पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि आज, देश ने 41 साल पहले खोया ‘आयरन लेडी’ को

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री एवं आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की पुत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की 41वीं पुण्यतिथि है। इस गमगीन मौके पर पूरा देश उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि आज, देश ने 41 साल पहले खोया ‘आयरन लेडी’ को

नई दिल्ली। आज भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री एवं आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की पुत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की 41वीं पुण्यतिथि है। इस गमगीन मौके पर पूरा देश उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है। इंदिरा गांधी भारतीय राजनीति की वह शख्सियत थीं जिन्होंने दृढ़ नेतृत्व, अडिग निश्चय और दूरदृष्टि से भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। वे भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और कमला नेहरू की पुत्री थीं। बचपन से ही इंदिरा गांधी स्वतंत्रता संग्राम के वातावरण में पली-बढ़ीं। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के कई चरणों को स्वयं देखा और देश के प्रति समर्पण का भाव उनमें बचपन से ही विकसित हुआ।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत

इंदिरा गांधी का सक्रिय राजनीतिक जीवन कांग्रेस पार्टी से जुड़ा रहा। 1959 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं। 1966 में लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उनका कार्यकाल भारतीय राजनीति में निर्णायक मोड़ साबित हुआ।

शक्तिशाली नेतृत्व और ऐतिहासिक निर्णय

प्रधानमंत्री के रूप में इंदिरा गांधी ने कई साहसिक निर्णय लिए। उनके नेतृत्व में 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना ने ऐतिहासिक विजय प्राप्त की और इसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ। यह उपलब्धि इंदिरा गांधी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “आयरन लेडी ऑफ इंडिया” के रूप में प्रतिष्ठित करने वाली साबित हुई।

इंदिरा गांधी ने हरित क्रांति की शुरुआत कर भारत को कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने गरीबों के उत्थान के लिए “गरीबी हटाओ” का नारा दिया और सामाजिक न्याय की दिशा में अनेक कदम उठाए।

राष्ट्र की एकता की रक्षक

देश की एकता और अखंडता बनाए रखने में इंदिरा गांधी का योगदान अतुलनीय रहा। उन्होंने आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ कठोर रुख अपनाया। उनके साहसिक निर्णयों ने भारत को कठिन समय में भी मजबूती से खड़ा रखा।

आयरन लेडी का आखिरी भाषण

इंदिरा गांधी ने अपना आखिरी भाषण 30 अक्तूबर 1984 को भुवनेश्वर में दिया था। इस भाषण में उन्होंने जो बातें कहीं उससे ऐसा लगता है जैसे कि उनके साथ कुछ अनहोनी घटने वाली थी। इंदिरा ने कहा था मैं आज यहां हूं, हो सकता है कि कल मैं यहां न हूं। उन्होंने आगे अपने भाषण में कहा कि अगर मैं जीवित नहीं रही तो मेरे खून का एक-एक कतरा भारत को मजबूत करेगा।

दरअसल, 30 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी ने बिल्कुल लीक से हटकर अपना भाषण दिया। इंदिरा का भाषण उनके सूचना सलाहकार एचवाई शारदा ने लिखा था लेकिन इंदिरा ने उससे हटकर कुछ अलग ही भाषण दिया। इंदिरा एचवाई शारदा  का लिखा भाषण छोड़कर खुद से ही बोलने लगीं।

मै आज हूं कल न रहूं...

इंदिरा गांधी ने अपने भाषण में कहा- 'मैं आज यहां हूं। कल शायद यहां न रहूं। मुझे चिंता नहीं मैं रहूं या न रहूं। मेरा लंबा जीवन रहा है और मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने अपना पूरा जीवन अपने लोगों की सेवा में बिताया है। मैं अपनी आखिरी सांस तक ऐसा करती रहूंगी और जब मैं मरूंगी तो मेरे ख़ून का एक-एक क़तरा भारत को मजबूत करने में लगेगा।"

 कैसे हुई हत्या?

अगले दिन 31 अक्टूबर को वह सुबह करीब 9 बजे इंदिरा गांधी को विदेश से आए डेलिगेशन से मिलना था। वे डॉक्यूमेंट्री के लिए इंदिरा गांधी का इंटरव्यू लेना चाहते थे। इंदिरा गांधी अपने आवास से बाहर निकलीं और कुछ दूर चलने पर इंदिरा वहां पहुंची जहां से एक सफदरजंग रोड और एक अकबर रोड एक गेट के जरिए जुड़ते हैं। गेट के पास सब इंस्पेक्टर बेअंत सिंह और कॉंस्टेबल सतवंत सिंह ड्यूटी पर तैनात थे।

नमस्ते... फिर ताबड़तोड़ फायरिंग

दोनों ने हाथ जोड़कर इंदिरा गांधी को नमस्ते किया। इंदिरा गांधी ने भी दोनों का अभिवादन स्वीकार किया। इस बीच बेअंत सिंह हरकत में आया और उसने अपनी सरकारी रिवॉल्वर निकाल कर इंदिरा गांधी पर फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगते ही इंदिरा जमीन पर गिर पड़ीं। इसके बाद सतवंत सिंह अपनी स्टेनगन से इंदिरा गांधी पर फायरिंग करने लगा। उसने अपनी पूरी स्टेनगन खाली कर दी। इंदिरा गांधी का पूरा शरीर गोलियों से छलनी हो चुका था। उन्हें तुरंत दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।