भारत ने रचा इतिहास: DRDO ने 800 किमी/घंटा पर स्वदेशी एस्केप सिस्टम का सफल परीक्षण किया
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी एयरक्राफ्ट एस्केप सिस्टम का हाई-स्पीड रॉकेट-स्लेड परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी एयरक्राफ्ट एस्केप सिस्टम का हाई-स्पीड रॉकेट-स्लेड परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह परीक्षण चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (RTRS) सुविधा में 800 किलोमीटर प्रति घंटे की सटीक नियंत्रित गति पर किया गया। इस सफलता से भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास उन्नत स्वदेशी निकासी प्रणाली के पूर्ण परीक्षण की क्षमता है।4bd813,c48d11
परीक्षण में मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण तत्वों का सत्यापन किया गया:
कैनोपी सेवरेंस (विमान के ऊपरी शीशे का सुरक्षित टूटना)
इजेक्शन सीक्वेंसिंग (सीट का बाहर निकलना)
पूर्ण एयरक्रू रिकवरी (पैराशूट के माध्यम से सुरक्षित उतरना)
इस जटिल गतिशील परीक्षण में लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) के अग्रभाग को डुअल स्लेज सिस्टम पर रखा गया। कई ठोस प्रोपेलेंट रॉकेट मोटर्स के चरणबद्ध प्रज्वलन से सटीक गति प्राप्त की गई। एक इंस्ट्रुमेंटेड एंथ्रोपोमॉर्फिक टेस्ट डमी (मानव जैसी डमी) का उपयोग कर पायलट पर पड़ने वाले लोड, मोमेंट और एक्सेलरेशन को रिकॉर्ड किया गया। पूरी प्रक्रिया ऑनबोर्ड और ग्राउंड-बेस्ड कैमरों से कैद की गई।b7e074,0bd76f
यह परीक्षण एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के सहयोग से किया गया। गतिशील इजेक्शन परीक्षण स्थैतिक परीक्षणों (जैसे नेट टेस्ट या जीरो-जीरो टेस्ट) से कहीं अधिक जटिल होते हैं और वास्तविक उड़ान स्थितियों में सिस्टम की प्रभावशीलता का सटीक मूल्यांकन करते हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, भारतीय वायुसेना, ADA, HAL और उद्योग भागीदारों को बधाई दी। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी का महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। DRDO चेयरमैन डॉ. समीर वी कामत ने भी टीम को शुभकामनाएं दीं।
इस उपलब्धि से तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमानों में पायलटों की सुरक्षा और मजबूत होगी, जिससे भारत की रक्षा क्षमता में नया आयाम जुड़ेगा।

