बिहार में राजनीति की हलचल तेज — निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री पर चर्चा बढ़ी
बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की संभावित राजनीतिक एंट्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। JDU के कई नेताओं ने उन्हें सक्रिय राजनीति में आने की सलाह दी है। हालांकि निशांत कुमार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी बढ़ती मौजूदगी ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।
पटना : बिहार की सियासत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को लेकर फिर राजनीतिक चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं। अभी तक निशांत ने कोई आधिकारिक राजनीतिक पद ग्रहण नहीं किया है, लेकिन विभिन्न पक्षों और नेताओं के बयानों के बाद उनकी राजनीति में संभावित प्रवेश को लेकर राजनीति में हलचल बढ़ गई है। राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा है कि JDU (जनता दल यूनाइटेड) में निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री हो सकती है और वह आगे बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। कुछ जेडीयू नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा है कि पार्टी को युवा और पढ़े-लिखे चेहरों की ज़रूरत है, जिससे संगठन की ऊर्जा और युवा वर्ग के बीच पकड़ मजबूत हो सके — खासकर पार्टी के पीढ़ीगत बदलाव के मद्देनज़र यह विचार उठाया जा रहा है।

सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी निशांत की उपस्थिति और वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ उनके बॉण्ड ने इस चर्चा को और हवा दी है। 24 जनवरी को सरस्वती पूजा कार्यक्रम में जब निशांत और नीतीश कुमार एक ही मंच पर आये, तब वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने कहा कि अब निशांत को सक्रिय राजनीति में आना चाहिए — जिस पर मुख्यमंत्री ने केवल मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज़ हो गईं।
क्या निशांत खुद राजनीति में उतरना चाहते हैं?

अब तक निशांत कुमार ने खुद इस पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। पिछले कुछ समय में यह कहा गया है कि यह निर्णय पूरी तरह से उनके और उनके पिता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथ में है, और पार्टी या अन्य कोई बाहरी शक्तियाँ इस निर्णय को तुरंत निर्धारित नहीं कर सकतीं। हालाकिं बिहार में आगामी चुनावी राजनीति के मद्देनज़र इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक पार्टियों के बीच बहस भी चल रही है — कुछ विपक्षी नेताओं ने निशांत को राजनीति में लाने को लेकर विरोध-प्रचार और रणनीतिक बयानबाज़ियाँ भी की हैं, जबकि कुछ नेता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि इसका फैसला सिर्फ परिवार और पार्टी नेतृत्व को करना चाहिए।

