वागड़ की राजनीति में बड़ा मोड़, पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक?
पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय की कांग्रेस में एंट्री, AICC ने जारी किए आदेश
राजनीति में कहा जाता है— स्थायी कुछ भी नहीं होता, सिवाय बदलाव के।
और इसी बदलाव की ताज़ा मिसाल बने हैं महेंद्रजीत सिंह मालवीया, जिनकी कांग्रेस में वापसी पर अब आधिकारिक मुहर लग चुकी है।
शुक्रवार देर रात दिल्ली से निकला एक पत्र, और राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज़ हो गई। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल द्वारा प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा को लिखे गए इस पत्र में मालवीया की कांग्रेस में वापसी को हरी झंडी दे दी गई।
सबसे अहम बात— इस प्रस्ताव को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सीधी स्वीकृति मिली।
पंचायत चुनाव से पहले क्यों अहम है यह वापसी?
यह मंज़ूरी ऐसे वक्त पर आई है, जब राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव सिर पर हैं। कांग्रेस नेतृत्व अच्छी तरह जानता है कि वागड़ अंचल— खासकर बांसवाड़ा, डूंगरपुर और आसपास के आदिवासी बहुल इलाके— बिना मज़बूत आदिवासी चेहरे के नहीं जीते जा सकते।
मालवीया की वापसी को कांग्रेस का ग्राउंड लेवल स्ट्रेंथनिंग प्लान माना जा रहा है।
जयपुर से दिल्ली तक चली सियासी पटकथा
पिछले रविवार को मालवीया जयपुर पहुंचे।
यहां उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, प्रभारी रंधावा और कई वरिष्ठ नेताओं से बंद कमरे में मुलाकात की।
सूत्रों के मुताबिक, इसी बैठक में मालवीया ने दो टूक कहा—
“कांग्रेस मेरा घर है… 40 साल का रिश्ता है।
भाजपा में मुझे घुटन महसूस हो रही है।”
यही बयान कांग्रेस नेतृत्व तक पहुंचा और मामला सीधे दिल्ली गया।
करीब एक हफ्ते की अंदरूनी चर्चा के बाद शुक्रवार देर रात वापसी की औपचारिक मंज़ूरी मिल गई।
48 घंटे में ACB की रेड और सियासी तापमान
लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी।
वापसी की चर्चाओं के महज़ 48 घंटे बाद—
एसीबी (ACB) की टीम ने मालवीया के
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दो पेट्रोल पंप
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और उनके बेटे के क्रशर प्लांट
पर छापेमारी कर दी।
इस कार्रवाई को मालवीया और उनकी पत्नी रेशम मालवीया (वर्तमान जिला प्रमुख) ने राजनीतिक साजिश बताया।
उनका सीधा आरोप था—
“यह दबाव की राजनीति है।
भाजपा सरकार हमें निशाना बना रही है।”
कांग्रेस का पलटवार: “एजेंसियों का दुरुपयोग”
ACB रेड के बाद कांग्रेस ने खुलकर मोर्चा संभाल लिया।
प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने इसे केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का मामला बताया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि
इस कार्रवाई ने कांग्रेस नेतृत्व को और तेज़ी से फैसला लेने पर मजबूर कर दिया।
यही वजह रही कि मालवीया की वापसी की प्रक्रिया में कोई देरी नहीं की गई।
मालवीया का सियासी सफर: वागड़ की आवाज़
महेंद्रजीत सिंह मालवीया को सिर्फ एक नेता कहना कम होगा।
वे वागड़ की मिट्टी से निकले आदिवासी राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में से एक रहे हैं। वो
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चार बार विधायक
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पूर्व जल संसाधन मंत्री
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आदिवासी समाज का मजबूत नेतृत्व
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2023 में कांग्रेस के टिकट पर बागीदौरा से जीत
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फरवरी 2024 में भाजपा जॉइन
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लोकसभा चुनाव 2024: बांसवाड़ा से हार
लोकसभा हार के बाद मालवीया का भाजपा से मोहभंग साफ दिखने लगा था।
कांग्रेस को क्या मिलेगा मालवीया की वापसी से?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो—
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आदिवासी वोट बैंक में मजबूती
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वागड़ क्षेत्र में कांग्रेस को फिर धार
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पंचायत चुनाव में सीधा फायदा
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भाजपा को मनोवैज्ञानिक झटका
कांग्रेस के लिए यह सिर्फ एक नेता की वापसी नहीं,
बल्कि एक पूरे सामाजिक समीकरण को साधने की रणनीति है।
सूत्रों के अनुसार—
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जल्द ही जयपुर के प्रदेश कार्यालय में औपचारिक जॉइनिंग
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मालवीया को पंचायत चुनाव अभियान में अहम भूमिका
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वागड़ अंचल में कांग्रेस की बड़ी सभाएं


