पुष्कर पशु मेले में करोड़ों के भैंसे और घोड़े चमके, ऊंटों के बाजार में छाई निराशा

विश्व प्रसिद्ध पुष्कर पशु मेला इस बार पशुधन व्यापार के दो बिलकुल विरोधाभासी चेहरे दिखा रहा है। एक ओर जहाँ मुर्रा नस्ल के भैंसे और शानदार घोड़े करोड़ों रुपये में बिक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजस्थान की पहचान कहे जाने वाले ऊंटों का बाजार लगातार ठंडा पड़ता जा रहा है।

पुष्कर पशु मेले में करोड़ों के भैंसे और घोड़े चमके, ऊंटों के बाजार में छाई निराशा

पुष्करविश्व प्रसिद्ध पुष्कर पशु मेला इस बार पशुधन व्यापार के दो बिलकुल विरोधाभासी चेहरे दिखा रहा है। एक ओर जहाँ मुर्रा नस्ल के भैंसे और शानदार घोड़े करोड़ों रुपये में बिक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजस्थान की पहचान कहे जाने वाले ऊंटों का बाजार लगातार ठंडा पड़ता जा रहा है।

करोड़ों की बोली, मगर ऊंट सस्ते

मेले में इस बार बलबीर, बादल, नगीना और शहजादी जैसे पशु आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं — जिनकी कीमत ₹1 करोड़ से ऊपर लग चुकी है। लेकिन इनके मुकाबले ऊंटों की बोली मात्र ₹10,000 से शुरू होकर ₹1 लाख तक ही पहुँच पा रही है।

भले ही इस बार ऊंट परिवहन पर प्रतिबंध हटा दिया गया है, फिर भी बाजार में निराशा साफ झलक रही है। पशुपालक बताते हैं कि खरीदारों की कमी और परिवहन से जुड़ी सख्त शर्तों ने ऊंट व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है।

ऊंटों की घटती संख्या और सख्त नियम

राजस्थान में ऊंटों की संख्या लगातार घट रही है। 2019 की पशुधन जनगणना के अनुसार राज्य में ऊंटों की संख्या लगभग 2 लाख रह गई थी। इसके बाद पिछली वसुंधरा राजे सरकार ने ऊंटों को राजस्थान से बाहर ले जाने पर रोक लगा दी थी। अब भले ही यह प्रतिबंध हट चुका है, लेकिन नियम अभी भी काफी सख्त हैं।

लोक पशुपालक समिति के सचिव हनुवंत सिंह के अनुसार, “खरीदारों को ऊंट को राज्य से बाहर ले जाने के लिए एसडीएम की अनुमति, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और परिवहन का उद्देश्य बताना जरूरी है। यूपी और बिहार से कई खरीदार आए हैं, लेकिन यह प्रक्रिया बहुत जटिल है।”

सरकार की सख्ती, पशुपालकों की चिंता

पशुपालन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऊंट को बाहर ले जाने के लिए अब भी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और ट्रांसपोर्ट परमिट अनिवार्य हैं। अधिकारी यह देखेंगे कि ऊंट किस उद्देश्य से बाहर ले जाया जा रहा है— व्यापार, प्रदर्शनी या कृषि उपयोग के लिए।

इन शर्तों के कारण पशुपालक बाजार में खरीदारों की कमी महसूस कर रहे हैं। इस बार मेले में करीब 5,000 ऊंट बिक्री के लिए आए हैं, लेकिन अधिकांश व्यापारी ऊंटों के कम दाम और कठिन नियमों से परेशान हैं।

ऊंट व्यापार का भविष्य अनिश्चित

रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंट राजस्थान की संस्कृति, पहचान और आजीविका का अहम हिस्सा हैं। लेकिन बदलते आर्थिक हालात और सरकारी नीतियों के चलते उनका व्यापार अब संकट में है। जहाँ एक ओर भैंसे और घोड़े करोड़ों की कीमत पा रहे हैं, वहीं ऊंटों के बाजार में सन्नाटा और पशुपालकों की निराशा यह दिखा रही है कि परंपरागत पशुधन व्यापार अब किस दिशा में जा रहा है।