अंता उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला तय, नरेश मीणा को मिला पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल का समर्थन

राजस्थान में अगले विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम उठने जा रहा है अंता सीट के उपचुनाव को लेकर। यहां इस बार मुकाबला सिर्फ दो-तरफा नहीं रहने वाला बल्कि त्रिकोणीय संघर्ष के रूप में सामने आ रहा।

अंता उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला तय, नरेश मीणा को मिला पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल का समर्थन

जयपुर। राजस्थान में अगले विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम उठने जा रहा है अंता सीट के उपचुनाव को लेकर। यहां इस बार मुकाबला सिर्फ दो-तरफा नहीं रहने वाला बल्कि त्रिकोणीय संघर्ष के रूप में सामने आ रहा है, क्योंकि कांग्रेस-भाजपा के मुकाबले अब तीसरे ध्रुव के तौर पर नज़र आ रहे हैं नरेश मीणा जिसे आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल का खुला समर्थन मिल गया है।

क्या है पूरा मामला?

अंता विधानसभा सीट पर उपचुनाव 11 नवंबर 2025 को होना निर्धारित है। इस सीट पर पहले भाजपा के विधायक कंवरलाल मीणा को आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद सदस्यता खोनी पड़ी थी, जिससे यह सीट खाली हुई। कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के रूप में अनुभवी नेता प्रमोद जैन भाया को उतारा है। भाजपा ने अपनी तैयारी में जुटी है और पिछले दिनों बागी उम्मीदवार की नाम-वापसी ने पार्टी को राहत दी है।

 नरेश मीणा और केजरीवाल का कदम

कांग्रेस छोड़कर निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ रहे नरेश मीणा ने सोशल मीडिया पर AAP से समर्थन की मांग की थी। इसके तुरंत बाद AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा: “नरेश जी, आम आदमी पार्टी पूरी तरह आपके साथ है।” इस समर्थन के बाद नरेश मीणा अब कांग्रेस-भाजपा दोनों के लिए चुनौती बन गए हैं।

 क्यों ‘त्रिकोणीय मुकाबला’ हुआ?

इस उपचुनाव में अब सिर्फ भाजपा और कांग्रेस का ही नहीं बल्कि एक तीसरा ध्रुव जुड़ गया है — अर्थात् नरेश मीणा का। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मीणा की एंट्री और AAP-समर्थन ने पारंपरिक वोट बंटवारे को बदलने की संभावना पैदा कर दी है — जिससे भाजपा-कांग्रेस दोनों को खतरा है। क्षेत्र में मीणा-माली-धाकड़ जैसे समाजों की संख्या अच्छी है और मीणा का स्थानीय प्रचार जोर-शोर से चल रहा है।

 पिछली बार AAP को मिले थे 1,334 वोट

दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में AAP ने इस क्षेत्र में लगभग 1,334 वोट हासिल किए थे। यह संख्या बहुत अधिक नहीं थी, लेकिन अब केजरीवाल-समर्थन मिलने के बाद यह पार्टी के लिए एक बेहतर अवसर बन सकती है।