राजस्थान के पश्चिमी इलाके में रेल नेटवर्क का नया दौर, पचपदरा रिफाइनरी को बालोतरा से जोड़ने की योजना

राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित पचपदरा रिफाइनरी, जो राज्य का सबसे बड़ा औद्योगिक प्रोजेक्ट है, अब रेलवे नेटवर्क से सीधे जुड़ने की कगार पर है।

राजस्थान के पश्चिमी इलाके में रेल नेटवर्क का नया दौर, पचपदरा रिफाइनरी को बालोतरा से जोड़ने की योजना

राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित पचपदरा रिफाइनरी, जो राज्य का सबसे बड़ा औद्योगिक प्रोजेक्ट है, अब रेलवे नेटवर्क से सीधे जुड़ने की कगार पर है। उत्तर पश्चिम रेलवे (एनडब्ल्यूआर) ने बालोतरा से पचपदरा तक लगभग 11 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाने का महत्वाकांक्षी प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा है। बोर्ड से सर्वे की मंजूरी मिलते ही जमीन पर काम शुरू हो जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत 33 लाख रुपये है। यह परियोजना न केवल रिफाइनरी के लिए क्रांतिकारी साबित होगी, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक विकास को नई गति देगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: नमक उद्योग से रिफाइनरी तक का सफर

पचपदरा का इतिहास नमक उत्पादन से जुड़ा है, जो सदियों से यहां का प्रमुख उद्योग रहा। 1939 में, स्थानीय व्यापारी गुलाब चंद के आग्रह पर ब्रिटिश सरकार ने बालोतरा से पचपदरा तक रेल ट्रैक बिछाया था। इस ट्रेन में नमक लदे वैगनों के साथ दो यात्री कोच भी चलते थे, जो रोजाना हजारों टन नमक ढोती थी। 1990 की बाढ़ में ट्रैक क्षतिग्रस्त होने के बाद 1992 में सेवा बंद हो गई और ट्रैक भी उखाड़ लिया गया। लगभग 35 साल बाद, अब रिफाइनरी के कारण यह पुराना रूट फिर से जीवंत हो रहा है। रेल मंत्रालय ने पहले ही बालोतरा-पचपदरा-सांभरा तक ट्रैक लेआउट को मंजूरी दे दी है।

रिफाइनरी के लिए क्यों जरूरी है यह कनेक्टिविटी?

पचपदरा रिफाइनरी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और राजस्थान सरकार की संयुक्त परियोजना, 9 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाली देश की सबसे आधुनिक इको-फ्रेंडली रिफाइनरी है। इसका निर्माण 2017 से चल रहा है और दिसंबर 2025 तक व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। कुल लागत 43,129 करोड़ रुपये है, जिसमें पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी शामिल है। प्रतिदिन हजारों टन पेट्रोलियम उत्पाद (पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल आदि) का उत्पादन होगा।

परिवहन में सुगमता: रेल कनेक्टिविटी से कच्चा तेल और उत्पादों का रेल मार्ग से परिवहन आसान होगा, जो सड़क पर निर्भरता कम करेगा। इससे लागत घटेगी और पर्यावरण संरक्षण होगा।

आर्थिक लाभ: रेलवे को सालाना सैकड़ों करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) से जुड़ाव के बाद मशीनरी, उत्पादों का आदान-प्रदान तेज होगा।

औद्योगिक कॉरिडोर का निर्माण: बोरावास, कलावा, रामनगर में प्रस्तावित पेट्रोजोन उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार के हजारों अवसर खुलेंगे, निवेश बढ़ेगा और पश्चिमी राजस्थान एक मजबूत इंडस्ट्रियल हब बनेगा।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सितंबर 2025 में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात में इस लिंक को तेजी से बहाल करने की मांग की, जिस पर सकारात्मक आश्वासन मिला। जनवरी 2025 में सीएम ने रिफाइनरी का निरीक्षण भी किया।

स्थानीय उत्साह और उम्मीदें

स्थानीय लोग इस परियोजना से उत्साहित हैं। प्रतिनिधि डालूराम प्रजापति, डूंगर देवासी और निवासी पदम गौड़, रामबाबू अरोड़ा, मोहम्मद निजाम जैसे लोग नए साल में काम शुरू होने की उम्मीद जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी चर्चा जोरों पर है, जहां पुरानी ट्रेन की यादें ताजा हो रही हैं। एक यूजर ने ट्वीट किया कि 1980 तक यहां चार डिब्बों की ट्रेन चलती थी, लेकिन अब रिफाइनरी से जमीन पर अतिक्रमण की समस्या है, जिसे हल करने की जरूरत है।

चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं

सर्वे के बाद भूमि अधिग्रहण और निर्माण में देरी न हो, यह चुनौती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह 'गेम चेंजर' बनेगी, जो राजस्थान की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करेगी और निर्यात बढ़ाएगी। रिफाइनरी से जुड़े अन्य प्रोजेक्ट जैसे दिल्ली-जैसलमेर, उदयपुर-जोधपुर ट्रेन सेवाएं भी चर्चा में हैं।

यह परियोजना न केवल रिफाइनरी को जोड़ेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र को रेल नेटवर्क से मजबूत बनाएगी, जिससे आर्थिक समृद्धि का नया अध्याय शुरू होगा।