298 साल की हुई गुलाबी नगरी, क्या है जयपुर का इतिहास? क्यों है इतना खास आईए जानते हैं...
राजस्थान की राजधानी जयपुर ने आज अपना 298वाँ स्थापना दिवस बड़े उत्साह और पारंपरिक ठाठ-बाट से मनाया। सन् 1727 में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बसाई गई यह ‘गुलाबी नगरी’ आज भी दुनिया की सबसे सुनियोजित एवं सुंदर शहरों में शुमार है।
जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर ने आज अपना 298वाँ स्थापना दिवस बड़े उत्साह और पारंपरिक ठाठ-बाट से मनाया। सन् 1727 में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बसाई गई यह ‘गुलाबी नगरी’ आज भी दुनिया की सबसे सुनियोजित एवं सुंदर शहरों में शुमार है। हवामहल, जंतर-मंतर, आमेर किला, सिटी पैलेस, अल्बर्ट हॉल और नाहरगढ़ सहित सभी प्रमुख स्मारकों पर सुबह से ही पर्यटकों की चहल-पहल रही। राजस्थानी परिधानों में सजा स्टाफ, लोक धुनें, शहनाई वादन, रंगोली और विशेष गाइडेड टूर ने पूरे शहर को उत्सवमय बना दिया।
हवामहल से जंतर-मंतर तक हर कोने में रौनक
हवामहल के मुख्य द्वार पर विशाल रंगोली और फूलों की सजावट ने विदेशी पर्यटकों को सबसे ज्यादा आकर्षित किया। यहां विशेष रूप से हवामहल की 953 झरोखों वाली वास्तुकला और इसे बनाने के पीछे की कहानी सुनाई गई कि कैसे राजपूत रानियां बिना दिखे बाजार का नजारा देख सकें।

यूनेस्को विश्व धरोहर जंतर-मंतर पर सबसे ज्यादा भीड़ रही। दुनिया का सबसे बड़ा पत्थर का सूर्य घड़ी ‘सम्राट यंत्र’ आज भी 2 सेकंड की सटीकता से समय बताता है। पर्यटकों को बताया गया कि महाराजा जयसिंह ने दिल्ली, उज्जैन, वाराणसी, मथुरा के बाद जयपुर में सबसे बड़ा वेधशाला बनाई थी।
आमेर किले में हाथी-यात्रा, शाही तोपों का प्रदर्शन और कच्छी घोड़ी नृत्य ने सैलानियों को राजसी ठाठ का एहसास कराया। अल्बर्ट हॉल में मिस्र की ममी, राजपूत शस्त्र और मिनिएचर पेंटिंग्स की प्रदर्शनी ने युवाओं को सबसे ज्यादा
जयपुर का इतिहास
कब और किसने बसाया?
18 नवंबर 1727 को आमेर के कुंवर सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर शहर की नींव रखी। उस समय इनका नाम ‘जयसिंहपुरा’ रखा गया जो बाद में छोटा होकर ‘जयपुर’ हो गया।

बसाने का कारण
- आमेर में पानी की भारी कमी थी।
- जयसिंह को दिल्ली में मुगल दरबार में अपमान का सामना करना पड़ा था, इसलिए उन्होंने अपनी अलग राजधानी बनाने का फैसला किया।
- खगोलशास्त्री होने के कारण उन्होंने वास्तु और ज्योतिष के सिद्धांतों पर शहर बसाया।
दुनिया में खास बातें
- भारत का पहला पूरी तरह से ग्रिड-पैटर्न पर बना शहर (9 खंडों में बंटा – आज भी चौपड़ और चांदपोल जैसी जगहें उसी की गवाह हैं)
- वास्तुकार: विद्याधर भट्टाचार्य (बंगाली वास्तुशास्त्री)
- 1876 में प्रिंस ऑफ वेल्स (बाद में किंग एडवर्ड सप्तम) के स्वागत में पूरा शहर गुलाबी रंग से रंगा गया – तब से ‘पिंक सिटी’ नाम पड़ा।
- दुनिया की सबसे चौड़ी सड़कें उस समय के लिए – मुख्य बाजार की सड़क 111 फीट चौड़ी (आज भी भारत की सबसे चौड़ी पुरानी सड़कों में से एक)
- सात द्वार वाला परकोटा (अजमेरी गेट, सूरजपोल, किशनपोल, चांदपोल आदि)
- ‘छोटी काशी’ के नाम से प्रसिद्ध क्योंकि जयसिंह ने 18 बड़े मंदिर एक साथ बनवाए।

