राजस्थान में चुनाव आने पर मोबाइल बांटना रोका, बिहार में वोटिंग से पहले पेंशन बढ़ाने पर चुप क्यों? अशोक गहलोत का चुनाव आयोग पर तीखा प्रहार

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने बुधवार को जयपुर स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में निर्वाचन आयोग (ECI) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने राजस्थान और बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान आयोग के फैसलों की तुलना करते हुए 'दोहरा मापदंड' का आरोप लगाया।

राजस्थान में चुनाव आने पर मोबाइल बांटना रोका, बिहार में वोटिंग से पहले पेंशन बढ़ाने पर चुप क्यों? अशोक गहलोत का चुनाव आयोग पर तीखा प्रहार

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने बुधवार को जयपुर स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में निर्वाचन आयोग (ECI) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने राजस्थान और बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान आयोग के फैसलों की तुलना करते हुए 'दोहरा मापदंड' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में उनकी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे महिलाओं को मुफ्त मोबाइल फोन वितरण और पेंशन को चुनावी कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) लागू होते ही रोक दिया गया, जबकि बिहार में वोटिंग से ठीक पहले पेंशन में भारी वृद्धि और 10 हजार रुपये की सीधी ट्रांसफर जैसी योजनाओं पर आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह बयान बिहार चुनाव परिणामों के बाद आया है, जहां NDA ने महागठबंधन को करारी शिकस्त दी।

गहलोत ने इसे 'वोट चोरी' का नया रूप बताते हुए कहा, "चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के साथ मिलीभगत कर रहा है। राजस्थान में हमारी योजनाओं पर तुरंत रोक, लेकिन बिहार में प्रचार खत्म होने के बाद भी पैसा बांटने पर मौन। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।" उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को भी निशाने पर लिया, जो सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के बावजूद 12 राज्यों में लागू हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि गहलोत का यह हमला विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है, जो 2028 राजस्थान चुनावों से पहले ECI की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है।

राजस्थान में मोबाइल योजना चुनाव आते ही रोक

गहलोत ने अपनी सरकार की 'इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना' का जिक्र किया, जो मार्च 2022 के बजट में घोषित हुई थी। इसका लक्ष्य 1 करोड़ 25 लाख से अधिक महिलाओं को मुफ्त स्मार्टफोन (इंटरनेट डेटा सहित) उपलब्ध कराना था, ताकि डिजिटल सशक्तिकरण हो सके। योजना की शुरुआत अगस्त 2023 में हुई, लेकिन नवंबर 2023 में विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही MCC लागू हो गया।

गहलोत ने बताया, "केवल 30-40 प्रतिशत महिलाओं को ही मोबाइल बांट पाए। दिसंबर 2023 में पूरी तरह रोक दिया गया। हमने विरोध नहीं किया, क्योंकि निष्पक्ष चुनाव हमारी प्राथमिकता थी।" आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2023 तक 24.56 लाख महिलाओं को फोन वितरित हो चुके थे, जिसकी लागत 1,670 करोड़ रुपये थी। योजना को 'अन्नपूर्णा' और पेंशन वितरण जैसी अन्य योजनाओं के साथ रोका गया, जिसमें बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को लाभ मिलना था। गहलोत ने कहा, "ECI ने कहा कि ये वोटरों को प्रभावित कर सकती हैं, तो हमने तुरंत सहयोग किया।"

वर्तमान भाजपा सरकार ने भी इस योजना को होल्ड पर रखा है, और कहा है कि 'लाभों की जांच' के बाद फैसला लिया जाएगा। कांग्रेस इसे 'महिलाओं के सशक्तिकरण पर हमला' बता रही है।

बिहार में पेंशन वृद्धि: 400 से 1100 रुपये, वोटिंग से एक दिन पहले ट्रांसफर

गहलोत ने बिहार में नीतीश कुमार सरकार के फैसलों पर तीखा प्रहार किया। जून 2025 में, चुनाव से कुछ महीने पहले, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन को 400 रुपये से बढ़ाकर 1,100 रुपये मासिक कर दिया गया। यह फैसला 1.09 करोड़ लाभार्थियों को प्रभावित करता है, और जुलाई 2025 से लागू हुआ।

लेकिन विवादास्पद हिस्सा यह था कि नवंबर 2025 के चुनाव में, प्रचार समाप्त होने और वोटिंग से ठीक एक दिन पहले, पेंशन वृद्धि का लाभ सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। गहलोत ने कहा, "मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 1 करोड़ से अधिक महिलाओं को 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। पोलिंग कल है, और आज खाते में 10 हजार आ गए – यह वोट खरीदने का सीधा तरीका है।" उन्होंने दावा किया कि ये भुगतान MCC लागू होने के बावजूद जारी रहे, जबकि राजस्थान में ऐसी कोई छूट नहीं मिली।

गहलोत ने सवाल उठाया, "एक राज्य में योजनाओं पर रोक, दूसरे में वोटिंग से ऐन पहले पैसा बांटना? यह दोहरा मापदंड क्यों? ECI ने बिहार में हस्तक्षेप क्यों नहीं किया?" विपक्ष ने इसे 'कैश फॉर वोट' का रूप बताया, और NDA की जीत को 'धनबल' से जोड़ा।

सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग, फिर भी 12 राज्यों में लागू

गहलोत ने SIR को 'लोकतंत्र पर हमला' कहा। यह मतदाता सूची का विशेष संशोधन है, जो बिहार में पहले लागू हो चुका था, जहां 65 लाख नाम काटे गए। जून 2025 में ECI ने इसे 12 राज्यों (छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि) और UTs में शुरू किया।

गहलोत ने कहा, "SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं लंबित हैं, फिर भी ECI ने घोषणा कर दी। यह वोटरों को डराने का हथकंडा है।" सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में ECI से जवाब मांगा, और हाईकोर्ट्स को सुनवाई स्थगित करने को कहा। विपक्ष का आरोप है कि SIR से लाखों नाम कटवाकर सत्ताधारी दलों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। बिहार में यह 'वोट चोरी' का कारण बना, जहां महागठबंधन को भारी नुकसान हुआ।

कांग्रेस का 'वोट चोरी' नैरेटिव, NDA का बचाव

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बिहार हार पर SIR को जिम्मेदार ठहराया, और दिसंबर में दिल्ली में ECI के खिलाफ रैली की घोषणा की। राहुल गांधी ने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' कहा। दूसरी ओर, भाजपा ने गहलोत को 'हार का रोना रोने वाला' बताया। राजस्थान CM भजनलाल शर्मा ने कहा, "ECI निष्पक्ष है, विपक्ष हार न स्वीकार कर रहा।"

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. राकेश पांडे ने कहा, "गहलोत का बयान विपक्ष को एकजुट कर सकता है, लेकिन ECI की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यह 2026-28 चुनावों को प्रभावित करेगा।"

लोकतंत्र पर सवाल, ECI की छवि दांव पर

गहलोत का यह बयान बिहार चुनाव (नवंबर 2025) के तुरंत बाद आया, जहां NDA ने 35.5% वोट शेयर से जीत हासिल की। राजस्थान में अंता उपचुनाव में कांग्रेस की जीत को गहलोत ने 'जनादेश का सम्मान' बताया। लेकिन SIR और MCC उल्लंघन के आरोप ECI की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जारी है, और विपक्ष उम्मीद कर रहा है कि इससे 'निष्पक्ष चुनाव' सुनिश्चित होंगे।