राजस्थान उपचुनाव हार के बाद जुबानी जंग तेज, डोटासरा का भजनलाल सरकार पर जोरदार हमला

राजस्थान में हाल ही में हुए सात विधानसभा सीटों के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मिली करारी शिकस्त के बाद सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

राजस्थान उपचुनाव हार के बाद जुबानी जंग तेज, डोटासरा का भजनलाल सरकार पर जोरदार हमला

जयपुर। राजस्थान में हाल ही में हुए सात विधानसभा सीटों के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मिली करारी शिकस्त के बाद सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने लक्ष्मणगढ़ के एक दिवसीय दौरे के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार और उनके मंत्रियों पर तीखा प्रहार किया। डोटासरा ने उपचुनाव में हार को सरकार की नाकामी का प्रमाण बताया और कहा कि हार से बौखलायी सरकार अब बदले की भावना से काम कर रही है।

सरकार में बौखलाहट साफ दिख रही है”

पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में डोटासरा ने कहा, “उपचुनाव के नतीजे आने के बाद से सरकार में बेचैनी और बौखलाहट साफ नजर आ रही है। इसी बौखलाहट के चलते मंत्रीगण मेरे खिलाफ मनगढ़ंत और आधारहीन बयानबाजी कर रहे हैं। यह जनता के सामने उनकी हताशा को दर्शाता है।”

महरिया समर्थक शिक्षकों का तबादला: बदले की राजनीति का उदाहरण

डोटासरा ने सरकार की कथित द्वेषपूर्ण कार्यशैली का ताजा उदाहरण देते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “जो शिक्षक सुभाष महरिया जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे, उन्हें रातों-रात जैसलमेर जैसी दूरस्थ जगह पर ट्रांसफर कर दिया गया। यह साफ दिखाता है कि भजनलाल सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। लोकतंत्र में असहमति को दबाने की यह कोशिश जनता देख रही है और इसका जवाब आने वाले समय में मिलेगा।”

मदन दिलावर बने निशाने पर, डोटासरा ने कहा – “सेल्फ स्टार्ट मंत्री”

राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर तंज कसते हुए डोटासरा ने उन्हें “सेल्फ स्टार्ट मंत्री” की उपाधि दी। उन्होंने कहा, “मदन दिलावर को न तो कोई निर्देश चाहिए, न कोई वजह। वे खुद ही सेल्फ स्टार्ट होकर बयानबाजी शुरू कर देते हैं। उनके बयान सरकार के भीतर की कलह और अनुशासनहीनता को उजागर करते हैं।”

कार्यकर्ताओं को दिया “स्विचिंग वोट” पर फोकस करने का निर्देश

राजनीतिक हमलों के साथ-साथ डोटासरा ने पार्टी की आंतरिक तैयारी पर भी जोर दिया। लक्ष्मणगढ़ और नेछवा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों के साथ आयोजित बैठक में उन्होंने बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) को (SAR) को पूरी गंभीरता से पूरा करने का निर्देश दिया।

खास तौर पर डोटासरा ने कार्यकर्ताओं से कहा कि आने वाले चुनावों में “स्विचिंग वोट” (एक पार्टी से दूसरी पार्टी में शिफ्ट होने वाले मतदाता) पर विशेष नजर रखी जाए। उन्होंने कहा, “जो वोटर पिछले चुनाव में हमसे दूर गए थे, उन्हें वापस लाना हमारी प्राथमिकता है। बूथ स्तर पर मेहनत और सजगता ही हमें फिर से सत्ता में ला सकती है।”

उपचुनाव नतीजों ने बदला राजनीतिक माहौल

गौरतलब है कि 13 नवंबर को घोषित उपचुनाव परिणामों में कांग्रेस ने 7 में से 5 सीटें जीतकर सत्तारूढ़ बीजेपी को करारा झटका दिया था। झुंझुनू, दौसा, खिनवसर, चौरासी और सलूंबर सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की, जबकि बीजेपी केवल 2 सीटें ही बचा पाई। इन नतीजों ने राजस्थान की सियासत में नया जोश भर दिया है और 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच जंग को और तेज कर दिया है।

कांग्रेस अब इन उपचुनाव नतीजों को जनादेश का हवाला देकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि बीजेपी इसे स्थानीय मुद्दों और कम मतदान प्रतिशत से जोड़कर बचाव कर रही है। आने वाले दिन राजस्थान की राजनीति में और गरमा सकते हैं।