सूर्य उपासना का महापर्व छठ, जानिए क्यों मनाया जाता है, कब से शुरू होगा और किन राज्यों में है सबसे खास
सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पूर्वी भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि इसमें पर्यावरण, प्रकृति और परिश्रम की पूजा भी समाहित है।
सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पूर्वी भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि इसमें पर्यावरण, प्रकृति और परिश्रम की पूजा भी समाहित है। इस साल छठ पूजा 26 अक्टूबर 2025 रविवार से शुरू होकर 29 अक्टूबर 2025 बुधवार तक मनाई जाएगी।
क्यों मनाया जाता है छठ पर्व
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। मान्यता है कि सूर्य भगवान जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य के स्रोत हैं, और उनकी उपासना से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता सीता ने रामराज्य की स्थापना के बाद सूर्य की पूजा की थी, वहीं दूसरी कथा के अनुसार, कर्ण (महाभारत के योद्धा) सूर्य भक्त थे और रोज़ सूर्य को अर्घ्य देते थे। इसीलिए यह पर्व सूर्य की आराधना और कृतज्ञता का प्रतीक है।
छठ पर्व का धार्मिक महत्व
छठ पूजा में महिलाएं निराहार रहकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करती हैं। इस पर्व में स्वच्छता, सात्त्विकता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जाता है। कहा जाता है कि यह व्रत केवल शरीर की नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का प्रतीक है।
छठ पर्व 2025 की तिथियां
|
पर्व |
तिथि |
दिन |
|
नहाय-खाय |
26 अक्टूबर 2025 |
रविवार |
|
खरना (लोहंडा) |
27 अक्टूबर 2025 |
सोमवार |
|
संध्या अर्घ्य (पहला अर्घ्य) |
28 अक्टूबर 2025 |
मंगलवार |
|
उषा अर्घ्य (दूसरा अर्घ्य) |
29 अक्टूबर 2025 |
बुधवार |
किन प्रदेशों में मनाया जाता है छठ पर्व
छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे बड़े पैमाने पर मनाई जाती है। इसके अलावा दिल्ली, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और नेपाल के तराई इलाकों में भी लाखों लोग श्रद्धा के साथ इस पर्व को मनाते हैं। दिल्ली, मुंबई, और सूरत जैसे महानगरों में भी बिहारी प्रवासियों द्वारा यमुना घाट, समुद्र तटों और तालाबों पर सामूहिक पूजा आयोजित की जाती है।
छठ पूजा की विशेषताएं
छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसमें व्रती शुद्ध भोजन ग्रहण करती हैं। खरना के दिन गुड़-चावल की खीर और रोटी बनाकर प्रसाद चढ़ाया जाता है। तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। पूजा में ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना और केले का विशेष महत्व होता है।
छठ पूजा 2025 की खास बात
इस बार छठ पूजा 2025 का संयोग अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर पड़ेगा, जो अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दौरान सूर्य की किरणें वातावरण को अधिक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन बढ़ता है।

