अयोध्या राम मंदिर पर भगवा ध्वज फहरा, पीएम मोदी और मोहन भागवत ने किया ध्वजारोहण, दशकों के संघर्ष का स्वर्णिम क्षण

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों से अंकित हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को मंदिर के शिखर पर इलेक्ट्रिक सिस्टम से भगवा ध्वज फहराकर, दशकों लंबे संघर्ष और समर्पण से निर्मित इस भव्य धाम के निर्माण की औपचारिक पूर्णता की घोषणा कर दी।

अयोध्या राम मंदिर पर भगवा ध्वज फहरा, पीएम मोदी और मोहन भागवत ने किया ध्वजारोहण, दशकों के संघर्ष का स्वर्णिम क्षण

अयोध्या। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों से अंकित हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को मंदिर के शिखर पर इलेक्ट्रिक सिस्टम से भगवा ध्वज फहराकर, दशकों लंबे संघर्ष और समर्पण से निर्मित इस भव्य धाम के निर्माण की औपचारिक पूर्णता की घोषणा कर दी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, संत-महात्मा और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह ध्वजारोहण समारोह विवाह पंचमी के पावन अवसर पर संपन्न हुआ। रामनगरी 'जय श्री राम' के उद्घोषों से गूंज उठी, जबकि वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिजीत मुहूर्त (11:52 से 12:35 बजे) में यह ऐतिहासिक क्षण पूर्ण हुआ।

यह ध्वजारोहण न केवल मंदिर निर्माण का समापन बिंदु है, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए सांस्कृतिक पुनरुत्थान और रामराज्य के आदर्शों की विजय का प्रतीक भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने ध्वज फहराने के बाद हाथ जोड़कर भगवान राम को नमन किया, जो दशकों के बलिदान को सलाम करने वाला भावपूर्ण पल था। कार्यक्रम में करीब 7,000 अतिथियों ने शिरकत की, जिनमें मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग, पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधि शामिल थे, जो इस आयोजन की समावेशी भावना को दर्शाता है।

भगवा ध्वज: तेज, पराक्रम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक

मंदिर के शिखर पर फहराया गया 10 फीट ऊंचा और 20 फीट लंबा समकोण त्रिभुजाकार भगवा ध्वज भगवान राम के तेज और पराक्रम का जीवंत प्रतीक है। ध्वज पर विकिरणकारी सूर्य का चिह्न अंकित है, जो राम के तेज को दर्शाता है। इसके अलावा 'ओम' अकार और कोविदार वृक्ष (जिसे रामायण में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है) के चिह्न भी उत्कीर्ण हैं, जो ध्वज को गहन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व प्रदान करते हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि यह ध्वज अग्नि के रंग (भगवा) और उदयाचल सूर्य का प्रतीक है, जो धर्म, निष्ठा, सत्य, न्याय और 'राष्ट्र धर्म' की भावना को प्रतिबिंबित करता है।

ध्वजारोहण से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने राम दर्शन गर्भगृह, राम लला गर्भगृह में पूजन-अर्चना की। उन्होंने सप्त मंदिर (महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, वाल्मीकि, देवी अहल्या, निषादराज गुहा और माता शबरी को समर्पित), शेषावतार मंदिर तथा माता अन्नपूर्णा मंदिर का भी दर्शन किया। मंदिर परिसर की बाहरी दीवारों पर वाल्मीकि रामायण के 87 नक्काशीदार पत्थर के एपिसोड और घेराबंदी की दीवारों पर 79 कांस्य प्रतिमाएं भारतीय संस्कृति की जीवंत कहानी बुनती हैं।

सीएम योगी: "नए युग की शुरुआत, 140 करोड़ भारतीयों का आत्मगौरव"

ध्वजारोहण के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी और मोहन भागवत को भगवा ध्वज तथा राम लला की मूर्ति का लघु मॉडल भेंट किया। संबोधन में उन्होंने कहा, "श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह एक नए युग की शुरुआत है। विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करता हूं। सभी राम भक्तों की ओर से सरसंघचालक मोहन भागवत का भी हार्दिक अभिनंदन।"

