बीजेपी विधायक और प्रशासन में तकरार, भगवान बिरसा मुंडा और सरदार पटेल के लगे पोस्टर
राजस्थान के श्रीगंगानगर में प्रोटोकॉल विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। 'रन फॉर यूनिटी' कार्यक्रम के दौरान बीजेपी विधायक जयदीप बिहाणी और जिला प्रशासन के बीच हुई तीखी बहस के बाद अब शहर की सड़कों पर होर्डिंग्स नजर आ रहे हैं।
श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर में प्रोटोकॉल विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। 'रन फॉर यूनिटी' कार्यक्रम के दौरान बीजेपी विधायक जयदीप बिहाणी और जिला प्रशासन के बीच हुई तीखी बहस के बाद अब शहर की सड़कों पर होर्डिंग्स नजर आ रहे हैं। इन होर्डिंग्स में जिला प्रशासन पर सरदार वल्लभभाई पटेल और भगवान बिरसा मुंडा का अपमान करने का आरोप लगाया गया है। विधायक बिहाणी और स्थानीय बीजेपी संगठन ने इनकी जिम्मेदारी से इनकार कर दिया है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ये पोस्टर किसने लगवाए।
होर्डिंग्स में क्या लिखा? विवाद की जड़
शहर के प्रमुख चौराहों और सड़क किनारों पर लगे होर्डिंग्स में प्रमुखता से लिखा है: "जिला प्रशासन द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल और भगवान बिरसा मुंडा का अपमान, नहीं सहेगा श्रीगंगानगर।" इसके नीचे हस्ताक्षर के रूप में "समस्त भाजपा कार्यकर्ता" का उल्लेख है। ये होर्डिंग्स प्रशासनिक कार्यक्रम से जुड़े प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर नाराजगी जाहिर करते हैं।
विधायक जयदीप बिहाणी ने स्पष्ट शब्दों में इन होर्डिंग्स से दूरी बना ली। उन्होंने कहा, "मेरे या पार्टी के जिलाध्यक्ष के कहने पर ये होर्डिंग्स नहीं लगाए गए हैं। मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।" वहीं, बीजेपी जिलाध्यक्ष ने दावा किया कि होर्डिंग्स को हटा दिया गया है। स्थानीय संगठन ने भी पोस्टर लगाने की जिम्मेदारी नहीं ली, जिससे रहस्य गहरा गया। प्रशासन ने भी इनकी जांच शुरू कर दी है।
प्रोटोकॉल विवाद की पूरी कहानी: 'रन फॉर यूनिटी' में क्या हुआ?
यह विवाद हाल ही में श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर आयोजित 'रन फॉर यूनिटी' कार्यक्रम से शुरू हुआ, जो राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर सरदार पटेल की जयंती पर रखा गया था। कार्यक्रम में विधायक जयदीप बिहाणी मुख्य अतिथि थे। प्रोटोकॉल के अनुसार, जिला कलेक्टर डॉ. मंजू और एडीएम (प्रशासन) सुभाष चंद्र को मुख्य अतिथि के बाद मंच पर स्थान मिलना था। लेकिन कलेक्टर के देर से पहुंचने और प्रोटोकॉल की अनदेखी से बिहाणी भड़क गए।
मंच पर ही उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई और "चलो यहां से!" कहते हुए कलेक्टर डॉ. मंजू और एडीएम सुभाष चंद्र को कार्यक्रम से बाहर निकाल दिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे पूरा मामला सुर्खियों में आ गया। बिहाणी ने आरोप लगाया कि प्रोटोकॉल का पालन न होने से सरदार पटेल और बिरसा मुंडा जैसे महान व्यक्तियों का अपमान हुआ।
राजनीतिक रंग: बीजेपी कार्यकर्ताओं की नाराजगी या साजिश?
विवाद के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं में प्रशासन के खिलाफ असंतोष की लहर दौड़ गई। होर्डिंग्स को इसी नाराजगी का परिणाम माना जा रहा है, लेकिन पार्टी नेतृत्व के इनकार से सवाल उठे हैं। कुछ स्थानीय कार्यकर्ता इसे "अनधिकृत अभियान" बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे बीजेपी की आंतरिक कलह का संकेत मान रहा है। जिलाध्यक्ष ने कहा, "होर्डिंग्स हटा दिए गए हैं, और पार्टी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।"
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, होर्डिंग्स को जल्द ही हटाने के आदेश दिए गए हैं। जिला पुलिस और नगर निगम संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं कि इन्हें किसने लगवाया। यदि बीजेपी कार्यकर्ताओं का हाथ पाया गया, तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
आगे क्या? तनाव कम करने की कोशिशें
श्रीगंगानगर में यह विवाद राजनीतिक तापमान बढ़ा रहा है। विधायक बिहाणी ने कहा कि वे प्रोटोकॉल का सम्मान चाहते हैं, न कि विवाद। जिला प्रशासन ने भी चुप्पी साध ली है, लेकिन कलेक्टर डॉ. मंजू ने कहा कि सभी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। स्थानीय व्यापारी और नागरिक इस विवाद से चिंतित हैं, क्योंकि इससे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

