बीजेपी को पता चल गई अंता की हवा? मोरपाल को छोड़ा अकेला, नरेश मीणा की लहर में सब बह जाएंगे क्या?
राजस्थान की अंता विधानसभा उपचुनाव अब सियासी रणभूमि बन चुका है। यहां राजनीति का तापमान 45 डिग्री को पार कर गया है और वोटों की हवा में बस एक ही सवाल गूंज रहा है, “कौन बनेगा जनता का असली हीरो?”
राजस्थान की अंता विधानसभा उपचुनाव अब सियासी रणभूमि बन चुका है। यहां राजनीति का तापमान 45 डिग्री को पार कर गया है और वोटों की हवा में बस एक ही सवाल गूंज रहा है, “कौन बनेगा जनता का असली हीरो?”
मैदान में इस बार मुकाबला तीन प्रमुख चेहरों के बीच है —
- निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा,
- कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन ‘भाया’, और
- भाजपा के मोरपाल सुमन।
नरेश मीणा की लहर ने बदला समीकरण
अंता में फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा निर्दलीय नरेश मीणा की है, जिनकी लोकप्रियता युवाओं और स्थानीय मतदाताओं के बीच तेजी से बढ़ रही है। रैलियों में उमड़ती भीड़ और जनसमर्थन ने बड़े दलों को चिंतित कर दिया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल ने भी सोशल मीडिया पर नरेश मीणा को समर्थन देने का ऐलान किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह समर्थन मीणा वोट बैंक को और मजबूत कर सकता है।
कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया को दिग्गजों का सहारा
कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन ‘भाया’ को पार्टी के शीर्ष नेताओं का मजबूत समर्थन मिला है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने टिकट मिलने के बाद भाया को बधाई दी, जबकि सांसद प्रह्लाद गुंजल (टोंक-सवाई माधोपुर) अंता क्षेत्र में रैलियों के जरिए प्रचार को धार दे रहे हैं।
हालांकि, राजनीतिक पंडितों का मानना है कि नरेश मीणा की एंट्री से कांग्रेस का वोट बैंक बंट सकता है, जिससे मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है।
बीजेपी प्रत्याशी मोरपाल सुमन अकेले मैदान में
उधर, भाजपा के मोरपाल सुमन की स्थिति कुछ कमजोर दिखाई दे रही है।
बारां पंचायत समिति के प्रधान और माली समाज से आने वाले सुमन स्थानीय स्तर पर तो सक्रिय हैं, लेकिन पार्टी के बड़े नेताओं का समर्थन उन्हें नहीं मिल पाया है। हालांकि सुमन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी माने जाते हैं, मगर अब तक न तो राजे जी ने प्रचार में एंट्री ली है और न ही किसी बड़े स्टार कैंपेनर की रैली हुई है। सुमन इस वक्त घर-घर जाकर व्यक्तिगत प्रचार कर रहे हैं, लेकिन पार्टी की संगठनात्मक ऊर्जा फिलहाल मैदान में नजर नहीं आ रही।
तीन तरफा मुकाबले में रोमांच चरम पर
अंता सीट पर 15 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन असली जंग नरेश मीणा, प्रमोद जैन भाया और मोरपाल सुमन के बीच सिमट गई है। अब देखने वाली बात यह होगी कि 14 नवंबर को जनता किस पर भरोसा जताती है — क्या नरेश मीणा की लहर सभी को बहा ले जाएगी, या दिग्गज नेताओं के सहारे ‘भाया’ बाजी पलट देंगे, या फिर मोरपाल सुमन अकेले चमत्कार कर दिखाएंगे।