योगी ने आगे जोर दिया, "यह भव्य मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक है। इसके लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले सभी कर्मयोगियों का अभिनंदन। यह ध्वज प्रमाणित करता है कि धर्म का प्रकाश अमर है और रामराज्य के सिद्धांत कालजयी हैं। 2014 में जब पीएम मोदी प्रधानमंत्री बने, तो करोड़ों भारतीयों के हृदय में जगी आस्था आज इस भव्य राम मंदिर के रूप में प्रकट हो रही है।" उन्होंने मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले कारीगरों, दानदाताओं और श्रमिकों को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की।

मोहन भागवत: "बलिदानियों की आत्मा को आज शांति मिली"

आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने भावुक स्वर में कहा, "आज हमारे लिए सकारात्मकता का दिन है। राम मंदिर के लिए कितने ही लोगों ने बलिदान दिया, उनकी आत्मा को आज शांति मिली होगी। अशोक सिंहल जी को शांति मिली होगी। अनेक संतों, छात्रों और सभी क्षेत्रों के लोगों ने अपना जीवन न्यौछावर किया, यहां तक कि वे लोग जो इसमें भाग नहीं ले सके लेकिन हमेशा सपना देखते रहे, आज अपना लक्ष्य प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर बनकर तैयार हो गया है, ध्वजारोहण हो गया। रामराज्य का ध्वज, जिसने कभी पूरी दुनिया को राहत दी, अब मंदिर के ऊपर लहरा रहा है। हम सभी ने इसे देखा।"

भागवत ने 500 वर्षों के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदू समाज ने अपनी सत्य को स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि यह ध्वज सदियों पुराने घावों को भरने और सांस्कृतिक पुनरावृत्ति का प्रतीक है।

पीएम मोदी का संदेश: "सदियों पुराने घाव भर रहे, अयोध्या बनेगी प्रेरणा का शहर"

प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधन में कहा, "सदियों पुराने घाव आज भर रहे हैं। यह ध्वजारोहण उस यज्ञ की पूर्णाहुति है जिसकी अग्नि 500 वर्षों तक प्रज्ज्वलित रही। अयोध्या का सौंदर्यीकरण कार्य जारी है। भविष्य की यह नगरी परंपरा और आधुनिकता का संगम बनेगी, जहां सरयू नदी के साथ विकास की धारा बहेगी। 21वीं सदी की अयोध्या शहरी विकास का मॉडल बनेगी, जो अपनी पवित्र विरासत को संरक्षित रखेगी। यह शहर दुनिया के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा, जहां नैतिक मूल्य और आधुनिक विकास का मेल होगा।"

मोदी ने मंदिर को भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह ध्वज गरिमा, एकता और सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाता है, जो राम राज्य के आदर्शों को जीवंत करता है।

ऐतिहासिक संदर्भ: विवाह पंचमी पर ध्वजारोहण का महत्व

यह आयोजन विवाह पंचमी पर हुआ, जो भगवान राम और माता सीता के विवाह का उत्सव है। कार्यक्रम से पहले मोरारी बापू, चिन्मयानंद, धीरेंद्र शास्त्री और देवकीनंदन ठाकुर जैसे संतों ने भाग लिया। सीएम योगी ने सोमवार को व्यवस्थाओं का जायजा लिया था, जबकि मोहन भागवत ने तैयारियों का निरीक्षण किया। दर्शन जनता के लिए मंगलवार शाम या बुधवार सुबह से शुरू होने की संभावना है।

यह ध्वजारोहण राम मंदिर आंदोलन की परिणति है, जो 1992 के कारसेवा से 2024 के प्राण प्रतिष्ठा तक के सफर को पूर्ण करता है। अयोध्या अब पर्यटन, आध्यात्मिकता और विकास का वैश्विक केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।