लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती आज, अखंड भारत के कुशल शिल्पी और राष्ट्रीय एकता के अग्रदूत
आज पूरे देश में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती बड़े हर्षोल्लास और सम्मान के साथ मनाई जा रही है। भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री रहे सरदार पटेल को “अखंड भारत के शिल्पी” और “राष्ट्रीय एकता के निर्माता” के रूप में याद किया जाता है।
नई दिल्ली। आज पूरे देश में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती बड़े हर्षोल्लास और सम्मान के साथ मनाई जा रही है। भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री रहे सरदार पटेल को “अखंड भारत के शिल्पी” और “राष्ट्रीय एकता के निर्माता” के रूप में याद किया जाता है।

सरदार पटेल का जन्म
सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को नाडियाड, गुजरात में हुआ था। वे अपने पिता झवेरभाई पटेल एवं माता लाड़बाई की चौथी संतान थे। सोमभाई, नरसीभाई और विट्ठलदास झवेरभाई पटेल उनके अग्रज थे। पारम्परिक हिंदू माहौल में पले-बढ़े सरदार पटेल ने करमसद में प्राथमिक विद्यालय और पेटलाद स्थित उच्च विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की, लेकिन उन्होंने अधिकांश ज्ञान स्वाध्याय से ही अर्जित किया। 16 वर्ष की आयु में उनका विवाह हो गया। 22 साल की उम्र में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की और ज़िला अधिवक्ता की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए, जिससे उन्हें वक़ालत करने की अनुमति मिली। सन 1900 में उन्होंने गोधरा में स्वतंत्र ज़िला अधिवक्ता कार्यालय की स्थापना की और दो साल बाद खेड़ा ज़िले के बोरसद नामक स्थान पर चले गए।

एकता के प्रतीक
भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम सुनते ही दिल में गर्व और जोश दोनों जाग उठते हैं। उन्होंने अपने साहस, मेहनत और दूरदृष्टि से देश को एक सूत्र में बांधा। सरदार पटेल ने हमें सिखाया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मुश्किल रास्ता आसान बन जाता है। उनके विचार हर उस इंसान के लिए प्रेरणा हैं जो देश, समाज और अपने जीवन में कुछ बड़ा करना चाहता है। आज भी उनके अनमोल विचार लोगों में एकता, हिम्मत और देशभक्ति की भावना जगाते हैं.
565 रियासतों का किया एकीकरण
सरदार पटेल ने भारत की स्वतंत्रता के बाद छोटी-बड़ी 565 रियासतों का भारत संघ में विलय कराकर एक अखंड और एकजुट राष्ट्र की नींव रखी थी। उन्होंने जिस दूरदृष्टि और दृढ़ निश्चय से यह कार्य किया, वह आज भी भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक माना जाता है।
महात्मा गांधी ने सरदार पटेल के कर्मनिष्ठ व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा था — “नेहरू विचारक हैं, और सरदार कार्य करने वाले।”

गांधी जी से भेंट
गुजरात के खेड़ा सत्याग्रह के दौरान सरदार पटेल पहली बार गांधीजी के निकट आए। उस आंदोलन ने न केवल अंग्रेजी शासन के खिलाफ किसानों को एकजुट किया बल्कि सरदार पटेल की राजनीतिक यात्रा की भी शुरुआत की। इसी सत्याग्रह से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में किसानों की शक्ति का उदय हुआ।
राष्ट्रीय नेता की ख्याति
खेड़ा क्षेत्र के सूखे से पीड़ित किसानों के लिए पटेल ने कर माफी की मांग उठाई, और उनके नेतृत्व में हुए सत्याग्रह के आगे ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा। किसानों को करों में राहत मिली और इस संघर्ष ने पटेल को राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित किया। सरदार पटेल ने जीवन भर देश की एकता और स्वतंत्रता के लिए कार्य किया। उनका राष्ट्र के प्रति समर्पण, कठोर निर्णय लेने की क्षमता और अदम्य साहस आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है।

आज का दिन राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है — यह सरदार पटेल की उस अद्भुत दृष्टि और त्याग को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने विविधताओं से भरे भारत को एक सूत्र में बांधा।

