जैसलमेर बस अग्निकांड: जिंदा जले 22 लोगों की पहचान के लिए DNA सैंपलिंग शुरू

भीषण बस अग्निकांड में जान गंवाने वाले 22 लोगों की पहचान एक चुनौती बन गई है। जलकर राख हो चुके शवों की शिनाख्त संभव न होने के कारण अब DNA सैंपलिंग के जरिए पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जैसलमेर बस अग्निकांड: जिंदा जले 22 लोगों की पहचान के लिए DNA सैंपलिंग शुरू

दिवाली की तैयारियों में जुटे परिवारों के घर में मातम छा गया। जब जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक नई AC स्लीपर बस अचानक आग की लपटों में घिर गई। त्योहार से पहले उम्मीदों और रौनक से भरे घरों में चीख-पुकार गूंजने लगी। इस दर्दनाक हादसे में 22 लोगों की जान चली गई, जबकि कई जख्मी अब भी अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। जिन घरों में दीयों की रोशनी होनी थी वहां अब सिर्फ रोने की आवाजें गूंज रही है।

भीषण बस अग्निकांड में जान गंवाने वाले 22 लोगों की पहचान एक चुनौती बन गई है। जलकर राख हो चुके शवों की शिनाख्त संभव न होने के कारण अब DNA सैंपलिंग के जरिए पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

 एक झटके में बुझ गए 22 घरों के चिराग

इस दर्दनाक हादसे में मृतकों की स्थिति इतनी भयावह थी कि कई शवों की केवल हड्डियां ही बची हैं, जो एक पोटली में रखकर जोधपुर के MGH अस्पताल भेजी गईं। परिजन अपनी आंखों के सामने अपनों को इस हाल में देखकर बेसुध हैं।

 DNA सैंपलिंग

शवों की पहचान के लिए परिजनों के DNA सैंपल लेकर मिलान प्रक्रिया शुरू हो गई है। जोधपुर फॉरेंसिक लैब में यह परीक्षण किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि पहचान सुनिश्चित होने के बाद ही अंतिम संस्कार कराया जाएगा, ताकि परिजनों को न्याय और closure मिल सके।

प्रशासन ने राहत कार्यों के लिए टीम गठित कर दी है और मृतकों के परिजनों को सहायता राशि देने की घोषणा भी की गई है। हालांकि, इस हादसे ने बसों की फिटनेस, ओवरलोडिंग और ट्रैफिक नियमों के पालन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

शोक में डूबा राजस्थान

यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, 20 परिवारों के सपनों का अंत है। जोधपुर के अस्पताल परिसर में पसरा मातम और DNA रिपोर्ट की प्रतीक्षा करते परिजन इस त्रासदी की गहराई को बयां करते हैं।