राजस्थान में प्रदूषण का कहर, सीकर में 100 से अधिक लोग सांस की तकलीफ से अस्पताल पहुंचे

राजस्थान की राजधानी जयपुर सहित कोटा, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, श्रीगंगानगर और भरतपुर जैसे प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है।

राजस्थान में प्रदूषण का कहर, सीकर में 100 से अधिक लोग सांस की तकलीफ से अस्पताल पहुंचे

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर सहित कोटा, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, श्रीगंगानगर और भरतपुर जैसे प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और विभिन्न एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम के अनुसार, शनिवार को भिवाड़ी में AQI 359, कोटा में 302, जयपुर में 259, भीलवाड़ा में 246, श्रीगंगानगर में 256 और भरतपुर में 210 दर्ज किया गया। ये आंकड़े 'बहुत खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में आते हैं, जिससे सांस की बीमारियों, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी समस्याओं के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे, बुजुर्ग और पहले से अस्थमा या श्वसन रोगों से ग्रस्त लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

राजस्थान के प्रमुख शहरों में AQI का हाल

राजस्थान में औसत AQI 188 (अस्वास्थ्यकर) है, लेकिन औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में यह स्तर और भी चिंताजनक है। नीचे दिए गए आंकड़ों के आधार पर:

शहर

AQI स्तर

श्रेणी

भिवाड़ी

359

गंभीर (Severe)

कोटा

302

बहुत खराब (Very Poor)

जयपुर

259

बहुत खराब (Very Poor)

भीलवाड़ा

246

बहुत खराब (Very Poor)

श्रीगंगानगर

256

बहुत खराब (Very Poor)

भरतपुर

210

खराब (Poor)

सीकर

64

अच्छा (Good)

जयपुर में पिछले 24 घंटों में AQI 166 से बढ़कर 333 तक पहुंचा, जो वाहनों के धुएं, निर्माण कार्य और पराली जलाने से जुड़ा है। भिवाड़ी, जो औद्योगिक हब है, में PM2.5 का स्तर 361 तक पहुंच गया, जो फेफड़ों के लिए घातक है।

सीकर में प्रदूषण से हड़कंप: 100 से अधिक लोग अस्पताल पहुंचे

सीकर जिले के शांति नगर औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ने से सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें बढ़ गई हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, धुंध और धूल के कारण कई लोगों को सांस फूलना, खांसी और सीने में जकड़न हुई। एसके हॉस्पिटल में करीब 100 से अधिक लोग भर्ती हुए, जहां डॉक्टरों ने ऑक्सीजन थेरेपी और दवाओं से उनका इलाज किया।

डॉ. राजेश शर्मा, एसके हॉस्पिटल के श्वसन विशेषज्ञ ने बताया,

“प्रदूषण के कारण अस्थमा के मरीजों में 30% वृद्धि देखी गई है। सलाह है कि बाहर न निकलें, मास्क पहनें और घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।”

प्रदूषण का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन स्थानीय फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और वाहनों की संख्या मुख्य वजह मानी जा रही है। ग्रामीणों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

स्वास्थ्य पर असर: विशेषज्ञों की चेतावनी

वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार:

  • अस्थमा और ब्रोंकाइटिस: सांस की नलियों में सूजन बढ़ रही है।
  • आंखों में जलन और त्वचा रोग: PM2.5 कण त्वचा में घुसकर एलर्जी पैदा कर रहे हैं।
  • हृदय रोग: लंबे समय तक प्रदूषण से हार्ट अटैक का खतरा 20% बढ़ जाता है।

बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों ने INHALE थेरेपी (Inhalers) और ह्यूमिडिफायर के इस्तेमाल की सिफारिश की है।

दिल्ली-NCR में भी प्रदूषण का अलर्ट: AQI 400 पार

दिल्ली-NCR में स्थिति और भी गंभीर है। 23 नवंबर को दिल्ली का AQI 380 (बहुत खराब), नोएडा 396, ग्रेटर नोएडा 380, गाजियाबाद 426 (गंभीर) रहा। आनंद विहार में 429, अशोक विहार 420 और बवाना में 432 दर्ज किया गया।

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने GRAP स्टेज III लागू कर दिया है, जिसमें डीजल ऑटो प्रतिबंधित हैं और स्कूलों में फिजिकल स्पोर्ट्स स्थगित कर दिए गए हैं। दिल्ली सरकार ने 25 नवंबर को छुट्टी घोषित की है। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड बढ़ने से प्रदूषण और बिगड़ेगा।

राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी जिलों में मॉनिटरिंग बढ़ा दी है। लोगों से अपील है कि मास्क पहनें, वाहनों का प्रदूषण चेक कराएं और पेड़ लगाएं। अगर सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।