राजस्थान में बम धमकी ईमेलों का सिलसिला: कौन है इसके पीछे?
राजस्थान में बम धमकी वाले ईमेलों का सिलसिला वाकई चिंताजनक रूप से जारी है। आपके वर्णन के अनुसार, जयपुर हाईकोर्ट को पिछले 40 दिनों में चार बार निशाना बनाया गया है।
राजस्थान में बम धमकी वाले ईमेलों का सिलसिला वाकई चिंताजनक रूप से जारी है। आपके वर्णन के अनुसार, जयपुर हाईकोर्ट को पिछले 40 दिनों में चार बार निशाना बनाया गया है, जिसमें मंगलवार (9 दिसंबर 2025) सुबह 9:43 बजे रजिस्ट्रार सीपीसी को मिला ईमेल भी शामिल है। इसकी वजह से हाईकोर्ट की बिल्डिंग खाली करानी पड़ी, बम डिस्पोजल स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहुंचे, ढाई घंटे की सघन तलाशी चली, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं मिला। दोपहर 12:30 बजे बिल्डिंग को सुरक्षित घोषित किया गया, लेकिन सुनवाईयां स्थगित होने से अदालती कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक दफ्तरों, बल्कि कोटा के कलेक्ट्रेट और प्रसिद्ध कोचिंग सेंटर्स को भी बार-बार बाधित कर रही है, जिससे पुलिस, वकील, अधिकारी और आम लोग डर व अनिश्चितता के साये में जीने को मजबूर हैं
ये धमकियां मुख्य रूप से आधिकारिक ईमेल पतों पर भेजी जा रही हैं, और हर बार वही पैटर्न: तत्काल एक्सक्यूजेशन, सघन जांच, लेकिन कोई वास्तविक खतरा नहीं। कोटा कलेक्ट्रेट में 500 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी काम करते हैं, और वहां ग्रामीण एसपी, एडीएम, तहसीलदार जैसे महत्वपूर्ण दफ्तर हैं। कोचिंग सेंटर्स जैसे शिखर कोचिंग पर निशाना छात्रों की सुरक्षा को और चुनौती दे रहा है।
कौन है इसके पीछे? जांच की स्थिति
आपका सवाल बिल्कुल जायज है—यह सिलसिला पूरे सिस्टम को ललकार रहा है, और हर धमकी के बाद वही नतीजा (होक्स) आने से सवाल उठता है कि क्या यह कोई संगठित प्रयास है या व्यक्तिगत शरारत? पुलिस और साइबर एजेंसियां जांच में जुटी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस गिरफ्तारी या पहचान नहीं हुई है। मुख्य बिंदु:
ट्रेसिंग की चुनौती: डीसीपी साउथ राजश्री राज वर्मा के अनुसार, भेजने वाले VPN का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे IP एड्रेस ट्रेस नहीं हो पा रहा। साइबर सेल सभी संसाधन लगा रही है, लेकिन प्रगति धीमी है। एक ईमेल में भेजने वाले ने खुद को केरल से बताया और जिम्मेदारी ली, लेकिन यह भी फर्जी लग रहा है।
पिछले पैटर्न: पिछले सात महीनों से ऐसी धमकियां आ रही हैं, जो ज्यादातर होक्स साबित हुईं। कुछ मामलों में ईमेल ID और पासवर्ड एक ही पाए गए, जो 2008 के ब्लास्ट्स जैसी तकनीक से जुड़े हो सकते हैं। अन्य राज्यों (जैसे बेंगलुरु, दिल्ली) में भी इसी तरह की धमकियां आईं, जहां आरोपी सॉफ्टवेयर इंजीनियर या मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति निकले, जो VPN और वर्चुअल नंबर्स का इस्तेमाल कर रहे थे। राजस्थान में भी साइबर क्राइम पुलिस इसी दिशा में जांच कर रही है।
संदिग्ध मकसद: ईमेलों में कभी "बीजेपी शासित राज्यों की अदालतों में धमाके" का जिक्र, तो कभी RDX बम का दावा। वकीलों का मानना है कि यह सिस्टम को डराने-धमकाने का तरीका है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव रामित पारेख ने कहा कि महीने में तीसरी बार ऐसा होना शर्मनाक है; SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) बनाना जरूरी है ताकि छोटी शरारत पर पूरा सिस्टम न रुक जाए। पूर्व अध्यक्ष प्रह्लाद शर्मा ने इसे "सुरक्षा का मजाक" बताया।
प्रभाव और आगे की राह
प्रभाव: हर घटना से घंटों काम रुक जाता है—अदालतों में केस लंबित, कलेक्ट्रेट में फाइलें अटकीं, कोचिंग सेंटर्स में छात्र डरे हुए। आर्मी तक तैनात हो रही है, जो संसाधनों की बर्बादी दर्शाता है।
सुझाव: पुलिस ने अपील की है कि लोग शांत रहें, लेकिन साइबर सिक्योरिटी मजबूत करने की जरूरत है। केंद्र और राज्य स्तर पर कोऑर्डिनेशन बढ़े, VPN ट्रैकिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग हो। अगर यह व्यक्तिगत रिवेंज या मानसिक समस्या से जुड़ा है (जैसे अन्य मामलों में), तो जल्दी पहचान संभव है।

