जयपुर, जोधपुर और कोटा में अब एक-एक नगर निगम, वन-स्टेट वन इलेक्शन नीति के तहत बड़ा कदम

राजस्थान सरकार ने 'वन स्टेट वन इलेक्शन' नीति को अमलीजामा पहनाते हुए बड़ा प्रशासनिक सुधार किया है। जयपुर, जोधपुर और कोटा में संचालित दो-दो नगर निगमों का विलय कर दिया गया है। अब इन तीनों महानगरों में एक शहर-एक नगर निगम की व्यवस्था लागू हो गई है।

जयपुर, जोधपुर और कोटा में अब एक-एक नगर निगम, वन-स्टेट वन इलेक्शन नीति के तहत बड़ा कदम

जयपुर, जोधपुर और कोटा में अब एक-एक नगर निगम, वन-स्टेट वन इलेक्शन नीति के तहत बड़ा कदम

जयपुर। राजस्थान सरकार ने 'वन स्टेट वन इलेक्शन' नीति को अमलीजामा पहनाते हुए बड़ा प्रशासनिक सुधार किया है। जयपुर, जोधपुर और कोटा में संचालित दो-दो नगर निगमों का विलय कर दिया गया है। अब इन तीनों महानगरों में एक शहर-एक नगर निगम की व्यवस्था लागू हो गई है। इन छह नगर निगमों (जयपुर ग्रेटर, जयपुर हेरिटेज, जोधपुर उत्तर, जोधपुर दक्षिण, कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण) का कार्यकाल आज 9 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। कल 10 नवंबर से इन शहरों में पुरानी व्यवस्था बहाल हो जाएगी, यानी एक शहर में एक ही नगर निगम होगा। अस्थायी रूप से संभागीय आयुक्त ही प्रशासक की भूमिका निभाएंगे, जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते।

 छह नगर निगमों का कार्यकाल आज समाप्त

जयपुर ग्रेटर, जयपुर हेरिटेज, जोधपुर नॉर्थ, जोधपुर साउथ, कोटा नॉर्थ और कोटा साउथ इन छह नगर निगमों का कार्यकाल आज (9 नवंबर) समाप्त हो रहा है। 10 नवंबर से नई व्यवस्था लागू होगी, जिसके तहत प्रत्येक शहर में एक ही निगम कार्य करेगा।

 अस्थायी रूप से संभागीय आयुक्त होंगे प्रशासक

कार्यकाल समाप्त होने के बाद इन तीनों निगमों का संचालन संभागीय आयुक्त अस्थायी रूप से प्रशासक के रूप में संभालेंगे। जब तक नए चुनाव नहीं होते, तब तक यही अधिकारी नगर निगमों के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों की निगरानी करेंगे।

 2026 में एक साथ होंगे निकाय चुनाव

सरकार ने तय किया है कि फरवरी 2026 तक प्रदेश के सभी नगर निकायों का कार्यकाल पूरा किया जाएगा। इसके बाद राज्यभर में एक साथ निकाय चुनाव कराने की योजना है। यह कदम न केवल प्रशासनिक खर्च घटाएगा बल्कि शहरी शासन में नीतिगत एकरूपता भी लाएगा।

 ‘वन-स्टेट, वन-इलेक्शन’ नीति का उद्देश्य

राज्य सरकार का मानना है कि बार-बार होने वाले चुनावों से प्रशासनिक संसाधन बंट जाते हैं। इसलिए एक समान चुनाव प्रणाली से विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी और जनता को भी शासन से त्वरित लाभ मिल सकेगा।

तीनों शहरों में विलय की पूरी डिटेल

शहर

पुराने निगम

नया निगम

जयपुर

जयपुर ग्रेटर, जयपुर हेरिटेज

जयपुर नगर निगम

जोधपुर

जोधपुर उत्तर, जोधपुर दक्षिण

जोधपुर नगर निगम

कोटा

कोटा उत्तर, कोटा दक्षिण

कोटा नगर निगम

इस विलय के बाद अब इन शहरों में प्रशासनिक एकरूपता आएगी। पहले दो निगम होने से विकास योजनाओं में समन्वय की कमी, बजट बंटवारा और जनता को दोहरा संपर्क जैसे मुद्दे थे। अब एक ही निगम होने से ये समस्याएं दूर होंगी।

10 नवंबर से संभागीय आयुक्त होंगे प्रशासक

निगमों के कार्यकाल समाप्ति के बाद 10 नवंबर 2025 से प्रशासनिक जिम्मेदारी संभागीय आयुक्त के पास रहेगी। ये अस्थायी व्यवस्था तब तक चलेगी, जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते। प्रशासक के रूप में आयुक्त:

  • दैनिक कार्यों का संचालन करेंगे
  • सफाई, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करेंगे
  • विकास परियोजनाओं को गति देंगे

फरवरी 2026 तक सभी निकायों का कार्यकाल समाप्त, एक साथ होंगे चुनाव

राज्य सरकार की योजना के अनुसार, फरवरी 2026 तक प्रदेश के सभी शहरी निकायों (नगर निगम, नगर परिषद, नगर पालिका) का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। इसके बाद सभी निकायों में एक साथ चुनाव कराए जाएंगे। यह कदम 'वन स्टेट वन इलेक्शन' की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

मुख्य उद्देश्य

  • चुनावी खर्च में कमी
  • बार-बार कोड ऑफ कंडक्ट से होने वाली विकास कार्यों की रुकावट खत्म
  • प्रशासनिक स्थिरता और एकरूपता

जनता को क्या फायदा?

  • एक ही निगम → शिकायत निवारण आसान
  • विकास योजनाएं तेजी से लागू
  • बजट का बेहतर उपयोग, बंटवारा नहीं
  • चुनाव एक साथ → बार-बार मतदान का बोझ कम