ट्रोमा सेंटर में इमरजेंसी सेवा बनी मजाक, घर से पर्चा भर्ती पर लगेगी रोक
राजधानी जयपुर स्थित SMS अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में “इमरजेंसी सेवा” के नाम पर चल रही अनियमितताओं का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रशासन ने माना है कि ट्रोमा सेंटर, जो विशुद्ध रूप से इमरजेंसी मरीजों के लिए स्थापित किया गया है।
जयपुर। राजधानी जयपुर स्थित SMS अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में “इमरजेंसी सेवा” के नाम पर चल रही अनियमितताओं का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रशासन ने माना है कि ट्रोमा सेंटर, जो विशुद्ध रूप से इमरजेंसी मरीजों के लिए स्थापित किया गया है, वहां अब घरों पर सशुल्क परामर्श लेकर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने घर से “पर्चा भर्ती” और नॉन-ट्रोमा केसों की भर्ती पर रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
ट्रोमा सेंटर का उद्देश्य और मौजूदा गड़बड़ी
SMS अस्पताल का ट्रोमा सेंटर राज्य का सबसे बड़ा इमरजेंसी मेडिकल यूनिट है, जहां न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक और CTVS विभाग सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। इसका उद्देश्य केवल गंभीर दुर्घटनाओं और आपातकालीन मरीजों को त्वरित चिकित्सा देना है। लेकिन अब यह खुलासा हुआ है कि कई चिकित्सक घरों पर सशुल्क परामर्श देकर मरीजों को सीधे ट्रोमा सेंटर में भर्ती कर रहे हैं। ऐसे मरीजों का न तो ट्रोमा या MLC से कोई संबंध होता है, न ही वे इमरजेंसी श्रेणी में आते हैं।
प्राचार्य की अध्यक्षता में हुई बैठक
पिछले दिनों SMS मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी की अध्यक्षता में ट्रोमा सेंटर को लेकर बैठक हुई। बैठक में ट्रोमा प्रभारी डॉ. बी.एल. यादव ने इमरजेंसी में हो रही “पर्चा भर्ती” की अनियमितता पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि “कई मरीज जिन्हें ट्रोमा की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, उन्हें घर पर पर्चा लिखकर भर्ती किया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है।”
एक-दो दिन में आदेश जारी
सूत्रों के अनुसार, ट्रोमा सेंटर प्रशासन ने अब इस व्यवस्था पर कड़ाई से रोक लगाने की तैयारी कर ली है। संभावना है कि एक-दो दिन में औपचारिक आदेश जारी कर दिए जाएंगे, जिसके बाद घर से “पर्चा भर्ती” पूरी तरह बंद होगी। नॉन-ट्रोमा और नॉन-MLC मरीजों को मुख्य इमरजेंसी में भर्ती किया जाएगा।
ट्रोमा सेवा का “सिस्टम सुधार” मिशन
प्राचार्य डॉ. माहेश्वरी ने संकेत दिया है कि ट्रोमा सेंटर में इमरजेंसी सेवा को पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए जल्द नई गाइडलाइन लागू की जाएगी। इसमें भर्ती की मॉनिटरिंग, डॉक्टरों की जवाबदेही, और नॉन-ट्रोमा केसों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया को सख्ती से लागू करने की बात कही गई है।
मरीजों की सुरक्षा ही प्राथमिकता
डॉ. बी.एल. यादव के अनुसार, “ट्रॉमा सेंटर में केवल वे ही मरीज भर्ती किए जाएंगे जो गंभीर दुर्घटना या आपात स्थिति में हों। यह सेंटर किसी भी निजी या रेफरल भर्ती के लिए नहीं है।” उन्होंने कहा कि नए आदेश लागू होने के बाद इमरजेंसी मरीजों को तुरंत उपचार मिल सकेगा और संसाधनों का सही उपयोग हो सकेगा।

