मुक्तिधाम से फिर गायब हुई अस्थियां, 15 दिन में तीसरी घटना से लोगों में आक्रोश

राजस्थान के कोटा जिले के रामगंजमंडी क्षेत्र का मुक्तिधाम इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। यहां से मृतकों की अस्थियां और राख गायब होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बीते 15 दिनों में यह तीसरी बार है जब अंतिम संस्कार के बाद अस्थियां लापता हुई हैं।

मुक्तिधाम से फिर गायब हुई अस्थियां, 15 दिन में तीसरी घटना से लोगों में आक्रोश

राजस्थान के कोटा जिले के रामगंजमंडी क्षेत्र का मुक्तिधाम इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। यहां से मृतकों की अस्थियां और राख गायब होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बीते 15 दिनों में यह तीसरी बार है जब अंतिम संस्कार के बाद अस्थियां लापता हुई हैं, जिससे इलाके में भय, आक्रोश और आस्था के टूटने का माहौल बन गया है।

बुजुर्ग महिला लीलाबाई की अस्थियां हुईं लापता

4 जनवरी को रामगंजमंडी मुक्तिधाम में बुजुर्ग महिला लीलाबाई का अंतिम संस्कार किया गया था। परंपरा के अनुसार परिवार के सदस्य तीसरे दिन अस्थियां एकत्र करने पहुंचे, लेकिन चिता स्थल पूरी तरह खाली मिला। न तो अस्थियां थीं और न ही राख का कोई निशान। इस दृश्य को देखकर परिजन स्तब्ध रह गए।

परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक आस्था और भावनाओं पर गहरा आघात है। उन्होंने इसे बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए रामगंजमंडी थाने में शिकायत दर्ज कराई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

पुलिस ने शुरू की जांच

शिकायत मिलते ही डिप्टी घनश्याम मीणा और थानाधिकारी संदीप कुमार शर्मा मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने मुक्तिधाम का निरीक्षण किया और मामले की जांच शुरू कर दी है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है और संभावित कारणों को खंगाला जा रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

लगातार हो रही घटनाओं से स्थानीय लोगों में रोष है। उनका कहना है कि मुक्तिधाम में न तो कोई चौकीदार है और न ही कोई सुरक्षा व्यवस्था। रात के समय यह स्थान पूरी तरह असुरक्षित रहता है, जिससे असामाजिक तत्व ऐसी हरकतों को अंजाम दे रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मुक्तिधाम में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे और चौकीदार की नियुक्ति की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

आस्था पर चोट, प्रशासन पर दबाव

जहां लोग अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने आते हैं, वहां इस तरह की घटनाएं समाज की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर रही हैं। अब देखना यह है कि पुलिस जांच कब तक नतीजे तक पहुंचती है और क्या प्रशासन लोगों का टूटा विश्वास वापस दिला पाएगा।