प्रमोद जैन भाया ने ली विधायक पद की शपथ, राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस की ताकत बढ़ी
राजस्थान की राजनीति में आज का दिन विपक्ष के लिए और भी खास साबित हुआ। बारां जिले की अंता विधानसभा सीट से हाल ही में उपचुनाव जीतकर आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद जैन भाया ने नवनिर्वाचित विधायक पद की शपथ ले ली।
जयपुर। राजस्थान की राजनीति में आज का दिन विपक्ष के लिए और भी खास साबित हुआ। बारां जिले की अंता विधानसभा सीट से हाल ही में उपचुनाव जीतकर आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद जैन भाया ने नवनिर्वाचित विधायक पद की शपथ ले ली। विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी ने अपने चैंबर में भाया को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस शपथ ग्रहण के साथ ही 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में विधायकों की संख्या पूर्ण रूप से 200 हो गई, जो सदन के शीतकालीन सत्र से पहले एक महत्वपूर्ण कदम है।
शपथ ग्रहण समारोह: औपचारिकता से आगे की राजनीति
शपथ ग्रहण समारोह विधानसभा भवन के स्पीकर चैंबर में आयोजित किया गया। यह एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण कार्यक्रम था, जिसमें भाया ने विधायक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को स्वीकार किया। स्पीकर देवनानी ने शपथ दिलाते हुए कहा कि भाया का सदन में आना विधानसभा की कार्यवाही को और समृद्ध करेगा। शपथ के बाद भाया ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “यह जनता का आशीर्वाद है। अंता क्षेत्र के विकास और राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करने के लिए सदन में सक्रिय भूमिका निभाऊंगा।”
भाया का राजनीतिक सफर: चौथी बार अंता से जीत का कीर्तिमान
प्रमोद जैन भाया राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार हैं। अंता विधानसभा क्षेत्र से यह उनकी चौथी जीत है, जो उनके मजबूत जनाधार को दर्शाती है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार में वे कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, जहां उनके पास खान एवं भूगर्भ, गोपालन, पशुपालन तथा पेट्रोलियम जैसे महत्वपूर्ण विभाग थे। 2023 के चुनाव में वे बीजेपी के कंवरलाल मीणा से 5861 वोटों से हार गए थे, लेकिन 2025 के उपचुनाव में उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी मोरपाल सुमन को 15,594 वोटों के भारी अंतर से करारी शिकस्त दी।
यह सीट खाली होने का कारण कंवरलाल मीणा की 1 मई 2025 को रद्द हुई सदस्यता था। भाया की जीत को जैन समाज ने भी ऐतिहासिक बताया, क्योंकि वे जैन रत्न के रूप में जाने जाते हैं। उनकी जीत में क्षेत्रीय मुद्दों जैसे अवैध खनन, सिंचाई और विकास कार्यों पर फोकस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उपचुनावों का राजनीतिक संदर्भ: कांग्रेस की वापसी का संकेत
अंता उपचुनाव 11 नवंबर को हुआ था, और 14 नवंबर को घोषित नतीजों ने कांग्रेस को राहत दी। यह जीत राज्य में बीजेपी सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष का संकेत मानी जा रही है। हाल ही में सात अन्य विधानसभा सीटों के उपचुनावों में भी कांग्रेस ने पांच सीटें जीती थीं, जिससे पार्टी का कुल विधायक संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। भाया के सदन में प्रवेश से विपक्ष अब खनन माफिया, पशुपालन योजनाओं में कटौती और हाड़ौती क्षेत्र के विकास जैसे मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में है।
भविष्य की रणनीति: सदन में आक्रामक भूमिका
भाया का अनुभव सदन की बहसों को धार देगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, शपथ ग्रहण के अवसर पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। यह आयोजन कांग्रेस की एकजुटता का प्रतीक बना। आने वाले शीतकालीन सत्र में विपक्ष की रणनीति में भाया की भूमिका केंद्रीय होगी, जो सत्ता पक्ष को विभिन्न मोर्चों पर चुनौती देगी।

