अंता विधानसभा सीट में त्रिकोणीय मुकाबला, बीजेपी ने मोरपाल सुमन पर खेला दांव
बीजेपी ने मोरपाल सुमन को अंता विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतार दिया है। माली समाज से ताल्लुक रखने वाले सुमन वर्तमान में प्रधान हैं। उनकी पत्नी भी राजनीति में रही हैं। वे एक बार सरपंच रह चुकी हैं।
बीजेपी ने मोरपाल सुमन को अंता विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतार दिया है। माली समाज से ताल्लुक रखने वाले सुमन वर्तमान में प्रधान हैं। उनकी पत्नी भी राजनीति में रही हैं। वे एक बार सरपंच रह चुकी हैं, यहां अब सुमन, कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया और निर्दलीय नरेश मीणा में त्रिकोणीय मुकाबला होगा। मोरपाल बाहरी दावेदार पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी पर भारी पड़े, कांग्रेस ने यहां से पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया को चुनाव मैदान में उतार रखा है। वहीं नरेश मीणा बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में डटे हैं।
अंता में बीजेपी इस बार बाहरी ‘बनाम स्थानीय प्रत्याशी’ के चक्रव्यूह में फंस गई थी। इसके चलते प्रत्याशी घोषित करने में काफी देरी हुई। कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया और निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा नामांकन भरकर चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं, जबकि बीजेपी बाहरी और स्थानीय के फेर में लंबे मंथन में जुटी रही। बीजेपी ने अंता विधानसभा सीट के अस्तित्व में आने के बाद पहली बार यहां स्थानीय प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा है। इससे पहले हुए चार चुनावों में बीजेपी ने हमेशा बाहरी प्रत्याशियों को चुनाव लड़वाया था।
अंता विधानसभा क्षेत्र को माली और मीणा बाहुल्य माना जाता है, बीजेपी ने यहां से दो बार बूंदी जिले के हिंडौली इलाके के प्रभुलाल सैनी को चुनाव मैदान में उतारा था। सैनी एक बार जीते और एक बार हारे थे, जीतने के बाद वे मंत्री भी बने थे। उसके बाद बीजेपी ने विधानसभा चुनाव 2023 में झालावाड़ जिले के अकलेरा इलाके के कंवरलाल मीणा को टिकट दिया था। मीणा यहां से जीते थे, लेकिन उसके बाद 20 साल पुराने एक मामले में तीन साल की सजा हो जाने के कारण वे अयोग्य घोषित हो गए। इसके चलते अंता सीट खाली हो गई।
मोरपाली सुमन के अलावा यहां पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी और बारां जिला प्रमुख रहे नंदलाल सुमन का नाम भी प्रबल दावेदारों में शुमार रहा था। लेकिन बाजी मोरपाल सुमन के हाथ लगी, अब यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने संभावना है। प्रमोद जैन भाया दो बार अंता क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। यहां से जीतने के बाद भाया दोनों बार ही मंत्री बने थे। वहीं नरेश मीणा निर्दलीय के तौर पर ताल ठोक रहे हैं, वे बीजेपी और कांग्रेस दोनों को चुनौती दे रहे हैं।

