सोमनाथ मंदिर - विनाश नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण की गाथा
सोमनाथ मंदिर भारत के गुजरात राज्य में वेरावल (प्रभास पाटन) के समुद्र तट पर स्थित एक प्राचीन और पवित्र शिव मंदिर है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम (सबसे पहला) ज्योतिर्लिंग माना जाता है।
सोमनाथ मंदिर भारत के गुजरात राज्य में वेरावल (प्रभास पाटन) के समुद्र तट पर स्थित एक प्राचीन और पवित्र शिव मंदिर है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम (सबसे पहला) ज्योतिर्लिंग माना जाता है। इसका नाम "सोमनाथ" अर्थात "सोम (चंद्रमा) का स्वामी" है, और यह हिंदू धर्म की आस्था, संघर्ष एवं पुनरुत्थान का जीवंत प्रतीक है।
पौराणिक कथा और उत्पत्तिपुराणों (शिव पुराण, स्कंद पुराण, श्रीमद्भागवत) के अनुसार, चंद्रदेव (सोम) ने दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से विवाह किया, लेकिन रोहिणी को अधिक प्रेम देने पर अन्य बहनों ने शिकायत की। दक्ष ने चंद्र को शाप दिया कि वह क्षय (घटते) होंगे। चंद्र ने भगवान शिव की घोर तपस्या की (मृत्युंजय मंत्र का 10 करोड़ जाप)। शिव प्रसन्न हुए और चंद्र को वरदान दिया कि यहां ज्योतिर्लिंग स्थापित होगा, जो चंद्र दोष निवारण करेगा। इसी से स्थान "प्रभास" (प्रकाश का स्थान) कहलाया।यहां तीन नदियों (हिरण, कपिला, सरस्वती) का संगम है, और भगवान श्रीकृष्ण ने भी यहीं देहत्याग किया था। ऋग्वेद और महाभारत में भी इसका उल्लेख है।
ऐतिहासिक महत्व और बार-बार विनाश-पुनर्निर्माणसोमनाथ मंदिर को कम से कम 6-7 बार पूरी तरह नष्ट किया गया, लेकिन हर बार हिंदू राजाओं और भक्तों ने इसे पुनः बनवाया। यह भारतीय इतिहास में आक्रमणों के बावजूद आस्था की अटूटता का प्रतीक है।
यहां प्रमुख घटनाओं की समयरेखा:
प्राचीन काल (ईसा पूर्व): स्थल पर सिंधु घाटी सभ्यता (2000-1200 ईसा पूर्व) के अवशेष मिले।
7वीं-9वीं शताब्दी: मैत्रक राजाओं ने पुनर्निर्माण किया।
815 ईस्वी: प्रतिहार राजा नागभट्ट ने तीसरी बार बनवाया।
1026 ईस्वी: महमूद गजनवी ने सबसे प्रसिद्ध आक्रमण किया। मंदिर लूटा, शिवलिंग खंडित किया, लाखों धन लूटा और हजारों भक्त मारे गए। (यह 1000 वर्ष पूरे होने पर 2026 में विशेष स्मृति में मनाया जा रहा है।)
11वीं-12वीं शताब्दी: गुजरात के राजा भीमदेव और मालवा के राजा भोज ने पुनर्निर्माण किया। कुमारपाल (1169 ईस्वी) ने पत्थर से भव्य मंदिर बनवाया।
1299 ईस्वी: अलाउद्दीन खिलजी की सेना (उलुग खान) ने लूटा और नष्ट किया।
1395 ईस्वी: जफर खान (गुजरात सल्तनत) ने तीसरी बार ध्वस्त किया।
1706 ईस्वी: औरंगजेब ने आदेश दिया, मंदिर को मस्जिद बनाने की कोशिश की।
18वीं शताब्दी: अहिल्याबाई होल्कर ने छोटा मंदिर बनवाया, जहां पूजा जारी रही।
स्वतंत्र भारत में पुनर्निर्माण
स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में जूनागढ़ दौरे पर मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। उन्होंने इसे "राष्ट्रीय गौरव" का प्रतीक बताया।1950: आधारशिला रखी गई।
11 मई 1951: राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ज्योतिर्लिंग स्थापित किया (जवाहरलाल नेहरू की आपत्ति के बावजूद)।
1962: वर्तमान मंदिर (मारू-गुर्जर शैली में) पूरा हुआ।
वर्तमान स्थिति
आज सोमनाथ मंदिर श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा संचालित है ...यह लाखों श्रद्धालुओं का केंद्र है, जहां साउंड एंड लाइट शो, आरती और दर्शन होते हैं। मंदिर का शिखर 155 फीट ऊंचा है, और यह भारत की सभ्यता की निरंतरता का प्रतीक है।
निष्कर्ष: सोमनाथ का इतिहास विनाश नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण की गाथा है। यह बताता है कि आस्था और संस्कृति कितनी भी चुनौतियों का सामना करें, अंततः जीतती है।

