टेलीग्राम पर मिला नौकरी का ऑफर, पहुंच गए दो युवक थाईलैंड फिर क्या....
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के दो युवकों की नौकरी की तलाश उन्हें सीधे साइबर ठगों के नरक जैसे कैंप में ले गई। अक्षय मीणा (23) और शैलेष मीणा (25) को टेलीग्राम पर हाई सैलरी जॉब ऑफर का लालच देकर थाईलैंड ले जाया गया।
झुंझुनूं। राजस्थान के झुंझुनूं जिले के दो युवकों की नौकरी की तलाश उन्हें सीधे साइबर ठगों के नरक जैसे कैंप में ले गई। अक्षय मीणा (23) और शैलेष मीणा (25) को टेलीग्राम पर हाई सैलरी जॉब ऑफर का लालच देकर थाईलैंड ले जाया गया, जहां उन्हें बंधक बनाकर थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया। 22 दिन की कैद के बाद भारत सरकार के हस्तक्षेप से दोनों को 500 अन्य भारतीयों के साथ रेस्क्यू कर स्वदेश लाया गया।
टेलीग्राम पर मिला ‘हाई सैलरी जॉब ऑफर’
दोनों युवकों ने बताया कि उन्हें टेलीग्राम पर “डेटा एंट्री जॉब – 80 हजार से 1.20 लाख रुपये सैलरी” का ऑफर मिला था। एजेंट ने भरोसा दिलाया कि वीजा और टिकट फ्री रहेंगे, बस थाईलैंड पहुंचना होगा। 18 अक्टूबर को दोनों जयपुर से विशेष फ्लाइट लेकर बैंकॉक पहुंचे, जहां से उन्हें बस के जरिए 14 घंटे की यात्रा के बाद म्यांमार बॉर्डर के पास ‘माए सोट’ इलाके में ले जाया गया।
पासपोर्ट छीना, बनाया गया बंधक
थाईलैंड पहुंचते ही दोनों का पासपोर्ट छीन लिया गया और उन्हें एक अवैध साइबर फ्रॉड कैंप में बंद कर दिया गया। कैंप में करीब 500 से अधिक भारतीय युवक कैद थे, जिनसे दिन-रात ऑनलाइन ठगी और क्रिप्टो स्कैम करवाया जाता था। हर व्यक्ति को रोज 50 लोगों को ठगने का टारगेट दिया गया था। अगर कोई टारगेट पूरा नहीं करता, तो उसे बिजली के झटके, लोहे की रॉड से पिटाई और भूखा रखने की सजा दी जाती थी।
विरोध किया तो दी थर्ड डिग्री टॉर्चर
अक्षय मीणा ने बताया “जब हमने काम करने से मना किया तो नग्न करके बिजली के करंट दिए गए। हाथ-पैर बांधकर 10-10 मिनट तक शॉक देते थे। एक लड़के की किडनी फेल हो गई। हमें दिन में एक रोटी और दोपहर में चावल दिया जाता था। अगर टारगेट पूरा नहीं हुआ तो खाना भी छीन लिया जाता।” शैलेष ने कहा कि कैंप के बाहर बमबारी की आवाजें आती थीं। सबको लगता था कि शायद अब कोई जिंदा नहीं बचेगा।
भारत सरकार के हस्तक्षेप से हुआ रेस्क्यू
भारत सरकार और थाईलैंड पुलिस ने मिलकर बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।
7 नवंबर को 500 से ज्यादा भारतीयों को विशेष विमान से भारत लाया गया, जिनमें झुंझुनूं के अक्षय और शैलेष भी शामिल थे। दिल्ली पहुंचने के बाद दोनों को जयपुर लाया गया और साइबर सेल के एसआई भींवाराम ने उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द किया।
अक्षय के पिता रामस्वरूप मीणा ने भावुक होकर कहा “22 दिन तक बेटे का कोई पता नहीं था। हमने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। आज जब बेटा लौटा है, तो ऐसा लगता है जैसे दूसरा जन्म मिला हो।” शैलेष की मां ने कहा “वो कहता था – मां मुझे मार देंगे, अब जिन्दा नहीं लौटूंगा।”
6 महीने में 85 राजस्थान के युवक फंसे
जयपुर साइबर सेल के एसआई भींवाराम के अनुसार, पिछले छह महीनों में राजस्थान के 85 युवक थाईलैंड और म्यांमार के इन फर्जी जॉब कैंपों में फंस चुके हैं। अब तक 62 युवकों को रेस्क्यू किया गया है। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि वे टेलीग्राम, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर आने वाले हाई सैलरी जॉब ऑफर्स पर विश्वास न करें।
युवकों की अपील "कोई भी इस जाल में न फंसे"
अक्षय और शैलेष अब झुंझुनूं में अपने घर लौट आए हैं, लेकिन उनकी आंखों में अभी भी डर और दर्द के निशान साफ झलकते हैं। दोनों ने कहा “हम भारत सरकार और राजस्थान पुलिस का धन्यवाद करते हैं। अब किसी को थाईलैंड या म्यांमार जॉब के नाम पर नहीं जाना चाहिए। वहां नरक है।”

