आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, 139 लोगों/कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज

जयपुर में आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले में ED ने बड़ी कार्रवाई की, 139 व्यक्तियों और कंपनियों के खिलाफ मनी-लांड्रिंग और धोखाधड़ी के मामले दर्ज।

आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, 139 लोगों/कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज

आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड से जुड़े कथित धोखाधड़ी और मनी-लांड्रिंग के आरोपों में में केंद्रीय जाँच एजेंसी ED ने प्रमुख कदम उठाया है। यह मामला लंबे समय से जारी है और अब इसके तहत कई व्यापक कार्रवाइयां दिखाई दे रही है। ED ने हाल ही में PMLA के तहत लगभग 7.72 करोड़ की चल और अचल संपत्ति को अटैच किया है जो आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी और इससे जुड़े आरोपियों के खिलाफ मनी-लांड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा है। यह कार्रवाई 9 दिसंबर, 2024 को की गई थी, लेकिन अब इसकी जानकारी सार्वजनिक हुई है।

यह जांच राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) द्वारा दर्ज किए गए FIR पर आधारित है, जिसमें प्रमुख आरोपियों के तौर पर मुकेश मोदी और राहुल मोदी सहित अन्य सहयोगियों पर सोसाइटी के सदस्यों और निवेशकों से बड़ी रकम इकट्ठा करने और पैसे का दुरुपयोग करने के आरोप हैं। आरोप है कि उन्होंने निवेशकों को अत्यधिक लाभ का वादा करके हजारों करोड़ रुपये जमा किए और फिर इन फंड्स को अपने और अपने साथियों के लाभ के लिए विभिन्न कंपनियों, फर्मों और LLPs के जरिए हेराफेरी कर अलग-लग रास्तों से खर्च किया।

जांच एजेंसी के अनुसार अब तक पहचाना गया प्रोसीड ऑफ क्राइम (POC) लगभग ₹3,830.06 करोड़ के करीब है, जो आरोपियों, उनके रिश्तेदारों और संबद्ध कंपनियों/फर्मों के नाम पर चल और अचल संपत्तियों के रूप में इस्तेमाल किया गया है।

इस सीबीआई-पीएलएमए मामले में ED ने एक प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट और एक सप्लीमेंटरी कंप्लेंट भी विशेष PMLA कोर्ट, जयपुर में दर्ज कराई है, जिसमें कुल 139 व्यक्तियों और संगठनों/कंपनियों को आरोपियों के रूप में नामजद किया गया है, और कोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लिया है। जांच अभी भी जारी है और आगे और बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी एक बहु-राज्यीय को-ऑपरेटिव संस्था थी, जिसे आरोप है कि उसने निवेशकों से लाखों रुपये जमा कराए, लेकिन वास्तविक रूप से ये जमा धन कई कंपनियों और फर्मों के माध्यम से वापस निकाले गए और सोसाइटी के सदस्यों को भारी नुकसान हुआ। सोसाइटी नेटवर्क भारत के कई राज्यों में फैला हुआ था और इसमें करोड़ों निवेशकों का पैसा निवेश था।

सोसाइटी के मालिक मुकेश मोदी और राहुल मोदी समेत कई अन्य को पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है और इनके खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाइयां जारी हैं। पिछले वर्षों में ED ने पहले भी ₹2,176 करोड़ से अधिक की संपत्ति को अटैच किया था और अब अतिरिक्त ₹7.72 करोड़ का जुड़ना इस जांच की गंभीरता को दर्शाता है।

जांच एजेंसी अब तक के साक्ष्यों, वित्तीय रिकॉर्ड, निवेश दस्तावेजों और संपत्ति के स्रोतों को खंगाल रही है। कोर्ट ने पहले ही मामले को संज्ञान में ले रखा है, और जबकि कुछ आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं, आगे संभावित और गिरफ्तारी, गिरफ्तारी आदेश या अतिरिक्त जुर्माने की कार्रवाई संभव है।

यह मामला उन बड़े वित्तीय घोटालों में से एक है, जिनमें निवेशकों और आम जनता के धन के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और मनी-लांड्रिंग के आरोप सामने आए हैं, और इसके परिणाम अभी भी जांच और अदालत की प्रक्रिया के अधीन हैं।