यूनेस्को मान्यताएँ
- जंतर-मंतर – विश्व धरोहर (2010)
- आमेर किला, जयपुर के किले समूह के साथ – विश्व धरोहर (2013)
- जयपुर को 2019 में यूनेस्को क्रिएटिव सिटी (शिल्प एवं लोककला) का दर्जा मिला।
दुनिया का सबसे बड़ा चाँदी का कलश
सिटी पैलेस के अंदर गोविंद देव जी मंदिर में रखा हुआ 1 क्विंटल (100 किलो) से ज़्यादा चाँदी का कलश है। महाराजा माधोसिंह द्वितीय 1902 में इंग्लैंड जाते समय गंगा जल ले गए थे इसी में। आज भी वह कलश वहीं है।

जयपुर में सबसे ऊँचा तिरंगा
आमेर किले पर 105 फीट ऊँचा और 72×48 फीट का तिरंगा फहराया जाता है – राजस्थान का सबसे ऊँचा और सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज यहीं है।
हवा में उड़ता महल
हवामहल को देखने से लगता है 5 मंजिला है, लेकिन अंदर से सिर्फ 1 कमरे की मोटाई है। पूरी बिल्डिंग हवा में ही “उड़ती” हुई लगती है क्योंकि पीछे कोई दीवार नहीं है।
गुलाबी रंग की असली वजह
1876 में प्रिंस ऑफ वेल्स आए थे। महाराजा रामसिंह द्वितीय ने पूरे शहर को गुलाबी रंगवाया क्योंकि गुलाबी रंग भारतीय संस्कृति में “स्वागत का रंग” माना जाता है। तब से कानून बना कि पुराना शहर हमेशा गुलाबी ही रहेगा।
जयपुर की “नौबतखाना” परंपरा आज भी जीवित
सिटी पैलेस में सुबह 7 बजे और शाम 7 बजे आज भी नौबत (ढोल-नगाड़े) बजता है 300 साल पुरानी परंपरा बिना एक दिन छोड़े चल रही है।

जयपुर में 18 नवंबर को सरकारी छुट्टी
राजस्थान सरकार ने 2023 से हर साल 18 नवंबर को “जयपुर स्थापना दिवस” के रूप में आधिकारिक अवकाश घोषित किया है।
जयपुर का असली नाम क्या था?
शुरुआत में शहर का नाम था – “सवाई जयपुर” या “जयसिंहपुरा”। बाद में आम बोलचाल में “जयपुर” पड़ गया।

शहर की प्रमुख विशेषताएँ:
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ग्रिड सिस्टम पर आधारित सड़कें
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समान ऊँचाई वाली इमारतें
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परकोटा (पुराना शहर) में सात दरवाजे
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बाजारों का अनूठा वर्गीकरण
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सुरक्षा और व्यापार दोनों को ध्यान में रखकर डिजाइन
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वास्तु सिद्धांतों का पालन
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गुलाबी रंग—जो आतिथ्य का प्रतीक है (1876 में प्रिंस ऑफ वेल्स के स्वागत में शहर को गुलाबी रंगा गया)
वर्तमान आंकड़े (2025 तक)
- जनसंख्या: लगभग 42 लाख (महानगर क्षेत्र 85 लाख+)
- क्षेत्रफल: 484 वर्ग किमी
- दुनिया में 32वाँ सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर
- राजस्थान में सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक आने वाला शहर (हर साल 60 लाख+)
आज 298 साल बाद भी जयपुर अपनी मूल योजना, गुलाबी रंग, राजसी शान और राजस्थानी आतिथ्य के लिए दुनिया में बेजोड़ है।

