EpsteinFiles विवाद: मनमोहन सिंह vs मोदी - विपक्ष के दावों पर सरकार का स्पष्टीकरण, लेकिन सवाल बरकरार

पहले हमारे पास ऐसा प्रधानमंत्री था, जिसका नाम हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड में लिया जाता था (डॉ. मनमोहन सिंह)। अब हमारे पास ऐसा प्रधानमंत्री है, जिसका नाम #EpsteinFiles में एपस्टीन के साथ सामने आ रहा है। क्या जबरदस्त पतन है, मेरे भारत................

EpsteinFiles विवाद: मनमोहन सिंह vs मोदी - विपक्ष के दावों पर सरकार का स्पष्टीकरण, लेकिन सवाल बरकरार

EpsteinFiles विवाद: मनमोहन सिंह vs मोदी - विपक्ष के दावों पर सरकार का

स्पष्टीकरण, लेकिन सवाल बरकरार

मीडिया रिपोर्ट्स में उछाला गया दावा, सोशल मीडिया पर भूचाल

नई दिल्ली – अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा हाल ही में जारी जेफरी एपस्टीन फाइल्स (Epstein Files) ने भारत में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम इन कुख्यात दस्तावेजों में सामने आया है, जबकि पहले के दौर में डॉ. मनमोहन सिंह को हार्वर्ड-ऑक्सफोर्ड जैसे संस्थानों में सम्मानित किया जाता था। यह तुलना तेजी से वायरल हो रही है, लेकिन सरकार ने इसे "बकवास और भ्रामक" बताते हुए खारिज कर दिया है।

क्या है पूरा मामला? अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने 30 लाख से अधिक पन्नों सहित एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज जारी किए, जिनमें ब्रिटेन के प्रिंस एंड्र्यू जैसे बड़े नाम प्रमुखता से हैं। भारत में यह बहस तब भड़की जब कुछ रिपोर्ट्स में PM मोदी का जिक्र होने की बात कही गई।

 एपस्टीन फाइल्स क्या हैं? संक्षिप्त पृष्ठभूमि

जेफरी एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंसर थे, जिन पर नाबालिग लड़कियों की यौन तस्करी के गंभीर आरोप थे। 2019 में उनकी रहस्यमय मौत के बाद उनके नेटवर्क से जुड़े नाम धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। हालिया रिलीज में:

  • 30 लाख+ पन्ने, 2000+ वीडियो, 1.8 लाख तस्वीरें जारी।

  • प्रिंस एंड्र्यू पर नए खुलासे: एपस्टीन के साथ बकिंघम पैलेस में डिनर, रूसी महिला से मिलने का प्रस्ताव।

  • बिल गेट्स समेत अन्य हाई-प्रोफाइल नाम फिर चर्चा में।

भारत से जुड़े संदर्भ में विपक्ष का दावा: PM मोदी का नाम 'एपस्टीन कनेक्शन' में आया

 विपक्ष का दावा: "हार्वर्ड-ऑक्सफोर्ड से एपस्टीन तक पतन"

सोशल मीडिया पोस्ट और विपक्षी नेताओं ने यह तुलना की:

"पहले हमारे पास ऐसा प्रधानमंत्री था, जिसका नाम हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड में लिया जाता था (डॉ. मनमोहन सिंह)। अब हमारे पास ऐसा प्रधानमंत्री है, जिसका नाम #EpsteinFiles में एपस्टीन के साथ सामने आ रहा है। क्या जबरदस्त पतन है, मेरे भारत।"

विपक्ष के उठाए सवाल:

  • प्रधानमंत्री की सलाहकार एपस्टीन से मिले थे क्या?

  • अमेरिकी यात्रा के दौरान 'क्या कार्य सफल हुआ'?

  • एपस्टीन फाइल्स में 'PM Modi' का जिक्र क्यों?

