जयपुर के दुर्लभजी हॉस्पिटल में शव को लेकर हंगामा, बिल नहीं चुकाने पर रोका शव

राजधानी जयपुर के प्रतिष्ठित दुर्लभजी हॉस्पिटल में रविवार को एक शव को लेकर जमकर हंगामा हो गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बिल का भुगतान नहीं होने के कारण मृतक का शव देने से इनकार कर दिया। सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंची और हालात को शांत कराया।

जयपुर के दुर्लभजी हॉस्पिटल में शव को लेकर हंगामा, बिल नहीं चुकाने पर रोका शव

राजधानी जयपुर के प्रतिष्ठित दुर्लभजी हॉस्पिटल में रविवार को एक शव को लेकर जमकर हंगामा हो गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बिल का भुगतान नहीं होने के कारण मृतक का शव देने से इनकार कर दिया। सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंची और हालात को शांत कराया।

परिजनों का आरोप– बिल बाकी बताकर शव रोका

जानकारी के अनुसार, मृतक का इलाज पिछले कई दिनों से दुर्लभजी हॉस्पिटल में चल रहा था। इलाज के दौरान परिजनों पर लाखों रुपये का बिल चढ़ गया। जब मरीज की मौत हो गई तो परिवार का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने शव देने से पहले पूरा बिल क्लियर करने को कहा, जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि “हॉस्पिटल ने इंसानियत को भी पैसे के तराजू में तौल दिया।”

किरोड़ी लाल मीणा का बयान – “सरकार की कमजोर मॉनिटरिंग”

मामला बढ़ने पर राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने अस्पताल प्रशासन पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “राजस्थान में निजी अस्पतालों की मनमानी चरम पर है। सरकार की कमजोर मॉनिटरिंग और ढीला स्वास्थ्य प्रशासन ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे रहा है।” उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत इस मामले की जांच कर मृतक के परिवार को न्याय दिलाए।

अस्पताल प्रशासन का पक्ष

वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि “शव को रोकने का कोई इरादा नहीं था, बल्कि बिल के भुगतान की प्रक्रिया में देरी के कारण असमंजस की स्थिति बनी।” बाद में पुलिस और सामाजिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में शव परिजनों को सौंप दिया गया।

जांच के निर्देश

पुलिस ने पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर ली है। स्वास्थ्य विभाग को घटना की जानकारी दे दी गई है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने निजी अस्पतालों में मरीजों से वसूली के तरीकों पर पहले भी कई बार सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति अभी भी चिंताजनक है।