विमान हादसों ने ली कई चर्चित हस्तियों की जान!

भारत के इतिहास में कई ऐसे विमान और हेलीकॉप्टर हादसे हुए हैं, जिन्होंने देश को गहरे सदमे में डाल दिया। इन दुर्घटनाओं में संजय गांधी, माधवराव सिंधिया, जी.एम.सी. बालयोगी, डॉ. होमी भाभा और जनरल बिपिन रावत जैसी महान हस्तियों की जान गई। हालिया घटनाओं में अजित पवार को लेकर सामने आई खबरों ने फिर से VIP विमान सुरक्षा, तकनीकी मानकों और उड़ान प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह रिपोर्ट भारत में हुए प्रमुख VIP विमान हादसों और उनसे जुड़े सबक पर प्रकाश डालती है।

विमान हादसों ने ली कई चर्चित हस्तियों की जान!

विमान और हेलीकॉप्टर हादसे न केवल तकनीकी विफलताओं की कहानियां होते हैं, बल्कि कई बार यह देश को झकझोर देने वाली ऐसी त्रासदियां बन जाते हैं, जिनमें राजनीति, सेना, विज्ञान और राष्ट्रीय नेतृत्व से जुड़ी बड़ी हस्तियों की जान चली जाती है। भारत के इतिहास में भी कई ऐसे दर्दनाक विमान हादसे दर्ज हैं, जिनमें देश ने अपने प्रभावशाली नेताओं और महान विभूतियों को खोया है।

सबसे चर्चित मामलों में पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय गांधी का नाम आता है, जिनकी 1980 में एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद माधवराव सिंधिया, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रहे, 2001 में एक विमान हादसे का शिकार हुए। संसद के तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जी.एम.सी. बालयोगी का 2002 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन हुआ, जिसने पूरे राजनीतिक जगत को स्तब्ध कर दिया।

वर्ष 2021 में देश को एक और बड़ा झटका तब लगा, जब भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और अन्य सैन्य अधिकारी तमिलनाडु में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश में शहीद हो गए।

यह हादसा भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे दुखद अध्यायों में गिना जाता है। इससे पहले, भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा की 1966 में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हुई थी, जिसे आज भी रहस्यमयी हादसों में शामिल किया जाता है।

राजनीतिक इतिहास में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का नाम भी उन नेताओं में शामिल किया जाता है, जिनका निधन अहमदाबाद से जुड़ी एक विमान दुर्घटना से जोड़ा जाता है।

वहीं हालिया घटनाक्रमों में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को लेकर भी विमान हादसे से जुड़ी खबरें चर्चा में रही हैं, जिन पर आधिकारिक पुष्टि और जांच की प्रक्रिया को अहम माना जा रहा है।

इन सभी हादसों ने यह सवाल बार-बार खड़ा किया है कि वीआईपी विमान सुरक्षा, तकनीकी मानकों और उड़ान प्रबंधन को लेकर और कितनी सख्ती की जरूरत है। विमान दुर्घटनाओं में हुई इन मौतों ने न केवल परिवारों को अपूरणीय क्षति पहुंचाई, बल्कि देश को नेतृत्व, अनुभव और भविष्य की संभावनाओं से भी वंचित किया।