किसानों का कलेक्ट्रेट घेराव, अनुदान-बीमा व बिजली कटौती के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

राजस्थान के बाड़मेर जिले में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। विभिन्न मांगों को लेकर सैकड़ों किसानों ने 200 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ गुड़ामालानी से बाड़मेर जिला कलेक्ट्रेट की ओर कूच किया।

किसानों का कलेक्ट्रेट घेराव, अनुदान-बीमा व बिजली कटौती के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

बाड़मेर। राजस्थान के बाड़मेर जिले में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। विभिन्न मांगों को लेकर सैकड़ों किसानों ने 200 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ गुड़ामालानी से बाड़मेर जिला कलेक्ट्रेट की ओर कूच किया। रास्ते में पुलिस प्रशासन ने दो बार उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन किसान नहीं माने और आगे बढ़ते चले गए। कलेक्ट्रेट के आसपास भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग की गई है, ताकि प्रदर्शनकारी अंदर न घुस सकें। किसानों ने मांगें पूरी न होने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के नेतृत्व में चले इस ट्रैक्टर मार्च में गुड़ामालानी, पचपदरा और आसपास के क्षेत्रों के हजारों किसान शामिल हुए। आरएलपी नेता ठाकण सिंह डोली ने बताया कि 5 दिसंबर को गुड़ामालानी एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन पर कोई कार्रवाई न होने के बाद यह कदम उठाया गया। उन्होंने कहा, "सरकार की उदासीनता से किसान त्रस्त हैं। अनुदान न मिलना, फसल बीमा का मुआवजा लटकना, लगातार बिजली कटौती और नीलगाय व जंगली सूअरों से फसलों का बर्बाद होना—ये सब असहनीय हो चुका है। 9 दिसंबर तक का अल्टीमेटम समाप्त हो गया, अब हम कलेक्ट्रेट घेरेंगे।"

किसानों की प्रमुख मांगें

किसानों ने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से रखा है, जो मुख्य रूप से बाड़मेर की रेगिस्तानी और कृषि-निर्भर अर्थव्यवस्था से जुड़ी हैं:

अनुदान की तत्काल राशि वितरण: सरकारी योजनाओं के तहत लंबित अनुदान (जैसे पीएम-किसान सम्मान निधि) को बिना देरी जारी किया जाए।

फसल बीमा मुआवजे में तेजी: पिछले मौसम की क्षतिग्रस्त फसलों का बीमा दावा तुरंत निपटाया जाए, जिसमें देरी से किसान कर्ज के जाल में फंस रहे हैं।

बिजली कटौती पर रोक: सिंचाई के लिए जरूरी बिजली आपूर्ति को नियमित किया जाए, खासकर रबी फसल की तैयारी के समय।

जंगली जानवरों से सुरक्षा: नीलगाय, जंगली सूअर और अन्य वन्यजीवों से फसलों की रक्षा के लिए प्रभावी उपाय, जैसे बाड़ लगाना या शिकार की अनुमति।

कृषि बुनियादी ढांचे में सुधार: सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और मिट्टी संरक्षण योजनाओं का शीघ्र कार्यान्वयन।

किसान नेता ताजाराम सियाग ने कहा, "हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अगर मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन पूरे जिले में फैल जाएगा। सरकार को किसानों की पीड़ा समझनी होगी।"

घटना का विवरण

सुबह 8 बजे गुड़ामालानी से शुरू हुई ट्रैक्टर रैली में किसानों ने नारे लगाए और बैनर लहराए। रास्ते में बालोतरा और अन्य स्थानों पर पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोकने की कोशिश की, लेकिन किसान ट्रैक्टरों को साइड से हटाकर आगे बढ़ गए। दोपहर तक कलेक्ट्रेट पहुंचने की उम्मीद है। जिला कलेक्टर सुधीर शर्मा के कार्यालय के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था है, जिसमें आरएएफ और स्थानीय पुलिस शामिल है। प्रशासन ने किसानों से बातचीत की पेशकश की है, लेकिन पहली वार्ता गुड़ामालानी में विफल रहने के बाद किसान भरोसा खो चुके हैं।

यह आंदोलन बाड़मेर की कृषि संकट की गहरी समस्या को उजागर करता है। जिले में अधिकांश किसान वर्षा और सिंचाई पर निर्भर हैं, और जलवायु परिवर्तन व सरकारी लापरवाही से उनकी हालत बदतर हो रही है। आरएलपी सांसद हनुमान बेनिवाल ने ट्वीट कर समर्थन जताया: "किसानों का संघर्ष जायज है। सरकार जागे, वरना थार का हनुमान मैदान में उतरेगा।"

प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखने का आश्वासन दिया है, लेकिन किसान संगठन अगली वार्ता बाड़मेर कलेक्ट्रेट में ही चाहते हैं। यह घटना पूरे राजस्थान में किसान असंतोष की लहर पैदा कर सकती है।