जयपुर में घाट की गूणी टनल में अनियंत्रित ट्रोले ने बाइक सवार दो युवकों को कुचला
राजधानी जयपुर की कुख्यात घाट की गूणी टनल एक बार फिर मौत का तांडव बन गई। रविवार सुबह अनियंत्रित ट्रोला (हाइवा) ने बाइक सवार दो युवकों को जोरदार टक्कर मार दी। दोनों युवक मौके पर ही कुचलकर मर गए। हादसे के बाद टनल के दोनों तरफ कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया और घंटों अफरा-तफरी का माहौल रहा।
जयपुर। राजधानी जयपुर की कुख्यात घाट की गूणी टनल एक बार फिर मौत का तांडव बन गई। रविवार सुबह अनियंत्रित ट्रोला (हाइवा) ने बाइक सवार दो युवकों को जोरदार टक्कर मार दी। दोनों युवक मौके पर ही कुचलकर मर गए। हादसे के बाद टनल के दोनों तरफ कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया और घंटों अफरा-तफरी का माहौल रहा।
दोनों युवक थे 25-30 साल के, पहचान जारी
मृतक युवकों की पहचान अभी पूरी तरह नहीं हो पाई है, लेकिन दोनों की उम्र 25-30 वर्ष के बीच बताई जा रही है। दोनों एक ही बाइक पर सवार थे। ट्रांसपोर्ट नगर थाना पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर कांवटिया अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। पोस्टमार्टम सोमवार को होगा। हादसे के तुरंत बाद ट्रोला चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

टनल बनी है “डेथ ट्रैक”
घाट की गूणी टनल जयपुर-अजमेर हाइवे पर स्थित सबसे खतरनाक टनल मानी जाती है। पिछले 5 सालों में यहां 200 से ज्यादा बड़े-छोटे हादसे हो चुके हैं, जिनमें दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है। फिर भी प्रशासन ने कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला।
हादसों की मुख्य वजहें
- टनल में ट्रक, ट्रोला, बस जैसे भारी वाहनों के साथ मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा और पैदल यात्री भी गुजरते हैं – मिश्रित ट्रैफिक
- ढलान पर तेज रफ्तार वाहनों के लिए कोई स्पीड ब्रेकर नहीं
- टनल के अंदर कोई स्पीड लिमिट बोर्ड या रंबल स्ट्रिप्स नहीं
- लाइटिंग खराब, कई जगह अंधेरा रहता है
- कोई स्थायी ट्रैफिक पुलिस पोस्ट या CCTV निगरानी नहीं
- भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक बाईपास रोड का अभाव
स्थानीय लोग और ट्रैफिक विशेषज्ञ लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि टनल को केवल भारी वाहनों के लिए रखा जाए और दोपहिया वाहनों के लिए ऊपर से पुराना घाट रोड ही इस्तेमाल हो। लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
लोगों में गुस्सा, प्रशासन पर सवाल
हादसे के बाद मौके पर जुटी भीड़ ने नारेबाजी की और सड़क जाम कर दी। लोगों का कहना था, “हर महीने यहां कोई न कोई मरता है। कितनी लाशें चाहिए प्रशासन को जागने के लिए?” जयपुर ग्रामीण SP और ट्रैफिक पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और जाम खुलवाया। मुख्यमंत्री कार्यालय तक इस घटना की शिकायत पहुंच चुकी है।

