Rajasthan Teacher Recruitment Exam: जनवरी में होगी अग्नि परीक्षा, 9.54 लाख अभ्यर्थी होंगे शामिल
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) के लिए नए साल की शुरुआत एक बड़ी चुनौती के साथ हो रही है। बोर्ड जनवरी माह में शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन करने जा रहा है, जिसे अब तक की सबसे अहम और चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक माना जा रहा है।
जयपुर। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) के लिए नए साल की शुरुआत एक बड़ी चुनौती के साथ हो रही है। बोर्ड जनवरी माह में शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन करने जा रहा है, जिसे अब तक की सबसे अहम और चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक माना जा रहा है। इस परीक्षा में कुल 9 लाख 54 हजार अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा दो स्तरों—लेवल वन और लेवल टू—में आयोजित की जाएगी और यह प्रक्रिया चार दिनों तक चलेगी।
17 से 20 जनवरी तक होंगी परीक्षाएं
बोर्ड की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार—
लेवल वन की परीक्षा: 17 जनवरी
लेवल टू की परीक्षा: 18, 19 और 20 जनवरी
सभी परीक्षाएं एक ही पाली में आयोजित होंगी और प्रत्येक परीक्षा की अवधि ढाई घंटे निर्धारित की गई है। इतने बड़े पैमाने पर हो रही इस परीक्षा को लेकर प्रशासन और बोर्ड दोनों पूरी तरह सतर्क हैं।
12 जनवरी को जारी होंगे ई-प्रवेश पत्र
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अनुसार परीक्षा से पहले 12 जनवरी को अभ्यर्थियों के ई-प्रवेश पत्र (Admit Card) जारी किए जाएंगे। परीक्षा केंद्र में प्रवेश के लिए ई-प्रवेश पत्र डाउनलोड करना अनिवार्य होगा। बिना प्रवेश पत्र किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा।
पहली बार लागू होंगे सख्त डिजिटल नियम
इस बार परीक्षा में डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया है। यह पहली बार है जब बोर्ड इतनी बड़ी भर्ती परीक्षा में डिजिटल सत्यापन को सख्ती से लागू कर रहा है।
अभ्यर्थियों की पहचान के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा
सभी परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए जाएंगे
प्रश्न पत्रों की गोपनीयता के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था रहेगी
राज्यभर में बनाए गए परीक्षा केंद्र
परीक्षा का आयोजन राज्य भर में किया जाएगा, जिसके लिए बड़ी संख्या में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। बोर्ड का दावा है कि परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए हर स्तर पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के लिए यह शिक्षक भर्ती परीक्षा न केवल लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी है, बल्कि बोर्ड की विश्वसनीयता और प्रशासनिक क्षमता की भी बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।

