Union Budget 2026-27: मेगा टेक्सटाइल पार्क से भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग को नई रफ्तार
Union Budget 2026-27: भीलवाड़ा जिले में हर साल करीब 40 हजार करोड़ रुपये का कपड़ा कारोबार होता है, जबकि हजारों करोड़ रुपये के वस्त्र विदेशों में भेजे जाते हैं।
Union Budget 2026-27: केंद्रीय बजट 2026-27 ने उस वक्त भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग को राहत की सांस दी, जब बाजार में सुस्ती और महंगाई का दबाव साफ नजर आ रहा है। बजट में टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर की गई अहम घोषणाओं ने वस्त्रनगरी के उद्योग जगत में नई उम्मीद जगा दी है। खासतौर पर मेगा टेक्सटाइल पार्क को ‘चैलेंज मोड’ में स्थापित करने के प्रस्ताव को लेकर स्थानीय उद्यमी इसे अपने लिए बड़ा अवसर मान रहे हैं।
देश के प्रमुख कपड़ा उत्पादन केंद्रों में शामिल भीलवाड़ा पहले से ही मजबूत कारोबारी आधार रखता है। अब बजट में मिले प्रोत्साहन से यहां का टेक्सटाइल उद्योग घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पकड़ और मजबूत कर सकेगा। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि इस फैसले से भीलवाड़ा का नाम वैश्विक टेक्सटाइल मानचित्र पर और उभरेगा।
मजबूत कारोबार, बड़े निर्यात की पहचान
भीलवाड़ा जिले में हर साल करीब 40 हजार करोड़ रुपये का कपड़ा कारोबार होता है, जबकि हजारों करोड़ रुपये के वस्त्र विदेशों में भेजे जाते हैं। बजट घोषणाओं के बाद उद्यमियों में विश्वास बढ़ा है कि आने वाले समय में उत्पादन बढ़ेगा और नए निवेश का रास्ता खुलेगा। उनका कहना है कि आधुनिक टेक्नोलॉजी और स्किलिंग पर फोकस से भीलवाड़ा की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर बजट का फोकस
वित्त मंत्री ने बजट में साफ किया कि पुराने कारखानों को आधुनिक रूप दिया जाएगा और श्रमिकों के कौशल विकास के लिए नई योजनाएं शुरू होंगी। छोटे और मध्यम उद्योगों को मजबूती देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा टेक्सटाइल लेबर इंसेंटिव स्कीम और नेशनल हैंडलूम व हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम जैसे कदम सेक्टर को गति देने के लिए उठाए गए हैं।
खादी, हथकरघा और फाइबर पर विशेष ध्यान
बजट में खादी और हथकरघा उद्योग को सशक्त बनाने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू करने की घोषणा की गई है। रेशम, ऊन और जूट जैसे कच्चे माल में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना लाई जाएगी। पारंपरिक क्लस्टरों को आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढालने के लिए वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना भी लागू होगी।
रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि इन योजनाओं से न केवल कपड़ा उद्योग को फायदा होगा, बल्कि बुनकरों, कारीगरों और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। ‘समर्थ 2.0’ जैसी स्किल अपग्रेडेशन योजना से उत्पादन गुणवत्ता सुधरेगी और अंतरराष्ट्रीय मांग के अनुरूप तैयारियां हो सकेंगी।
Saloni Kushwaha 
