राजस्थान में ऐतिहासिक फैसला, 23 साल बाद टूटा प्रमोशन का सूखा, तीन संतान वाले 42 कर्मचारियों को मिला हक

राजस्थान सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 23 साल पुरानी रोक को खत्म कर दिया है। अब वे कर्मचारी, जिन्हें तीन संतान होने के कारण पदोन्नति से वंचित रखा गया था, उन्हें भी प्रमोशन का अधिकार मिल गया है।

राजस्थान में ऐतिहासिक फैसला, 23 साल बाद टूटा प्रमोशन का सूखा, तीन संतान वाले 42 कर्मचारियों को मिला हक

जयपुर। राजस्थान सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 23 साल पुरानी रोक को खत्म कर दिया है। अब वे कर्मचारी, जिन्हें तीन संतान होने के कारण पदोन्नति से वंचित रखा गया था, उन्हें भी प्रमोशन का अधिकार मिल गया है। राज्य सरकार ने इस फैसले के तहत 42 आरटीएस अधिकारियों को आरएएस पद पर पदोन्नत किया है। यह कदम न केवल प्रशासनिक दृष्टि से ऐतिहासिक है, बल्कि लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों के लिए राहत भरा भी है।

2002 में लगा था प्रमोशन पर प्रतिबंध

वर्ष 2002 में जनसंख्या नियंत्रण नीति लागू होने के बाद राज्य सरकार ने यह नियम बनाया था कि दो से अधिक संतान वाले कर्मचारियों को पदोन्नति या उच्च पदों पर नियुक्ति नहीं दी जाएगी। इस नीति का उद्देश्य था परिवार नियोजन को बढ़ावा देना और छोटे परिवार की अवधारणा को प्रोत्साहन देना। लेकिन इस नियम की वजह से हजारों अधिकारी और कर्मचारी, जिन्होंने सेवा में बेहतर प्रदर्शन किया, प्रमोशन से वंचित रह गए।

2023 में नियम में हुआ संशोधन

राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में नियमों में संशोधन करते हुए यह रोक हटा दी। संशोधन के अनुसार, अब तीन संतान वाले कर्मचारियों को भी अन्य पात्र कर्मचारियों की तरह पदोन्नति का समान अधिकार दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि पुराने नियमों के कारण कई अधिकारी अनजाने में या व्यक्तिगत परिस्थितियों के चलते प्रमोशन से वंचित रह गए थे। इसलिए यह बदलाव न्याय और समान अवसर की भावना से किया गया है।

 42 आरटीएस अधिकारियों को मिला प्रमोशन

कार्मिक विभाग ने शुक्रवार को जारी आदेश में 42 आरटीएस अधिकारियों को आरएएस पद पर पदोन्नति दी है। इनमें वे अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्हें पहले तीन संतान नीति के कारण रोक दी गई थी।
सूत्रों के अनुसार

श्रेणी

संख्या

आधार

सामान्य पात्रता

36

योग्यता एवं सेवा

तीन संतान प्रावधान

6

2023 संशोधन के तहत

 सरकार बोली समान अवसर और न्याय का संदेश

राज्य सरकार का कहना है कि इस निर्णय से उन सभी कर्मचारियों को न्याय मिला है जो 20 से 25 साल की सेवा पूरी करने के बावजूद पदोन्नति से वंचित थे।
यह फैसला न केवल प्रशासनिक न्याय की मिसाल है, बल्कि कर्मचारियों में नई ऊर्जा, विश्वास और प्रेरणा भी जगाएगा।