बजरी माफिया से मिलीभगत पर सख्त कार्रवाई, ASI समेत 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड, ऑडियो-वीडियो वायरल

बनास नदी से अवैध बजरी खनन और बजरी माफिया के साथ पुलिस की मिलीभगत एक बार फिर उजागर हुई है। मामले में टोंक पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीणा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अलीगढ़ और सोप थाना क्षेत्र के 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

बजरी माफिया से मिलीभगत पर सख्त कार्रवाई, ASI समेत 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड, ऑडियो-वीडियो वायरल

 टोंक। टोंक जिले में बनास नदी से अवैध बजरी खनन और बजरी माफिया के साथ पुलिस की मिलीभगत एक बार फिर उजागर हुई है। मामले में टोंक पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीणा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अलीगढ़ और सोप थाना क्षेत्र के 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इन पुलिसकर्मियों पर बजरी माफिया से सांठगांठ के आरोप हैं, जिनसे जुड़े ऑडियो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।

गौरतलब है कि हाल ही में राजस्थान पुलिस के डीजीपी ने अवैध बजरी खनन को लेकर कई जिलों में डिकॉय ऑपरेशन करवाए थे। इन ऑपरेशनों में टोंक जिले के पिपलू और बरौनी थानों के थाना प्रभारियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर उन्हें भी सस्पेंड किया गया था। इसी कड़ी में अब टोंक जिले में एक और कार्रवाई सामने आई है।

अवैध बजरी खनन में मिलीभगत, पांच पुलिसकर्मी निलंबित

एसपी राजेश कुमार मीणा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में एक एएसआई, एक हेड कांस्टेबल, एक चालक कांस्टेबल और दो कांस्टेबल शामिल हैं।

सोप थाना (उनियारा सर्किल) से एएसआई प्रहलाद नारायण और कांस्टेबल साबुलाल, जबकि अलीगढ़ थाना से हेड कांस्टेबल सत्यप्रकाश, चालक कांस्टेबल ओमप्रकाश यादव और कांस्टेबल राजेंद्र को सस्पेंड किया गया है। सभी को पुलिस लाइन भेजते हुए विभागीय जांच प्रस्तावित की गई है।

वायरल ऑडियो-वीडियो बने कार्रवाई की वजह

बताया जा रहा है कि अलीगढ़ थाने के हेड कांस्टेबल सत्यप्रकाश की बजरी माफिया से बातचीत की दो कॉल रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। इन्हीं रिकॉर्डिंग के आधार पर एसपी ने जांच के आदेश दिए और प्राथमिक तौर पर दोष सामने आने पर निलंबन की कार्रवाई की गई।

वहीं चालक कांस्टेबल ओमप्रकाश यादव पहले भी बजरी मामलों में दो बार सस्पेंड हो चुके हैं। यह तीसरी बार है जब उन्हें बजरी माफिया से मिलीभगत के आरोप में निलंबित किया गया है।

पुलिस विभाग की इस कार्रवाई को अवैध बजरी खनन के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि जिले में लंबे समय से चल रहे बजरी माफिया के नेटवर्क पर यह कार्रवाई कितनी प्रभावी साबित होगी, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।