बैंकों के 3.50 करोड़ रुपये एक गलती से बने रद्दी, हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत
राजस्थान में केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCB) और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) को बड़ा झटका लगा है।
जयपुर। राजस्थान में केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCB) और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) को बड़ा झटका लगा है। नोटबंदी के दौरान जमा हुए 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के करीब 3.50 करोड़ रुपये अब पूरी तरह रद्दी माने जाएंगे। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के प्रतिबंध को वैध ठहराते हुए इससे जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
RBI के प्रतिबंध को बताया वैध
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि 17 नवंबर 2016 को जारी किया गया आरबीआई का परिपत्र पूरी तरह वैधानिक, तर्कसंगत और सार्वजनिक हित में था। कोर्ट ने कहा कि नोटबंदी के नौ साल बाद पुराने नोटों को बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
बैंकों की दलीलें नहीं आईं काम
याचिकाकर्ता बैंकों ने दलील दी थी कि नोटबंदी के समय उनके पास बड़ी मात्रा में पुराने नोट जमा थे और तकनीकी व प्रशासनिक कारणों से वे समय पर उन्हें जमा या बदल नहीं पाए। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और आरबीआई के फैसले को बरकरार रखा।
अब नहीं बदले जाएंगे पुराने नोट
इस फैसले के बाद राजस्थान के सहकारी बैंकों और PACS में रखे 3.50 करोड़ रुपये के पुराने नोट अब पूरी तरह बेकार (रद्दी) हो गए हैं। कोर्ट के इस निर्णय से साफ हो गया है कि नोटबंदी से जुड़े मामलों में समयसीमा और आरबीआई के निर्देश सर्वोपरि हैं।

