राजस्थान में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 41 जिलों के प्रभारी सचिव बदले, एपीओ अफसरों को भी सौंपी अहम जिम्मेदारी

सरकार ने कई जिलों में संभागीय आयुक्तों को ही प्रभारी सचिव का जिम्मा सौंपा है। इससे जिला प्रशासन और संभागीय स्तर के बीच बेहतर समन्वय और सीधे मॉनिटरिंग की उम्मीद की जा रही है। माना जा रहा है कि इससे योजनाओं के क्रियान्वयन और फील्ड लेवल पर निगरानी और मजबूत होगी।

राजस्थान में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 41 जिलों के प्रभारी सचिव बदले, एपीओ अफसरों को भी सौंपी अहम जिम्मेदारी

राजस्थान सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा और अहम फैसला लेते हुए राज्य के सभी 41 जिलों के प्रभारी सचिवों को एक साथ बदल दिया है। प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं। इससे पहले 28 फरवरी 2024 को प्रभारी सचिवों में बदलाव हुआ था, लेकिन उसके बाद पहली बार इतनी व्यापक और एकमुश्त अदला–बदली की गई है। प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को सरकार की सख्ती, जवाबदेही और जिलों में निगरानी मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

एपीओ अफसरों को प्रभारी सचिव बनाना: असामान्य लेकिन अहम कदम

इस फेरबदल का सबसे दिलचस्प और असामान्य पहलू यह है कि एपीओ (Awaiting Posting Order) चल रहे दो आईएएस अधिकारियों को नियमित पोस्टिंग देने से पहले ही जिले का प्रभारी सचिव बनाया गया है।

पूरण चंद किशन (एपीओ) को दौसा

खजान सिंह (एपीओ) को सलूंबर

का प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है। हाल के वर्षों में ऐसा उदाहरण कम ही देखने को मिला है, जब एपीओ अधिकारियों को सीधे जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई हो। इससे यह संकेत भी मिलते हैं कि सरकार प्रशासनिक अनुभव का उपयोग तुरंत करना चाहती है, न कि पदस्थापन के लंबित रहने का इंतजार।

संभागीय आयुक्तों को भी जिलों की कमान

सरकार ने कई जिलों में संभागीय आयुक्तों को ही प्रभारी सचिव का जिम्मा सौंपा है। इससे जिला प्रशासन और संभागीय स्तर के बीच बेहतर समन्वय और सीधे मॉनिटरिंग की उम्मीद की जा रही है। माना जा रहा है कि इससे योजनाओं के क्रियान्वयन और फील्ड लेवल पर निगरानी और मजबूत होगी।

बड़े विभागों के वरिष्ठ सचिवों को प्रमुख जिलों की जिम्मेदारी

फेरबदल में यह भी साफ दिखता है कि सरकार ने जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, अजमेर और भरतपुर जैसे बड़े और संवेदनशील जिलों के लिए वरिष्ठ और अनुभवी अफसरों को चुना है

जयपुर – गायत्री ए. राठौड़ (प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य)

जोधपुर – भवानी सिंह देथा (प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास)

उदयपुर – टी. रविकांत (प्रमुख सचिव, खान एवं पेट्रोलियम)

बीकानेर – देवाशीष पृष्टि (प्रमुख सचिव, नगरीय विकास एवं आवासन)

अजमेर – डॉ. नीरज कुमार पवन (सचिव, युवा मामले एवं खेल)

भरतपुर – आनंदी (रजिस्ट्रार, सहकारिता विभाग)

इन नियुक्तियों से यह संकेत मिलता है कि सरकार स्वास्थ्य, शहरी विकास, महिला-बाल कल्याण, खनन और रोजगार जैसे अहम क्षेत्रों पर जिलों के स्तर पर विशेष फोकस करना चाहती है।

क्यों अहम माना जा रहा है यह फेरबदल?

प्रशासनिक जानकारों के अनुसार, यह बदलाव केवल रूटीन ट्रांसफर नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई बड़े कारण हो सकते हैं—

आगामी प्रशासनिक व राजनीतिक गतिविधियों की तैयारी

जिलों में योजनाओं की धीमी प्रगति को तेज करना

अफसरों की जवाबदेही तय करना

फील्ड लेवल पर सीधे शासन की पकड़ मजबूत करना

प्रभारी सचिव जिलों में सरकार की आंख और कान माने जाते हैं। ऐसे में एक साथ सभी जिलों में बदलाव यह दर्शाता है कि Rajasthan Government अब जिला प्रशासन को नए सिरे से सक्रिय और परिणामोन्मुख बनाना चाहती है।

आगे क्या असर पड़ेगा?

इस बड़े फेरबदल के बाद आने वाले महीनों में जिलों में

योजनाओं की समीक्षा

प्रशासनिक सख्ती

अधिकारियों की सक्रियता

और विकास कार्यों की गति

तेज होने की संभावना जताई जा रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नए प्रभारी सचिव अपने-अपने जिलों में कितनी तेजी और प्रभावशीलता से काम कर पाते हैं, और क्या यह बदलाव जमीन पर आम जनता को भी महसूस होगा।

 साफ है कि यह फेरबदल सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि राज्य प्रशासन की दिशा और प्राथमिकताओं को दर्शाने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है।