डॉ. मनमोहन सिंह की तारीफ:

  • पूर्व PM को अर्थशास्त्री के रूप में वैश्विक सम्मान – हार्वर्ड, ऑक्सफोर्ड में लेक्चर, RBI गवर्नर से PM तक का सफर।

  • 2008 वैश्विक मंदी में भारत को बचाने का श्रेय।

विरोध: वर्तमान PM को "एपस्टीन कनेक्शन" से जोड़कर राजनीतिक हमला।

 सरकार का स्पष्टीकरण: "फर्जी और भ्रामक प्रचार"

भारत सरकार ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है:

  • विदेश मंत्रालय: "एपस्टीन फाइल्स में PM मोदी का कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कनेक्शन नहीं। यह ईमेल पुराना और संदर्भहीन है। भारत ने इसे खारिज कर दिया।"

  • स्रोत: रिपोर्टेड ईमेल में PM मोदी की इजराइल यात्रा का जिक्र था, लेकिन कोई ठोस लिंक एपस्टीन से नहीं।

  • फैक्ट-चेक: दस्तावेजों में सिर्फ नाम का उल्लेख, कोई आरोप या सबूत नहीं।

सरकार की दलीलें:

  • एपस्टीन फाइल्स में हजारों नाम हैं, लेकिन ज्यादातर संदर्भहीन।

  • विपक्ष राजनीतिक फायदा के लिए इसे भुना रहा है, खासकर बजट 2026 के बाद।

  • PM मोदी को वैश्विक मंचों पर सम्मान: G20, UN, QUAD में नेतृत्व।

 तुलनात्मक विश्लेषण: दो PMs की वैश्विक छवि

पहलू डॉ. मनमोहन सिंह (2004-2014) नरेंद्र मोदी (2014-वर्तमान)
शैक्षिक पृष्ठभूमि ऑक्सफोर्ड (M.Phil), हार्वर्ड लेक्चर  पता नही या गुजरात यूनिवर्सिटी (MA), 
वैश्विक सम्मान अर्थशास्त्री के रूप में जाना जाता G20 शेरपा, QUAD लीडर
विवाद 2G, कोलगेट स्कैम #EpsteinFiles (अफवाहें, खारिज)
मीडिया कवरेज आर्थिक सुधारों पर फोकस एपस्टीन जैसे इंटरनेशनल विवाद

-- मनमोहन सिंह को "साइलेंट PM" कहा गया, लेकिन अर्थव्यवस्था मजबूत की। मोदी को डिप्लोमेटिक स्ट्रेंथ के लिए जाना जाता।

 सोशल मीडिया पर बवाल: #EpsteinFiles ट्रेंडिंग

टॉप पोस्ट्स और रिएक्शन्स:

  • विपक्षी यूजर्स: "मनमोहन जी को सम्मान, मोदी जी को एपस्टीन!" (हजारों रीट्वीट्स)

  • सपोर्टर्स: "फर्जी न्यूज! विपक्ष बजट हारने के बाद बौखलाया।"

  • ट्रेंड: X (Twitter) पर #EpsteinFilesIndia टॉप ट्रेंड।

वायरल पोस्ट उदाहरण: मूल पोस्ट जैसा दावा, जो लाखों इम्प्रेशन्स बटोर चुका।

 मीडिया रिपोर्ट्स का नजरिया

मुख्य रिपोर्ट्स

  • NDTV, BBC Hindi: फाइल्स में प्रिंस एंड्र्यू पर फोकस, भारत का जिक्र सीमित।

  • DW Hindi: "मोदी के नाम पर विवाद, लेकिन सरकार ने स्पष्टीकरण दिया।"

  • Satyahindi: "नए दस्तावेजों से PM मोदी का नाम कैसे आया?"

  • NewsOnAir: "भारत ने एपस्टीन ईमेल को खारिज किया।"

विशेषज्ञों का मत:

  • राजनीतिक विश्लेषक: "यह विपक्ष का डाइवर्सन। असली मुद्दा बजट है।"

  • लीगल एक्सपर्ट: "नाम का उल्लेख संदेह पैदा करता है।"

  सच्चाई क्या है?

  1. एपस्टीन फाइल्स में PM मोदी का सटीक संदर्भ क्या? (सरकार कहती है नगण्य)

  2. विपक्ष के दावों में कितनी सच्चाई? (फिलहाल असमर्थित)

  3. यह राजनीतिक हमला है या सच्चा खुलासा? (बजट टाइमिंग संदिग्ध)

जनता की प्रतिक्रिया: सोशल मीडिया पर ध्रुवीकरण – BJP सपोर्टर्स इसे फेक न्यूज बता रहे, विपक्ष इसे "पतन" का सबूत।