सचिन पायलट को CM फेस बनाने पर राहुल गांधी तैयार? 2026 से 2028 तक क्या है पायलट की बड़ी रणनीति

कांग्रेस के कद्दावर युवा नेता सचिन पायलट का मुख्य राजनीतिक लक्ष्य अब भी स्पष्ट है—राजस्थान का मुख्यमंत्री बनना, खासकर 2028 के विधानसभा चुनाव में। यह महत्वाकांक्षा उन्होंने कभी छिपाई नहीं, लेकिन मौजूदा समय में वह पार्टी हाईकमान—राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे—के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हुए संगठन को मजबूत करने और कांग्रेस को एक प्रभावी विपक्ष के रूप में स्थापित करने पर फोकस कर रहे हैं।

सचिन पायलट को CM फेस बनाने पर राहुल गांधी तैयार? 2026 से 2028 तक क्या है पायलट की बड़ी रणनीति

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जयपुर। कांग्रेस के कद्दावर युवा नेता सचिन पायलट का मुख्य राजनीतिक लक्ष्य अब भी स्पष्ट है—राजस्थान का मुख्यमंत्री बनना, खासकर 2028 के विधानसभा चुनाव में। यह महत्वाकांक्षा उन्होंने कभी छिपाई नहीं, लेकिन मौजूदा समय में वह पार्टी हाईकमान—राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे—के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हुए संगठन को मजबूत करने और कांग्रेस को एक प्रभावी विपक्ष के रूप में स्थापित करने पर फोकस कर रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि राहुल गांधी सचिन पायलट को भविष्य का CM फेस बनाने को लेकर सकारात्मक रुख अपना चुके हैं, लेकिन इसके लिए 2026 से 2028 तक का रास्ता रणनीतिक रूप से तय किया जा रहा है।

 वर्तमान भूमिका और हाल की गतिविधियाँ 

सचिन पायलट वर्तमान में AICC महासचिव और छत्तीसगढ़ के प्रभारी हैं

छत्तीसगढ़ में उन्होंने “मनरेगा बचाओ अभियान” की अहम बैठकों का नेतृत्व किया

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों से लगातार मुलाकात कर BJP सरकारों पर आक्रामक हमला बोला

कांग्रेस ने उन्हें केरल, तमिलनाडु, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में

2026 विधानसभा चुनावों के लिए प्रमुख पर्यवेक्षक बनाया

इन जिम्मेदारियों से पायलट की राष्ट्रीय स्तर पर पकड़ और स्वीकार्यता मजबूत हुई है

इसके साथ ही हाल ही में राहुल गांधी के साथ उनकी गुप्त मुलाकातों की खबरें सामने आईं, जिनमें 2028 में राजस्थान के CM फेस को लेकर गहन चर्चा होने का दावा किया गया। कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान उन्हें राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष बनाने और आगे चलकर मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने पर विचार कर रहा है।

 नई लीडरशिप की मांग और पायलट की पोजिशनिंग

2023 विधानसभा चुनाव में हार के बाद राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत की उम्र और प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे हैं। वहीं, सचिन पायलट को

युवा चेहरा,

गुर्जर समुदाय का मजबूत नेता,

और पूर्वी राजस्थान में जनाधार वाला नेता माना जाता है।

पायलट लगातार कांग्रेस की एकता, BJP विरोध और संगठनात्मक मजबूती पर जोर देते नजर आ रहे हैं। उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स में फिलहाल जन्मदिन शुभकामनाएं, श्रद्धांजलि और संगठन से जुड़े संदेश ज्यादा दिखते हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह 2028 में सत्ता की तैयारी का सॉफ्ट संकेत है।

 सचिन पायलट के सामने अगले 3 साल की रणनीतिक चुनौतियाँ 

2026:

अन्य राज्यों में चुनावी सफलता दिलाकर

खुद को एक राष्ट्रीय स्तर के रणनीतिक नेता के रूप में स्थापित करना

2027–28:

राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष (LoP) की भूमिका पाना

इसके बाद मुख्यमंत्री पद का आधिकारिक उम्मीदवार बनना

यदि कांग्रेस 2028 में राजस्थान जीतती है,

तो सचिन पायलट की CM पद पर दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है,

क्योंकि पार्टी नई पीढ़ी और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है।

अंदरूनी चुनौती: टीकाराम जूली बनाम पायलट

हालांकि राजस्थान कांग्रेस में सचिन पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब गोविंद डोटासरा नहीं, बल्कि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली माने जा रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद जूली का राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा है

जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता मजबूत हुई है

वह कांग्रेस के मजबूत दलित वोट बैंक से आते हैं, जिसे पार्टी और विस्तार देना चाहती है

यही कारण है कि आने वाले वर्षों में CM फेस की दौड़ दिलचस्प और बहुकोणीय होने वाली है।