NSUI–Youth Congress में उथल-पुथल: संगठन सुधार या अंदरूनी सियासत?
कांग्रेस के छात्र और युवा संगठन दोनों ही संचालन, अनुशासन, सक्रियता और नेतृत्व भरोसे के बीच एक नए दौर से गुजर रहे हैं। इन संगठनों में चल रही कार्रवाई यह संकेत देती है कि कांग्रेस हाई-कमांड अपेक्षित सहयोग, संगठनात्मक प्रतिबद्धता और स्पष्ट निर्णय क्षमता को महत्व दे रही है।
कांग्रेस के छात्र-युवा संगठनों में अनुशासन और सक्रियता पर जारी विवाद
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के छात्र और युवा संगठन—नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और भारतीय युवा कांग्रेस—इन दिनों संगठनात्मक अनुशासन, निर्णय प्रक्रिया और सक्रिय नेतृत्व को लेकर एक संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। संगठन के भीतर नोटिस जारी करना, कार्यकारिणी भंग करना और पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस देना जैसी घटनाएं सामने आई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संगठन अपने कार्यशैली पर नियंत्रण के साथ-साथ स्वच्छ और सक्रिय नेतृत्व को सख्ती से परखना चाहता है।
यूथ कांग्रेस में अनुशासनात्मक कार्रवाई का दौर

राजस्थान समेत कई राज्यों में युवा कांग्रेस संगठन में नियमित अनुशासनात्मक कार्रवाई तेज़ हुई है।
पिछले कुछ हफ्तों में राजस्थान युवा कांग्रेस ने 18 जिलाध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें उनसे पूछा गया कि संगठन की विस्तारित कार्यकारिणी बैठक में राष्ट्रीय प्रभारी के साथ संवाद सत्र में वे क्यों शामिल नहीं हुए।
यह बैठक 26 नवंबर को आयोजित की गई थी, लेकिन बिना सूचना दिए कई ज़िलाध्यक्ष अनुपस्थित रहे, जिससे संगठनात्मक अनुशासन पर गंभीर सवाल उठे। और हाल ही में, यूथ कांग्रेस ने 12 और जिलाध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें भी बैठक में भाग नहीं लेने और संगठन की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी न दिखाने को मुद्दा बनाया गया है। इन नोटिसों में 24 घंटे के अंदर जवाब देने को कहा गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि संगठन व्यवहार और अनुशासन को लेकर तेजी से सख्ती बरत रहा है। विश्लेषक मानते हैं कि यह कदम “काम नहीं तो पद नहीं” नीति के अनुरूप है, जिसमें केवल पद पर बने रहना पर्याप्त नहीं माना जाएगा, बल्कि संगठन के विस्तार, आंदोलन और गतिविधियों में सक्रियता दिखाना अनिवार्य होगा।
NSUI में सक्रियता — विरोध प्रदर्शन, मार्केटिंग और राजनीति
NSUI की गतिविधियां केवल अनुशासनात्मक नोटिस तक सीमित नहीं हैं। संगठन ने समय-समय पर छात्रों और समाज के मुद्दों पर आंदोलन और जन जागरूकता अभियानों का नेतृत्व किया है।
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राजस्थान में “Aravalli Bachao” रैली: NSUI ने जयपुर में अरावली की रक्षा को लेकर रैली का आयोजन किया, जिसमें वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी शामिल हुए और पुलिस ने मार्च को रोक दिया।
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छात्र चेतना यात्रा: NSUI और युवा कांग्रेस ने चूरू में छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर भी मार्च निकाला, जिससे छात्रों की आवाज़ प्रशासन तक पंहुची।
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जरूरी मांगों पर ज्ञापन: NSUI और युवा कांग्रेस ने चित्तौड़गढ़ में मेवाड़ यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द करने एवं छात्र-छात्राओं को न्याय दिलाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
ये घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि संगठन छात्र और युवा वर्ग के मुद्दों पर सक्रियता दिखाने का प्रयास कर रहा है।

अनुशासन बनाम सक्रियता — संगठन में तनाव
हालिया नोटिस और कार्रवाईयों से स्पष्ट है कि कांग्रेस के छात्र-युवा संगठन अनुशासन और सक्रियता के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। जहां एक ओर अनुशासनहीनता और बैठक में अनुपस्थिति को गंभीर मुद्दा माना जा रहा है, वहीं संगठनात्मक गतिविधियों और आंदोलनों में नेतृत्व की भागीदारी को भी प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह दौर कांग्रेस के लिए निर्णायक प्रत्याशा वाला है —
क्या संगठन निष्क्रियता को पूरी तरह खारिज करेगा, या अधिक सक्रियताओं में से भी कुछ को अनुशासन का उल्लंघन मानकर रोका जाएगा? यह सवाल तब और महत्त्वपूर्ण हो जाता है जब NSUI और युवा कांग्रेस खुद छात्रों के हितों के लिए सक्रियता दिखा रहे हैं और लोकतंत्र, शिक्षा नीति, छात्रसंघ चुनावों आदि जैसे मुद्दों पर जोर दे रहे हैं, लेकिन संगठन के भीतर नज़रिये और निर्णय प्रक्रिया पर मतभेद दिखाई दे रहे हैं।
कांग्रेस हाई-कमान की नीति और संदेश
कांग्रेस हाई-कमान स्पष्ट रूप से यह संदेश देना चाहता है कि संगठन में अनुशासन और जिम्मेदारी का पालन अत्यंत आवश्यक है।
यह नीति केवल प्रस्तुतियों को नियंत्रित करने, बैठक में उपस्थित रहने या पेपर वर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठन को मजबूत और प्रभावी बनाना भी है। विशेष रूप से यूथ कांग्रेस और NSUI में जारी अनुशासनात्मक नोटिस, बैठक अनुपस्थिति पर सवाल और बिना सूचना के दूरी बनाए रखने की आलोचना यह दर्शाती है कि नेतृत्व चाहता है कि युवाओं को संगठनात्मक गरिमा और ज़िम्मेदारी की भावना से आगे बढ़ाया जाए। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि कांग्रेस के छात्र और युवा संगठन दोनों ही संचालन, अनुशासन, सक्रियता और नेतृत्व भरोसे के बीच एक नए दौर से गुजर रहे हैं। इन संगठनों में चल रही कार्रवाई यह संकेत देती है कि कांग्रेस हाई-कमांड अपेक्षित सहयोग, संगठनात्मक प्रतिबद्धता और स्पष्ट निर्णय क्षमता को महत्व दे रही है।
अब यह देखना बाकी है कि यह सुधारात्मक नीति संगठन में सकारात्मक बदलाव ला पाएगी, या फिर संगठनात्मक शैली और आंतरिक मतभेदों के बीच युवा नेतृत्व की सक्रियता दब जाए।

