टाइगर रिजर्व के खिलाफ विशाल महापंचायत, ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

करौली जिले के लांगरा क्षेत्र स्थित खान की चौकी पर रविवार को टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट से होने वाले संभावित विस्थापन के खिलाफ हजारों ग्रामीणों की विशाल महापंचायत आयोजित की गई।

टाइगर रिजर्व के खिलाफ विशाल महापंचायत, ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

करौली। करौली जिले के लांगरा क्षेत्र स्थित खान की चौकी पर रविवार को टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट से होने वाले संभावित विस्थापन के खिलाफ हजारों ग्रामीणों की विशाल महापंचायत आयोजित की गई। करौली-धौलपुर लोकसभा क्षेत्र के सैकड़ों गांवों से आए लोगों ने एक स्वर में केंद्र सरकार के इस फैसले को जनविरोधी करार देते हुए इसका पुरजोर विरोध किया और प्रोजेक्ट को तत्काल वापस लेने की मांग की।

महापंचायत को संबोधित करते हुए करौली-धौलपुर के पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश मीणा ने कहा कि यह केवल कुछ गांवों की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लाखों लोगों के अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “हम किसी भी कीमत पर अपने गांव खाली नहीं करेंगे। यह निर्णायक लड़ाई होगी और इसे हम जीतकर रहेंगे।”

गांव-गांव में बनेगी ‘गांव बचाओ आंदोलन’ की कमेटी

रमेश मीणा ने ग्रामीणों से आह्वान किया कि हर गांव में ‘गांव बचाओ आंदोलन’ की कमेटी गठित की जाए। उन्होंने कहा, “जब तक गांव-गांव में संगठन मजबूत नहीं होगा, तब तक दिल्ली में बैठी सरकार को झुकने पर मजबूर नहीं किया जा सकता। हमें एकजुट होकर आंदोलन की अगली रणनीति तैयार करनी है।”

उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि टाइगर रिजर्व के नाम पर जिस तरह से हजारों परिवारों को उजाड़ने की साजिश रची जा रही है, वह पूरी तरह जनविरोधी और अमानवीय है।

उग्र आंदोलन की चेतावनी

महापंचायत में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी सरकार को कड़ा संदेश दिया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि केंद्र सरकार ने टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट पर पुनर्विचार नहीं किया और विस्थापन का फैसला वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा। ग्रामीणों ने ऐलान किया कि जरूरत पड़ी तो रेल-रोको, राजमार्ग जाम और जिला मुख्यालय का घेराव जैसे बड़े आंदोलन किए जाएंगे।

महापंचायत में महिलाओं और युवाओं की बड़ी संख्या मौजूद रही। मंच से बार-बार नारे गूंजते रहे – “गाँव नहीं छोड़ेंगे… छोड़ेंगे नहीं”, “टाइगर रिजर्व नहीं चाहिए… गांव चाहिए”, “हमारा हक छीनने की साजिश नहीं सहेंगे”।

हजारों लोग, एक ही आवाज

लांगरा के मैदान में दूर-दूर तक लोगों का हुजूम दिखाई दे रहा था। ट्रैक्टर-ट्रॉली, मोटरसाइकिल और पैदल मार्च करते हुए लोग सुबह से ही जुटने शुरू हो गए थे। आयोजकों के अनुसार करौली-धौलपुर के 300 से अधिक गांवों के लोग इस महापंचायत में शामिल हुए।

ग्रामीणों का कहना है कि टाइगर रिजर्व बनने से करौली-धौलपुर क्षेत्र के सैकड़ों गांव प्रभावित होंगे। खेती-किसानी, मवेशी पालन और जंगल पर निर्भर हजारों परिवार बेघर हो जाएंगे। उनका आरोप है कि सरकार ने न तो कोई वैकल्पिक पुनर्वास नीति बनाई है और न ही स्थानीय लोगों से कोई राय ली गई है।

महापंचायत के अंत में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से मांग की गई कि डांग क्षेत्र में प्रस्तावित टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट को तत्काल रद्द किया जाए। साथ ही आंदोलन को तेज करने के लिए जल्द ही अगली बैठक बुलाने का ऐलान किया गया।