HC की सरकार को फटकार, कागजों पर नहीं जमीन पर दिखे काम- 5 लाख में कैसे होगी स्कूलों की मरम्मत?
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की जर्जर स्थिति को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि सरकार सिर्फ कागजों में योजनाएं न बनाए, बल्कि धरातल पर ठोस काम करके दिखाए।
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की जर्जर स्थिति को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि सरकार सिर्फ कागजों में योजनाएं न बनाए, बल्कि धरातल पर ठोस काम करके दिखाए। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर 5 लाख रुपये में किसी जर्जर स्कूल की मरम्मत कैसे संभव है?
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि स्कूल भवनों की हालत गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने टिप्पणी की कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनके लिए सुरक्षित और अनुकूल शिक्षा वातावरण देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अदालत ने 31 अक्टूबर तक राज्य सरकार को प्रकरण में विस्तृत योजना पेश करने को कहा है। जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने यह आदेश झालावाड़ में स्कूल बिल्डिंग गिरने से विद्यार्थियों की मौत के बाद प्रकरण में लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए हैं।
अदालत की कड़ी टिप्पणियां
- सिर्फ फाइलों में काम दिखाकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती।
- कई स्कूल भवन ऐसे हैं जो किसी भी वक्त गिर सकते हैं, वहां पढ़ाना बच्चों की जिंदगी को खतरे में डालना है।
- क्या 5 लाख की राशि में संरचनात्मक मरम्मत, सुरक्षा उपाय, बिजली-पानी जैसी सुविधाएं संभव हैं?
सरकारी जवाब से असंतुष्ट हाईकोर्ट
सरकार की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि प्रत्येक स्कूल के लिए मरम्मत हेतु अधिकतम 5 लाख रुपये का बजट तय किया गया है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह राशि प्रतीकात्मक भर लगती है, असली काम कहाँ हो रहा है?
कोर्ट का निर्देश
- राज्य सरकार अगली सुनवाई से पहले जर्जर स्कूलों की विस्तृत सूची पेश करे।
- बताए कि कितने स्कूलों में मरम्मत का काम शुरू हुआ और कितने पूरे हुए।
- बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, इसका भी ब्यौरा दें।

