स्वास्थ्य केंद्रों में एंबुलेंस सेवा की गंभीर कमी — सर्वे रिपोर्ट में हुआ खुलासा
जयपुर में राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था पर उठे सवालों के बीच 108 और 104 एंबुलेंस सेवाओं की जांच रिपोर्ट में गंभीर कमियां उजागर हुई हैं। NHM और स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में कई एंबुलेंस तकनीकी रूप से खराब, बिना ऑक्सीजन सिलेंडर और प्राथमिक उपकरणों के पाई गईं। कई जगह EMT की अनुपस्थिति भी सामने आई है, जिससे आपातकालीन सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जयपुर : राजस्थान के सरकारी स्वास्थ्य सेवा ढांचे की जांच में गंभीर कमियों का खुलासा हुआ है, जिसमें विशेष रूप से एंबुलेंस सेवाओं की कमी और उनकी खराब स्थिति सामने आई है। हाल के सर्वे में कई स्वास्थ्य केंद्रों में एंबुलेंस न होने, खराब उपकरणों और अपूर्ण आपातकालीन सेवाओं की बात सामने आई है, जिससे मरीजों की जिंदगी संकट में पड़ सकती है।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग तथा National Health Mission (NHM) द्वारा कराए गए सर्वे और ऑडिट में पाया गया कि सरकार द्वारा संचालित 108 और 104 एंबुलेंस सेवाओं में कई घोर कमजोरियाँ हैं जैसे :
दस फीसदी से अधिक एंबुलेंस में तकनीकी खराबियाँ हैं।
कुछ एंबुलेंस में तो ऑक्सीजन सिलेंडर और प्राथमिक चिकित्सा उपकरण तक नहीं हैं।
कई वाहनों में एयर कंडीशनिंग न होने, खराब टायर और आवश्यक दवाइयों का अभाव पाया गया।
कुछ एंबुलेंस में EMT भी नहीं थे, जो रोगियों को प्राथमिक जीवन सहायक सेवा प्रदान कर सकें।
NHM ने ऐसे CMHO अधिकारियों को नोटिस भेजा है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में एंबुलेंस निरीक्षण रिपोर्ट समय पर नहीं भेजी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रदेश के अधिकांश जिलों में एंबुलेंस की निगरानी और रख-रखाव प्रणाली पर्याप्त नहीं है।
राज्य में कुल लगभग 960, 108 एंबुलेंस हैं, लेकिन उनमें से कम से कम 88 में तकनीकी दोष पाया गया और 104 जननी एक्सप्रेस सेवा के तहत भी कई वाहनों में कमी पाई गई। इन सभी पर स्वास्थ्य विभाग ने सेवा प्रदाताओं से जवाब मांगा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एंबुलेंस सेवाओं की यह स्थिति प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों तक मरीज को समय पर पहुँचाने में यह सेवा सबसे महत्वपूर्ण होती है, खासकर आपात स्थितियों जैसे दिल का दौरा, गंभीर चोट के दौरान। राज्यों की मानक जरूरतों के मुताबिक एंबुलेंस सेवाओं का उपलब्ध होना आवश्यक है, लेकिन वर्तमान सर्वे रिपोर्ट में यह बुनियादी आवश्यक सेवा भी कई जगह अनुपलब्ध या दोषपूर्ण पायी गयी।
ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में रहने वाले मरीजों को एंबुलेंस न मिलने या खराब एंबुलेंस मिलने के कारण गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सीय आपात स्थितियों में मरीजों को निजी वाहनों से अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे जानलेवा परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
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