रणथंभौर से मुकुंदरा रवाना हुआ टाइगर टी-2408, एनटीसीए की अनुमति के बाद किया गया ट्रेंकुलाइज

रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या के बीच वन विभाग ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बाघिन टी-93 के शावक टाइगर टी-2408 को मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (कोटा) शिफ्ट करने की प्रक्रिया के तहत खंडार क्षेत्र के नॉन ट्यूरिज्म जोन लाहपुर से ट्रेंकुलाइज किया गया।

रणथंभौर से मुकुंदरा रवाना हुआ टाइगर टी-2408, एनटीसीए की अनुमति के बाद किया गया ट्रेंकुलाइज

सवाई माधोपुर। रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या के बीच वन विभाग ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बाघिन टी-93 के शावक टाइगर टी-2408 को मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (कोटा) शिफ्ट करने की प्रक्रिया के तहत खंडार क्षेत्र के नॉन ट्यूरिज्म जोन लाहपुर से ट्रेंकुलाइज किया गया। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से अनुमति मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।

वन विभाग की विशेषज्ञ टीम ने तय मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) और पशु कल्याण के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए बाघ को सुरक्षित रूप से ट्रेंकुलाइज किया। इसके बाद टीम टाइगर टी-2408 को लेकर मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के लिए रवाना हो गई।

बाघों की संख्या बढ़ाने में रणथंभौर की बड़ी भूमिका

रणथंभौर टाइगर रिजर्व से अन्य टाइगर रिजर्व में बाघों की शिफ्टिंग का ही नतीजा है कि आज राजस्थान में बाघों की संख्या करीब 150 तक पहुंच गई है। इनमें से लगभग आधी आबादी अकेले रणथंभौर में पाई जाती है। अब तक यहां से करीब 24 बाघ-बाघिन अन्य टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किए जा चुके हैं। हालांकि इनमें से 13 बाघों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद रणथंभौर प्रदेश में बाघ संरक्षण का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।

मुकुंदरा में टाइगर मूवमेंट पर रहेगी कड़ी नजर

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस शिफ्टिंग का मुख्य उद्देश्य रणथंभौर पर बाघों के बढ़ते दबाव को कम करना, मुकुंदरा जैसे नए क्षेत्रों में बाघ आबादी को मजबूत करना और आनुवंशिक विविधता को बनाए रखना है। बाघ के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में छोड़ने के बाद भी उसके मूवमेंट पर सख्त नजर रखी जाएगी।

वन विभाग, पशु चिकित्सकों और लॉजिस्टिक स्टाफ के समन्वित प्रयासों से यह पूरा अभियान सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।