खेत पर बैठे 87 साल के बुजुर्ग पर पैंथर ने किया हमला, सिर-पीठ पर गहरे घाव, उदयपुर रेफर
राजसमंद जिले की कुंवारिया तहसील के झोर गांव में मंगलवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब खेत पर बैठे 87 वर्षीय बुजुर्ग जगरूप कीर पर अचानक झाड़ियों में छिपे पैंथर ने जानलेवा हमला कर दिया।
राजसमंद। राजसमंद जिले की कुंवारिया तहसील के झोर गांव में मंगलवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब खेत पर बैठे 87 वर्षीय बुजुर्ग जगरूप कीर पर अचानक झाड़ियों में छिपे पैंथर ने जानलेवा हमला कर दिया। पैंथर के पंजों और दांतों से बुजुर्ग का सिर, पीठ और शरीर का अगला हिस्सा बुरी तरह जख्मी हो गया। लहूलुहान हालत में बुजुर्ग को परिजनों ने राजसमंद के राजकीय आरके अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत देखते हुए उदयपुर के MB हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया।
रोज सुबह खेत देखने गए थे बुजुर्ग
परिजनों ने बताया कि 87 वर्षीय जगरूप कीर रोजाना की तरह सुबह करीब 8 बजे अपने खेत पर गए थे। खेत के पास ही बैठे थे तभी झाड़ियों में छिपा पैंथर अचानक उन पर झपट पड़ा। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े, लेकिन तब तक पैंथर जंगल की ओर भाग चुका था।
कुछ देर बाद खेत पर पहुंचे बेटे किशन कीर ने पिता को खून से लथपथ तड़पते देखा तो चीख निकल गई। उन्होंने तुरंत अपने भाइयों बालू कीर और सोहन कीर को बुलाया। तीनों मिलकर बुजुर्ग को तुरंत राजसमंद अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने बताया कि पैंथर के पंजों से सिर पर गहरे घाव, पीठ पर निशान और शरीर के आगे के हिस्से में कई जख्म हैं। खून अधिक बहने से हालत गंभीर होने के कारण तुरंत उदयपुर रेफर किया गया।
गांव में दहशत, लोग घरों में कैद
हमले की खबर फैलते ही पूरे झोर गांव और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 15-20 दिनों से रात में पैंथर की दहाड़ और आवाजाही की शिकायतें लगातार आ रही थीं, लेकिन वन विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों का कहना है, “अगर अभी नहीं चेते तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बच्चे और बुजुर्ग खेतों पर जा ही नहीं पा रहे।”
वन विभाग की टीम मौके पर रवाना
सूचना मिलते ही कुंवारिया रेंजर और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई है। ट्रैकिंग टीम पैंथर के पगमार्क और लोकेशन का पता लगा रही है। विभाग ने जल्द ही पिंजरा लगाने और निगरानी बढ़ाने का आश्वासन दिया है। पिछले एक महीने में राजसमंद और उदयपुर संभाग में पैंथर-तेंदुए के हमलों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे जंगल से सटे गांवों में दहशत लगातार बढ़ रही है।

