राजस्थान पंचायती राज प्रतिनिधिमंडल असम-मिजोरम दौरे पर, नवाचारों का अध्ययन कर लागू करेंगे मॉडल
राजस्थान की पंचायती राज व्यवस्था को और सशक्त, नवाचारी एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल असम और मिजोरम के चार दिवसीय अध्ययन दौरे पर रवाना हुआ।
जयपुर। राजस्थान की पंचायती राज व्यवस्था को और सशक्त, नवाचारी एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल असम और मिजोरम के चार दिवसीय अध्ययन दौरे पर रवाना हुआ। यह दौरा 16 से 19 नवंबर 2025 तक चलेगा। शिक्षा एवं संस्कृत मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि यह पहल पंचायती राज संस्थाओं में उत्कृष्ट प्रथाओं एवं नवाचारों को समझने और राजस्थान में लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
दौरे का मुख्य उद्देश्य
प्रतिनिधिमंडल असम और मिजोरम की पंचायती राज व्यवस्था की कार्यप्रणाली, संरचना एवं नवाचारी मॉडल का गहन अध्ययन करेगा। विशेष रूप से निम्न बिंदुओं पर फोकस रहेगा:
- वहां की पंचायती राज इकाइयों की संरचना और कार्यपद्धति
- राजस्थान बनाम असम-मिजोरम में अंतर एवं सुधार की संभावनाएं
- ग्राम पंचायत स्तर पर निर्णय प्रक्रिया और जन-भागीदारी मॉडल
- डिजिटल गवर्नेंस, ई-पंचायत और पारदर्शिता के नवीन उपाय
- वित्तीय स्वायत्तता, संसाधन प्रबंधन और विकास योजनाओं का क्रियान्वयन
- स्थानीय स्तर पर महिला सशक्तिकरण, युवा भागीदारी एवं सामुदायिक विकास मॉडल
मंत्री दिलावर ने कहा, “असम और मिजोरम में पंचायती राज के क्षेत्र में कई उत्कृष्ट कार्य हो रहे हैं। इन राज्यों के मॉडल को समझकर हम राजस्थान में अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नवाचार-प्रधान पंचायती राज व्यवस्था विकसित करेंगे।”
प्रतिनिधिमंडल में कौन शामिल?
यह 21 सदस्यीय दल विविध स्तर के जनप्रतिनिधियों से मिलकर बना है:
- जिला प्रमुख, कोटा – मुकेश मेघवाल (नेतृत्वकर्ता)
- विभिन्न जिलों के सरपंच
- पंच एवं उप-सरपंच
- पंचायती राज से जुड़े अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधि
ये सदस्य ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर की चुनौतियों को समझते हैं और स्थानीय स्तर पर सुधार लागू करने में सक्षम हैं।
असम-मिजोरम मॉडल की खासियतें जिन्हें सीखा जाएगा
- असम: ‘पंचायत राज एक्ट’ के तहत मजबूत ग्राम सभा, डिजिटल पंचायत पोर्टल, महिला सरपंचों की सक्रिय भागीदारी, और स्वच्छता एवं जल प्रबंधन में उत्कृष्टता।
- मिजोरम: छहवीं अनुसूची के तहत स्वायत्त जिला परिषदें, परंपरा और आधुनिकता का संतुलन, वन-आधारित आजीविका मॉडल, और ई-पंचायत ऐप का प्रभावी उपयोग।
राजस्थान में अपेक्षित सुधार
अध्ययन के बाद प्रतिनिधिमंडल एक विस्तृत कार्ययोजना रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें शामिल होंगे:
- ई-पंचायत पोर्टल का विस्तार
- ग्राम सभा की सक्रियता बढ़ाने के उपाय
- सरपंचों को प्रशिक्षण एवं डिजिटल सशक्तिकरण
- वित्तीय विकेंद्रीकरण और स्थानीय संसाधन उपयोग
- महिला एवं युवा नेतृत्व को प्रोत्साहन
मंत्री ने कहा कि यह दौरा केवल अध्ययन नहीं, बल्कि राजस्थान की पंचायतों को विश्वस्तरीय बनाने की शुरुआत है।

