार पर न्याय की गुहार लगा रहा है, तो दूसरी ओर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। अब सभी की नजरें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि इस विवाद का समाधान कानून और न्याय के दायरे में कैसे किया जाता है।

फिलहाल, गर्ग समाज के लोगों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन निष्पक्ष जांच कर उन्हें उनकी जमीन और सुरक्षा दोनों दिलाएगा, ताकि वर्षों पुराना यह विवाद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ सके।