राजस्थान ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी, सशक्त बिजनेस इकोसिस्टम के साथ राजस्थान बनेगा जीसीसी एक्सीलेंस हब
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में राजस्थान ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी-2025 को मंजूरी दे दी गई। यह नीति प्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के लिए देश का पसंदीदा गंतव्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में राजस्थान ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी-2025 को मंजूरी दे दी गई। यह नीति प्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के लिए देश का पसंदीदा गंतव्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। किफायती ऑपरेशनल लागत, बेहतर कनेक्टिविटी और उद्योग-अनुकूल नीति प्रावधानों के चलते राजस्थान तेजी से निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है।
एनसीआर और DMIC से बेहतर कनेक्टिविटी
राज्य की रणनीतिक स्थिति और एनसीआर रीजन व दिल्ली–मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) से सशक्त कनेक्टिविटी जीसीसी निवेशकों को बड़े औद्योगिक केंद्रों और विशाल बाजारों तक आसान पहुंच प्रदान करती है। प्रमुख शहरों में किफायती ऑपरेशनल लागत भी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को राजस्थान में निवेश के लिए आकर्षित कर रही है।
GCC की स्थापना के लिए मिलेगी त्वरित स्वीकृति
नीति के तहत आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इच्छुक कंपनियों को राजनिवेश सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा।
- Project Evaluation Committee (PEC) 60 दिन के भीतर परियोजना रिपोर्ट की समीक्षा करेगी।
- Project Approval Committee (PAC) भी 60 दिन के भीतर अंतिम निर्णय लेगी।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को जीसीसी आवेदनों के निस्तारण के लिए नोडल विभाग बनाया गया है।
स्थानीय प्रतिभा को मिलेगा बड़ा लाभ
जीसीसी मॉडल कंपनियों के लिए नवाचार, प्रबंधन, वित्त, मानव संसाधन और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में दक्षता बढ़ाने का केंद्र बन चुका है। नई नीति स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देने, उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार सृजित करने और कौशल विकास को नई दिशा देगी। राजस्थान सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक 200 से अधिक GCC स्थापित किए जाएं और 1.5 लाख से अधिक रोजगार सृजित हों।
RIPS-2024 के अंतर्गत आकर्षक प्रोत्साहन
नीति में जीसीसी की स्थापना हेतु राजस्थान औद्योगिक प्रोत्साहन योजना (RIPS-2024) के तहत बड़े लाभ दिए जाएंगे
- परियोजना लागत का 30% या अधिकतम 10 करोड़ रुपए तक पूंजी सब्सिडी
- भूमि/लीज लागत का 50% (अधिकतम 1 करोड़ रुपए) तक प्रतिपूर्ति
- कर्मचारियों के वेतन पर पहले तीन वर्ष 30% (1.25 लाख प्रति कर्मचारी/वर्ष) तक पेरोल सब्सिडी
- रुपए 5 करोड़ प्रति वर्ष तक रेंटल असिस्टेंस
- प्रशिक्षण लागत का 50% (अधिकतम 2.5 करोड़ रुपए/वर्ष)
- ग्रीन इंसेंटिव, R&D सहायता, पेटेंट/कॉपीराइट सहायता, स्टांप ड्यूटी व बिजली शुल्क में छूट
भारत की जीसीसी इंडस्ट्री की बढ़ती भूमिका
वर्ष 2024 में भारत के GCCs में लगभग 1.9 मिलियन कर्मचारी कार्यरत थे, जिन्होंने अर्थव्यवस्था में 64.6 बिलियन डॉलर का योगदान दिया। 2030 तक यह योगदान 110 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। राजस्थान की यह नई नीति इस बढ़ते जीसीसी सेक्टर में राज्य की हिस्सेदारी मजबूत करेगी।

