निजी प्रैक्टिस बैन के खिलाफ अधीक्षकों का विरोध चरम पर, हॉस्पिटल के अधीक्षकों ने सामूहिक दिए इस्तीफे  

राजस्थान सरकार के मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल्स और हॉस्पिटलों के अधीक्षकों पर निजी प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आदेशों के खिलाफ विरोध की लहर तेज हो गई है। सोमवार दोपहर सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज (SMS) से संबद्ध विभिन्न हॉस्पिटलों के अधीक्षकों ने सामूहिक रूप से प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी को इस्तीफे की पेशकश की।

निजी प्रैक्टिस बैन के खिलाफ अधीक्षकों का विरोध चरम पर, हॉस्पिटल के अधीक्षकों ने सामूहिक दिए इस्तीफे  

जयपुर। राजस्थान सरकार के मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल्स और हॉस्पिटलों के अधीक्षकों पर निजी प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आदेशों के खिलाफ विरोध की लहर तेज हो गई है। सोमवार दोपहर सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज (SMS) से संबद्ध विभिन्न हॉस्पिटलों के अधीक्षकों ने सामूहिक रूप से प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी को इस्तीफे की पेशकश की। यह कदम सरकार के फैसले को "एकतरफा और अनियमित" बताते हुए उठाया गया। अधीक्षकों ने प्रिंसिपल के चैंबर में चर्चा के बाद अपना इस्तीफा पत्र और ज्ञापन सौंपा, तथा हेल्थ मिनिस्टर गजेंद्र सिंह शेखावत से मिलने के लिए रवाना हो गए।

विरोध की पूरी कहानी: एकतरफा आदेश से भड़का आक्रोश

राजस्थान सरकार ने 13-14 नवंबर को जारी नई गाइडलाइंस के तहत सरकारी मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल्स, कंट्रोलर्स और संबद्ध हॉस्पिटलों के अधीक्षकों को निजी प्रैक्टिस से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया। मकसद बताया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता बढ़ाने और प्रशासनिक भूमिकाओं पर पूर्ण समर्पण सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी है। इन पदों पर चयनित अधिकारियों को अकादमिक कर्तव्यों पर भी केवल एक-चौथाई समय ही देना होगा, और वे विभागाध्यक्ष या यूनिट हेड नहीं बन सकेंगे। आवेदकों की अधिकतम आयु सीमा 57 वर्ष निर्धारित की गई है, तथा चयन प्रक्रिया में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति इंटरव्यू लेगी।

मेडिकल एजुकेशन सेक्रेटरी अम्बरीश कुमार ने कहा था कि बढ़ती मांगों के बीच कुशल प्रशासकों की जरूरत है, जो निजी प्रैक्टिस की "भटकाव" से मुक्त हों। लेकिन डॉक्टर समुदाय इसे "अचानक और विचार-विमर्श रहित" मान रहा है। विरोध कर रहे अधीक्षकों ने आरोप लगाया कि यह आदेश बिना किसी पूर्व चर्चा या विशेषज्ञों की राय के जारी किया गया, जिसमें कई "अनियमितताएं" हैं। उनका कहना है कि निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध से वित्तीय हानि के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा, क्योंकि कई डॉक्टर इसी आय से प्रेरित होकर सरकारी सेवा देते हैं।

सामूहिक इस्तीफे की पेशकश: SMS हॉस्पिटल में ड्रामा

सोमवार दोपहर करीब 2 बजे जे.के. लोन हॉस्पिटल के आर.एम. सेहरा, सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय की अधीक्षक डॉ. आशा वर्मा, सैटेलाइट हॉस्पिटल सेठी कॉलोनी के गोवर्धन मीणा, गणगौरी हॉस्पिटल के डॉ. लिनेश्वर हर्षवर्धन समेत अन्य संबद्ध हॉस्पिटलों के अधीक्षक SMS हॉस्पिटल पहुंचे। सभी ने अपने इस्तीफा पत्र हाथों में थामे प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी के चैंबर में प्रवेश किया।

चैंबर में करीब आधे घंटे चली चर्चा में अधीक्षकों ने आदेश की कमियों पर जोर दिया। प्रिंसिपल माहेश्वरी ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन सभी ने एकजुट होकर इस्तीफे की पेशकश की। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से लिखा गया: "यह आदेश स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करेगा और डॉक्टरों के मनोबल को तोड़ेगा। बिना संवाद के लिए हम अपना इस्तीफा सौंप रहे हैं।" प्रिंसिपल ने पत्र स्वीकार किए, लेकिन इस्तीफे को तत्काल स्वीकृत करने से इनकार कर दिया।

इसके बाद अधीक्षक दल हेल्थ मिनिस्टर गजेंद्र सिंह शेखावत से मिलने के लिए मंत्रालय रवाना हो गया। उन्होंने कहा, "हम सरकार से अपील करते हैं कि इस फैसले पर पुनर्विचार हो। अन्यथा, स्वास्थ्य व्यवस्था ठप हो जाएगी।"

संभावित प्रभाव: स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट?

SMS मेडिकल कॉलेज राजस्थान का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, जहां 250 MBBS सीटें, 432 PG कोर्स और 89 सुपर-स्पेशलाइजेशन कोर्स उपलब्ध हैं। संबद्ध हॉस्पिटलों में जे.के. लोन (श्वसन रोग), गणगौरी (महिला एवं शिशु), सांगानेरी गेट (महिला चिकित्सालय) आदि शामिल हैं, जो लाखों मरीजों को सेवा देते हैं। अधीक्षकों का सामूहिक विरोध यदि बढ़ा, तो प्रशासनिक खलल पड़ सकता है। डॉक्टर संगठनों ने चेतावनी दी है कि यह कदम पूरे राज्य के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र को प्रभावित करेगा।

राज्य सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार मिनिस्टर शेखावत से मिलने के बाद बैठक बुलाई जा सकती है। विपक्ष ने इसे "डॉक्टरों के साथ दुश्मनी" करार दिया है।

डॉक्टर समुदाय की मांगें

  • आदेश पर पुनर्विचार और विशेषज्ञों से परामर्श।
  • निजी प्रैक्टिस पर आंशिक छूट, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए।
  • वेतन वृद्धि और प्रोत्साहन, ताकि सरकारी सेवा आकर्षक बने।
  • तत्काल संवाद बैठक।

यह विवाद राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग में सुधारों की दिशा में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। यदि अधीक्षकों के इस्तीफे स्वीकार हुए, तो नई नियुक्तियां और प्रशिक्षण में महीनों लग सकते हैं।